गुरुवार, 2 अक्तूबर 2014

चिरंजीव नाथ सिन्हा पुलिस उपाधीक्षक लखनऊ का सशपथ बयान--------गवाह -----------4----------जारी------7

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                    PW4
                    17-4-10
चिरंजीव नाथ सिन्हा पुलिस अधीक्षक
STF लखनऊ ने सशपथ बयान दिया
कि दिनांक 29.3.2010 से आगे
दिनांक 22.12.07 कोSTF आफिस
में लखनऊ को थाना वजीरगंज के मुकदमों
की विवेचना के सम्बंध में यूजवल जिराह
थी। मेरे पहुंचने के बाद श्री अविनाश
मिश्रा STF आफिस आये थे। इसके
पूर्व दो तीन बार STFआफिस में रात
को विजिट किया था। रात का मतलब
10‘11 बजे रात तक मैं अगर जिला
स्थानान्तरण के यहां जो पूछा गया
वह बयान मैंने दिया हैं जिला फैजाबाद में
मैंने फैजाबाद की अदालत में अभियुक्त
खालिद व तारिक गिरफ्तारी से पहले वह
कि घर से आये थे का बयान दिया होगा
मुझे ठीक ठीक इस वक्त याद नही है।
वजीरगंज थाने की विवेचना के दौरान
थाना मडियाहूं की पुलिस तथा जौनपुर जिले
की पुलिस ने अभियुक्त खालिद के सम्बंध में
समाचार पत्र में प्रकाशित समाचार के बाबत
मुझे कुछ नही बताया था।

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विवेचना के दौरान थाना रानी की सरांय
अथवा आजमगढ़ जिले की पुलिस अथवा
जिले के घर मैं नही गया
।ADG कानून व्यवस्था बृजलाल तथा
तत्कालिन डी0जी0 पुलिस प्राविधानों
की मौत अपनी विवेचना में अपगत नही
कराया कार्यालय ।ADG कानून व्यवस्था
अथवा डी0पी0 पुलिस प्रयोग में कार्यालय
से भी विवेचना के दौरान अभियुक्तगण की घर
की ओर से भेजे गये प्रार्थना पत्र फर्द, कोई
हो तो मुझे नही दिया गया न दिखाया गया
वजीरगंज की विवेचना के दौरान इन दोनों
अभियुक्तों के अलावा अन्य लोग के नाम प्रकाश
में नही थे। इससे आफताब आलम अंसारी
का भी नाम दौरान विवेचना प्रकाश में आया था
व तारिक कश्मीरी व हिजामी का नाम आया था
विवेचना में जानकारी करने व गिरफ्तारी का
प्रयास किया गया था अभियुक्त तारिक कश्मीरी
को मा0 CJM  जम्बू की अदालत में
हिरासत पर प्राप्त किया था। अभि0 हेजाबी
के जिसमें मेरे द्वारा जब तक विवेचना की
गई कोई ऐसी सूचना नही प्राप्त हुई थी
वह कहा पर है। मो0 आफताब आलम अंसारी   
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की गिरफ्तारी के लिए लखनऊ के मा0
न्यायालय से गिरफ्तारी वारन्टSTF
कार्यालय लखनऊ को मैंने प्राप्त कराया
था।STF कार्यालय ने दूसरी टीम को
कोलकाता उस गिरफ्तारी वारन्ट के
हेतु भेजा था परन्तु मैं उस टीम का
सदस्य नही था।
आफताब आलम अंसारी की गिरफ्तारी की
सूचना टीम द्वारा (सम्बंधित) मुझे दो
गयी को या नही ठीक ठीक याद
नही है क्योंकि मैं इसी विवेचना से
सम्बंधित जावेद कश्मीर में था।
जम्बू कश्मीर से मेरी वापसी 31 दिसम्बर
को रात्रि में हुई थी जहां तक मुझे याद
है अभियुक्त आफताब आलम अंसारी को
मेरे कस्टडी में दिया गया था गलत नही
जम्बू कश्मीर से लौटने के बाद मुझे
इस वक्त याद नही है। मेरी विवेचना
के दौरान आफताब आलम अंसारी की
विवेचना जम्बू कश्मीर से लौटने के बाद
मैंने पूरी विवेचना विवेचक राज नरायन
शुक्ला को हस्तान्तरित कर दिया था।
आफताब आलम अंसारी की फाइनल रिपोर्ट
लगी या नही मुझे जानकारी नही है।
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श्री जनक प्रसाद द्विवेदी ने तारिक के घर पर
दिनांक 18.12.2007 दबिस देकर बाद में
फर्द बरामदगी सर्वमुहर सामान मुझे प्राप्त
कराया था।
अभियुक्त तारिक व खालिद के गिरफ्तारी के
पूर्व मैंने उस विवेचना का अध्ययन किया था
जिसमें बाबूभाई, नौसाद, आदि आतंकवादी
गिरफ्तार किये गये थे।
यह कहना गलत है मुल्जिमान
हाजिर अदालत को गिरफ्तारी स्तर से
मैंने न गिरफ्तार किया हो।
यह कहना गलत है मुल्जिम तारिक को 12 दिसम्बर
2007 को थाना रानी की सरांय जिला आजमगढ़
से एक मुल्जिमान खालिद को 16.12.2007 को
थाना मडि़याहू जिला जौनपुर से
उठाया गया हो।
यह भी कहना गलत है कि इन दो मुल्जिमानों
की गिरफ्तारी से पूर्व मैंने अखबार में
प्रकाशित तथ्य पढ़े हो।
यह भी कहना गलत है कि मुझे ADC  
एवं डी0जे0 को इनके घर वालों द्वारा दिये
गये प्रार्थना पत्र की मुझे जानकारी नही है।
यह भी कहना गलत है मुल्जिमन तारिक
 व खालिद को उपरोक्त कथित तारीखों
पर उठाये जाने के उपरांत ए0टी0एस0/
STF कार्यालय लखनऊ में रखा गया हो।
यह कहना भी गलत है ए0टी0एस0
STF कार्यालय में रखकर मेरे द्वारा
व अन्य अधिकारी द्वारा प्रताड़ित 
किया गया हो।
यह भी कहना गलत है वर्तमान मुकदमा
के फर्द गिरफ्तारी, गिरफ्तारियों
पूर्व STF कार्यालय लखनऊ में
अविनाश मिश्रा के बोलने
पर लिखी गयी हो।
यह भी कहना गलत है दो हाजिर अदालत
मुल्जिमानों को हम लोगSTF कार्यालय
से लेकर बाराबंकी में लाकर फर्जी
गिरफ्तारी व बरामदगी दिखायी हो।
यह भी कहना गलत है कि मैंने इन
मुल्जिमानों के विरूद्ध बाराबंकी कोतवाली
में कोई रिपोर्ट न लिखवायी हो।
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यह भी कहना गलत है इन दोनों
मुल्जिमानों के पास से बाराबंकी रेलवे
स्टेशन के कथित घटना स्थल पर
गिरफ्तारी के दौरान कोई बरामदगी
न हुई हो।
                सुनकर तस्दीक किया।
प्रमाणित किया जाता है
कि गवाह द्वारा खुले न्यायालय
में पूछने पर जो बताया गया
उसे न्यायालय द्वारा बोल बोल
कर मेरे द्वारा अंकित किया गया।
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