गुरुवार, 20 जुलाई 2023
भाजपा सरकार मणिपुर - शर्मनाक
देश की राजधानी दिल्ली से 2500 किलोमीटर दूर हमारे ही एक राज्य मणिपुर से एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसे देखकर पूरा देश शर्मसार है. ये वीडियो है 79 दिन से हिंसा की आग में जल रहे मणिपुर का. ये हिंसा और उपद्रव का ऐसा वीडियो है, जिसने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है. इस वीडियो में दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर ले जाती हुई भीड़ दिख रही है. इन महिलाओं पर जुल्म का ये दृश्य मणिपुर से लेकर दिल्ली तक समूचे भारत को शर्मसार कर रहा है.
ये घटना 4 मई की है, लेकिन इसका वीडियो कल यानी 19 जुलाई को सामने आया है. इस जुल्म का मुख्य आरोपी अब जाकर गिरफ्तार हुआ है. ये वीडियो महिलाओं की स्थिति, समाज की सुरक्षा और हिंसा पर कंट्रोल को लेकर कई सवाल खड़े करता है. महिलाओं के साथ ऐसी शर्मनाक हरकत को लेकर विपक्ष ने राज्य और केंद्र सरकार को घेर लिया है. कांग्रेस ने पीएम की चुप्पी और सीएम एन बीरेन सिंह पर भी सवाल खड़े किए हैं. वहीं सियासी बवाल के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को इस घटना पर दुख जताते हुए दोषियों पर कठोर कार्रवाई का भरोसा दिलाया है. इधर सुप्रीम कोर्ट ने भी इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए सरकारों से जवाब मांगा है.
महिलाओं से दरिंदगी का क्या है मामला
कूकी महिलाओं से दरिंदगी के मामले में पुलिस ने 21 जून को FIR दर्ज की थी. जो शिकायत दर्ज की गई है, उसके मुताबिक 4 मई की दोपहर करीब 3 बजे 800-1000 लोग बी. फेनोम गांव में घुस आए थे. उन्होंने गांव में तोड़फोड़ करने, संपत्तियां लूटने के बाद घरों को आग लगा दी थी. इस दौरान पांच लोग खुद को बचाने के लिए जंगल में भाग गए थे. इनमें दो पुरुष और तीन महिलाएं शामिल थीं. उनमें 56 वर्षीय एक व्यक्ति, उसका 19 वर्षीय बेटा और 21 वर्षीय बेटी के अलावा 42 वर्षीय और 52 वर्षीय महिलाएं भी शामिल थीं. बाद में पुलिस ने उन्हें जंगल से रेस्क्यू
पुलिस जब उन्हें अपने साथ लेकर आ रही थी, तभी नोंगपोक सेकमाई पुलिस स्टेशन से दो किमी दूर टूबू के पास भीड़ ने उन्हें रोक लिया था और लोगों को अपने साथ खींच ले गए थे. इस दौरान भीड़ ने 56 वर्षीय एक व्यक्ति की हत्या कर दी थी. इसके बाद तीनों महिलाओं के कपड़े उतरवा दिए थे. इसके बाद भीड़ में से ही कुछ लोगों ने 21 वर्षीय युवती का गैंगरेप कर दिया था.युवती के छोटे भाई ने जब इसका विरोध किया तो भीड़ ने उसकी भी हत्या कर दी थी. इस बीच एक महिला भाग निकली. हालांकि भीड़ ने बची दोनों महिलाओं को निर्वस्त्र की सड़क पर घुमाया और एक खेत में ले जाकर छोड़ दिया.
मणिपुर की घटना पर देश शर्मसार
4 मई की घटना, 49 दिन बाद FIR, 78वें दिन गिरफ्तारी... मणिपुर में महिलाओं से दरिंदगी केस में सवाल ही सवाल
मणिपुर मामले में SC सख्त; सरकार से रिपोर्ट तलब, अगले शुक्रवार को सुनवाई
विपक्ष ने सरकार पर लगाए आरोप
पीएम की चुप्पी ने मणिपुर को अराजकता की ओर धकेला
कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि पीएम की चुप्पी और निष्क्रियता ने मणिपुर को अराजकता की ओर धकेल दिया है. जब मणिपुर में भारत के विचार पर हमला किया जा रहा है, तो भारत चुप नहीं रहेगा. हम मणिपुर के लोगों के साथ खड़े हैं. शांति ही आगे बढ़ने का एकमात्र रास्ता है.
मणिपुर में मानवता मर गई: खड़गे
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि मणिपुर में मानवता मर गई है. मोदी सरकार और बीजेपी ने राज्य के नाजुक सामाजिक ताने-बाने को नष्ट करके लोकतंत्र और कानून के शासन को भीड़तंत्र में बदल दिया है. पीएम नरेंद्र मोदी, भारत आपकी चुप्पी को कभी माफ नहीं करेगा. अगर आपकी सरकार में जरा भी विवेक या शर्म बची है, तो आपको संसद में मणिपुर के बारे में बोलना चाहिए और केंद्र और राज्य दोनों में अपनी दोहरी अक्षमता के लिए दूसरों को दोष दिए बिना, देश को बताना चाहिए कि क्या हुआ. आपने अपनी संवैधानिक जिम्मेदारी छोड़ दी है. संकट की इस घड़ी में हम मणिपुर के लोगों के साथ खड़े हैं.
जयराम रमेश ने बोला हमला
इंटरनेट बैन के कारण घटी घटना: जयराम
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने मणिपुर हिंसा पर पीएम नरेंद्र मोदी को घेरा है. उन्होंने ट्वीट कर कहा कि मणिपुर में बड़े पैमाने पर जातीय हिंसा भड़के 78 दिन हो गए हैं. उस भयावह घटना को 77 दिन हो गए हैं, जिसमें दो महिलाओं को निर्वस्त्र कर घुमाया गया और कथित तौर पर बलात्कार किया गया. अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज किए जाने के 63 दिन बाद भी अपराधी अभी भी फरार हैं.
शेष भारत को इस बात का जरा भी अंदाजा नहीं था कि मणिपुर में जारी इंटरनेट बैन के कारण इतनी भयानक घटना घटी, लेकिन यह बिल्कुल अक्षम्य है कि महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने मणिपुर के सीएम से बात करने या बयान जारी करने के लिए 76 दिनों तक इंतजार किया.
क्या केंद्र सरकार, गृह मंत्री या प्रधानमंत्री को इसकी जानकारी नहीं थी? मोदी सरकार 'सब कुछ ठीक है' जैसी बातें करना कब बंद करेगी? कब बदला जाएगा मणिपुर का सीएम? ऐसी और कितनी घटनाओं को दबाया गया है? जैसे ही आज से मॉनसून सत्र शुरू होगा, भारत जवाब मांगेगा. चुप्पी तोडिये प्रधानमंत्री जी!
केजरीवाल ने किया ट्वीट
ऐसी घिनौनी हरकत बर्दाशत नहीं की जा सकती: केजरीवाल
दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने कहा- मणिपुर की वारदात बेहद शर्मनाक और निंदनीय है. भारतीय समाज में इस तरह की घिनौनी हरकत बर्दाश्त नहीं की जा सकती. मणिपुर के हालात बेहद चिंताजनक बनते जा रहे हैं। मैं प्रधानमंत्री जी से अपील करता हूं कि वे मणिपुर के हालातों पर ध्यान दें. इस वारदात की वीडियो में दिख रहे दोषियों पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई करें. भारत में ऐसे आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए.
एक क्रूर शासक के रूप में सामने आए पीएम: संजय सिंह
AAP सांसद संजय सिंह ने कहा कि मणिपुर की हिंसा 4 महीनो से चल रही है, प्रधानमंत्री जी खामोश है, एक क्रूर और संवेदनहीन शासक के रूप में प्रधानमंत्री सामने आए है, मणिपुर की सरकार को तुरंत बर्खास्त कर देना चाहिए.
उन्होंने कहा- 'मोदी जी आप कितने संवेदनहीन हो? मणिपुर में दरिंदगी की सारी सीमाएं पार हो चुकी हैं. महिला को नंगा करके घुमाया जा रहा है, बच्चों बुजुर्गों और नौजवानों की हत्या हो रही है. मोदी जी आप कुछ बोलते क्यों नहीं? मणिपुर जल रहा है मोदी सो रहा है.'
उन्होंने कहा कि मणिपुर की तस्वीरें मन को विचलित करने वाली हैं. आखिर एक देश का शासक इतना क्रूर और संवेदनहीन कैसे हो सकता है? मोदी जी नींद से कब जागेंगे? सदन में सरकार मणिपुर पर जवाब दे. मैंने 267 का नोटिस दिया है. सीएम का तुरंत इस्तीफा लेकर सरकार को बर्खास्त करें.
स्मृति ईरानी को इस्तीफा दे देना चाहिए: प्रियंका चतुर्वेदी
शिवसेना (यूबीटी) ने मणिपुर मामले में केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के इस्तीफे की मांग की. शिवसेना (यूबीटी) सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने एएनआई से कहा, "संसद में आज सबसे प्रमुख मुद्दा मणिपुर संकट होगा. दो महीने पहले हुए यौन उत्पीड़न के जघन्य अपराध ने पूरे देश को शर्मसार कर दिया है और बेहद परेशान करने वाला है.
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संसद के माध्यम से देश को जवाब देना चाहिए कि संघर्षग्रस्त राज्य पर शून्य जवाबदेही क्यों है, जहां 3 मई को जातीय झड़पें हुईं. पहले एक नाटक था कि सीएम बीरेन सिंह इस्तीफा दे देंगे. महिला कल्याण की जिम्मेदारी संभाल रहीं स्मृति ईरानी ने आज तक कोई बयान जारी नहीं किया है. कल उन्हें वीडियो पर आक्रोश के कारण भारी जन दबाव का हवाला देते हुए ट्वीट करने के लिए मजबूर होना पड़ा. आज तक ईरानी ने मणिपुर में महिलाओं की दुर्दशा का जायजा लेने की जहमत नहीं उठाई. मैं चाहूंगी कि ऐसे अक्षम मंत्री... देश के सबसे अक्षम मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए."
मणिपुर के हालात के लिए RSS और बीजेपी जिम्मेदार
यूपी के पूर्व सीएम और सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने कहा कि मणिपुर के हालात के लिए आरएसएस की नफरत की नीति और भाजपा की वोट की राजनीति जिम्मेदार है. बहन-बेटियों के परिवारवाले अब तो भाजपा की ओर देखने तक से पहले एक बार ज़रूर सोचेंगे.
पीएम को दो महीने बाद नरसंहार का आया ख्याल
AIMIM चीफ असदुद्दीन औवेसी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2 महीने के बाद ख्याल आया कि वहां कूकी समुदाय के लोगों का नरसंहार हो रहा है. उन्होंने मजबूरी में प्रतिक्रिया दी है, क्योंकि वीडियो पूरी दुनिया में वायरल हो रहा है कि किस प्रकार से वहां महिलाओं को पुलिस की गिरफ्त से निकाल कर उनके साथ बर्बरता की गई.
अबतक नहीं हुई गिरफ्तारी: स्वाति मालिवाल
दिल्ली महिला आयोग की अध्यक्ष ने भी वायरल वीडियो पर कहा कि मणिपुर से एक बहुत की खतरनाक वीडियो सामने आया है, जिसको देखकर मैं सहम गई और पूरी रात मुझे नींद नहीं आई. वीडियो में साफ दिख रहा है कि किस तरह से दो लड़कियों को आदमियों का झुंड घेर लेता है और उनके साथ सबसे बड़ी अभद्र हरकत करते हैं. लड़कियों को निर्वस्त्र करके परेड कराया जाता है. इस दौरान उन्हें नोंच जाता है. उनके साथ घटना ढाई महीने पहले की है लेकिन अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है.
मुझे शर्म आती है कि किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है. केंद्र सरकार चुप है. पीएम ने एक भी बयान नहीं दिया है. मैं आज मणिपुर के सीएम और पीएम मोदी को मणिपुर में हिंसा खत्म करने और आरोपियों और पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए लिख रही हूं."
हिंसा में महिलाओं का टूल की तरह इस्तेमाल करना गलत: सीजेआई
सुप्रीम कोर्ट ने भी महिलाओं से दरिंदगी की घटना को स्वत: संज्ञान ले लिया है. चीफ जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ ने कहा कि कल जो वीडियो सामने आया है, उसे देखकर वह स्तब्ध हैं. ऐसी घटनाएं पूरी तरह से अस्वीकार्य हैं. हिंसा में महिलाओं को एक उपकरण के रूप में उपयोग करना मानवाधिकारों और संवैधानिक अधिकारों का सबसे बड़ा उल्लंघन है. हम सरकार को इस पर कार्रवाई के लिए कुछ समय दे रहे हैं, नहीं तो फिर हम कार्रवाई करेंगे. यह बहुत ही परेशान करने वाली घटना है.
सुप्रीम कोर्ट ने कहा, "हम जानना चाहते हैं कि सरकार ने क्या कदम उठाए हैं ताकि ऐसी घटनाएं दोहराई न जाएं. हम सरकार को कठोर कदम उठाने का निर्देश देते हैं. सीजेआई ने कहा कि इस मामले में सरकार द्वारा उठाए गए कदमों को अदालत को अवगत कराया जाना चाहिए, ताकि अपराधियों पर ऐसी हिंसा के लिए मामला दर्ज किया जा सके. मीडिया में जो दिखाया गया है और वीडियो सामने आए हैं, वे घोर संवैधानिक उल्लंघन को दिखाते हैं. हम इस मामले में 28 जुलाई को सुनवाई करेंगे.
ससंद के हंगामेदार होने के पूरे आसार
मणिपुर हिंसा और कुकी महिलाओं को निर्वस्त्र कर परेड कराने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है. इस बात के पूरे आसार है कि संसद के मॉनसून सत्र में इस मुद्दे पर विपक्ष जमकर हंगामा करेगा. विपक्ष की मांग है कि एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल बिना देरी के मणिपुर भेजा जाए.
मंगलवार, 18 जुलाई 2023
राज्यसभा सांसद ने असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ दर्ज कराया मामला, मुस्लिमों पर की थी टिप्पणी
राज्यसभा सांसद ने असम के मुख्यमंत्री के खिलाफ दर्ज कराया मामला, मुस्लिमों पर की थी टिप्पणी
राज्यसभा सदस्य अजीत भूइयां ने पत्रकारों से कहा, हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट का साफ जजमेंट है। लेकिन असम के मुख्यमंत्री लगातार असम में समुदायों में नफरत फैला रहे हैं। उन्होंने कहा, जिस तरह से असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सार्वजनिक रूप से एक समुदाय पर हमला कर रहे हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सीधा-सीधा उल्लंघन है...
राज्यसभा सांसद अजीत कुमार भुइयां ने मिया समुदाय (मुस्लिम) पर की गई टिप्पणी को लेकर असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। भूइयां ने कहा, पहले देखेंगे कि पुलिस क्या करती है, फिर उसके बाद आगे की कार्रवाई पर सोचेंगे।
भूइयां की ओर से दिसपुर पुलिस स्टेशन में दर्ज की गई एफआईआर में कहा गया है, असम के सीएम हिमंत बिस्वा सरमा ने ऊपरी असम क्षेत्र के लोगों को गुवाहाटी आने के लिए कहा और उस स्थिति में वह गुवाहाटी को मियाओं से खाली करा देंगे। प्रत्यक्ष तौर पर इस तरह के बयान राज्य में विभिन्न समुदायों के बीच विभाजन पैदा करने और राष्ट्रीय एकता के लिए स्पष्ट रूप से प्रतिकूल हैं।
राज्यसभा सदस्य अजीत भूइयां ने अमर उजाला से कहा, हेट स्पीच पर सुप्रीम कोर्ट का साफ जजमेंट है। लेकिन असम के मुख्यमंत्री लगातार असम में समुदायों में नफरत फैला रहे हैं। उन्होंने कहा, जिस तरह से असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा सार्वजनिक रूप से एक समुदाय पर हमला कर रहे हैं, जो सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का सीधा-सीधा उल्लंघन है। उन्होंने कहा, मैंने आज उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। देखते हैं पुलिस क्या एक्शन लेती है। उसके बाद सोचेंगे कि क्या करना है।
उन्होंने मुख्यमंत्री के बयान को संज्ञान में लाते हुए भारतीय दंड संहिता की धारा 153ए, 153बी और धारा 295ए के तहत मामला दर्ज करने और मामले की जांच करने और कार्रवाई करने का अनुरोध किया है।
रविवार, 16 जुलाई 2023
देश में एक डर का माहौल बन गया है-वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे का इंटरव्यू
बोले, देश में एक डर का माहौल बन गया है
जजों के फैसले पर बोले, आलोचना करना अधिकार
नई दिल्ली: जब नेताओं से सवाल पूछा जाता है तो वे जवाब देने से यह कहकर बच जाते हैं कि मामला कोर्ट में विचाराधीन है, हम इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते। जब यही बात सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील दुष्यंत दवे के सामने रखी गई तो उन्होंने कहा कि हमारी कानून व्यवस्था इतनी कमजोर हो गई है कि ये सब लोग उसका फायदा लेकर सत्ता में बने रहते हैं, जो देश के लिए अच्छी बात नहीं है। 'लल्लनटॉप' को दिए इंटरव्यू में जब दवे से लोगों के आलोचना के अधिकार की बात की गई तो उन्होंने कहा कि देश में एक डर का मौहाल बन गया है। ये दुख की बात है कि आज लोग अपने विचार व्यक्त नहीं कर पाते हैं। आपने देखा कि बहुत सारे लोगों को एक ट्वीट पर जेल में डाल दिया जाता है, ये सब होना नहीं चाहिए लेकिन हो रहा है और जूडिशरी देख रही है इसको खुली आंख से।
जज के फैसले की आलोचना क्यों नहीं कर सकते?
दवे से जब कहा गया कि जूडिशरी पर तो कोई कॉमेंट ही नहीं कर सकता। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील ने जवाब दिया, 'आलोचना करना हमारे यहां एक फंडामेंटल राइट है तो जजों के फैसलों को आप जरूर क्रिटिसाइज कर सकते हैं, हां जज की निजी तौर पर आलोचना नहीं कर सकते हैं।'
'मन की बात' का क्या मतलब है
दवे से जब पूछा गया कि रविवार को मन की बात सुनते हैं या नहीं रेडियो पर? दवे ने जवाब दिया, 'हर संडे को मन की बात का क्या मतलब है, भक्ति की भी लिमिट है। भक्ति गलत बात नहीं है। प्रधानमंत्री सही रास्ते पर देश को नहीं ले जा रहे हैं और जो पीएम की शक्तियां हैं इस देश को आगे ले जाने के लिए, उसका सही इस्तेमाल नहीं हो रहा है।'
सवाल नहीं पूछ सकते तो भक्ति कैसी
दुष्यंत दवे ने आगे कहा कि जो भी भाजपा या कांग्रेस की विचारधारा को मानता है उसको शक्ति होनी चाहिए कि वह कांग्रेस या बीजेपी के लीडर्स से सवाल पूछ सके। जब तक वो न हो तब तक भक्ति का क्या फायदा है।
हिंदुस्तान में शरिया तो नहीं आया
उन्होंने कहा, 'आज अल्पसंख्यकों पर अटैक हो रहे हैं, कितने सारे केस क्रिश्चियन समुदाय के ऊपर हैं, मैं जानता हूं। आप मुसलमानों के खिलाफ हैं। 800 साल मुसलमान रहा सत्ता में, हिंदुस्तान इस्लामिक तो नहीं बना। हिंदुस्तान में शरिया लॉ तो नहीं आया!'
'लल्लनटॉप' को दिए इंटरव्यू में हंसी के पल भी आए। जब फीस की बात की गई तो दवे ने कहा कि हर साल करीब 100 गरीबों के फ्री में केस लड़ता हूं और जो अफॉर्ड कर सकता है उससे कोई रहम नहीं दिखाता हूं। काम करने के तरीके के बारे में पूछने पर दवे ने कहा कि हम वकील लोग बिना कारण केस में 100, 200-500 पेज ऐसे ही डाल देते हैं। वजह पूछने पर बोले, 'हो सकता है क्लाइंट को खुश करने के लिए, हो सकता है अपनी फीस को जस्टिफाई करने के लिए'।
गुरुवार, 13 जुलाई 2023
मणिपुर में हिंसा पीडितों का हाल जानने पर महिला नेताओं पर राजद्रोह का मुकदमा
मणिपुर में हिंसा पीडितों का हाल जानने पर महिला नेताओं पर राजद्रोह का मुकदमा
मणिपुर में सांप्रदायिक हिंसा की जांच करने गए भारतीय महिला महासंघ (NFIW) के दल पर हुआ एफ.आई. आर. गैर ज़िम्मेदार कृत्य है और इस तुरन्त वापस ले सरकार
भारतीय महिला महासंघ की तरफ से मणिपुर हिंसा की जांच करने गई टीम पर की गई प्राथमिकी गैर ज़िम्मेदार कृत्य है और वस्तुस्थिति जानने के नागरिक अधिकारों का हनन है। भारतीय महिला महासंघ की राष्ट्रीय महासचिव एनी राजा, राष्ट्रीय सचिव निशा सिद्धु और एडवोकेट दीक्षा पर मणिपुर दौरे में नागरिकों विशेषकर महिलाओं पर हो रहे हिंसा की फैक्ट फाइंडिंग करने कारण एफ.आई .आर दर्ज किया गया है।
हमारे देश का कानून और संविधान अपने नागरिकों को अधिकार देता है कि वह स्वयं वस्तुस्थिति का आकलन करें और ज़मीनी हकीकत से देश, आवाम को अवगत कराएं। सिविल लिबर्टी पर सरकार की ये तानाशाही अत्यंत ही खेद जनक है।
इप्टा की राष्ट्रीय समिति भारतीय महिला महासंघ के साथियों पर की गई प्राथमिकी तुरंत वापस लेने और दोषी पदाधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग करती है।
ये हास्यास्पद है कि ये प्राथमिकी उस समय दर्ज किया गया जब भारतीय महिला महासंघ के साथी मणिपुर में हो रहे लगातार हिंसा के खिलाफ शांति बहाल की अपील करने गई थी और वहां के लोगों की हालत का जायज़ा लेने गई थीं।
मणिपुर हमारे देश का अटूट हिस्सा है, वहाँ लंबे समय से हिंसा और तनाव का माहौल है। 55 दिनों तक मणिपुर में शांति बहाल करने के लिए सरकार और प्रशासन ने कुछ नहीं किया। जब उनकी नाकामियों पर सवाल उठ रहे हैं तो सवाल करने वालों पर प्राथमिकी दर्ज किया जा रहा है। भारतीय महिला महासंघ की अन्य राज्यों की तरह मणिपुर में भी इकाई है। अपने साथियों का हाल- चाल जानने और सरकार और प्रशासन से इस मामले की जानकारी लेने महासंघ की टीम मणिपुर गई थी।
यह इस बात का संकेत है कि सरकार अपनी असफलताओं को उजागर होने से डर रही है। और जो लोग सरकार से सवाल कर रहे हैं उन्हें सलाखों के पीछे भेजना चाहती है। मणिपुर की जनता सरकार के मंसूबे को पूरा नहीं होने देगी। हम भारत के लोग एकजुट हैं। इस देश के नागरिक है और उनके बीच अमन और भाईचारा के लिए प्रयत्नशील है।
ये जिम्मेदारी राज्य और केन्द्र की सरकार की बनती है कि अपने राज्य की जनता के बीच अमन कायम करे। ऐसी बर्बर हिंसा पर रोक लगाए।
मंगलवार, 11 जुलाई 2023
पाकिस्तानी जासूस नवीन गिरफ्तार
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लगातार फंसाकर गोपनीय जानकारी ली जा रही है। ऐसा ही कुछ मामला गाजियाबाद से सामने आया है। यहां गृह मंत्रालय में तैनात कर्मचारी से महिला उससे सारी जानकारी ले रही थी।
गाजियाबाद: उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद में एक हनीट्रैप का मामला सामने आया है। गृह मंत्रालय में तैनात नवीन पाल को हनीट्रैप में एक महिला जाल में फंसाकर उससे गोपनीय दस्तावेज मंगा लिए। नवीन जिस महिला को कोलकाता का अंजलि समझकर उसको दस्तावेज भेज रहा था, दरअसल वह पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई से जुड़ी बताई जा रही है। ये भी कहा जा रहा है कि वह आईएसआई की कोई अधिकारी या कर्मचारी हो सकती है। यही नहीं उसने नवीन पटेल से जानकारी लेने के लिए 85 हजार रुपये भी दिए। पुलिस ने नवीन को गिरफ्तार कर लिया है।
क्रॉसिंग रिपब्लिक कॉलोनी के भीमनगर का रहने वाला नवीन 12वीं पास है और वह गृह मंत्रालय में संविदा पर तैनात है। देश की खुफिया एजेंसियों को जानकारी मिली कि दो महीने से तमाम गोपनीय दस्तावेज नवीन महिला को भेज रहा है। वॉट्सऐप पर अंजलि नाम की महिला से चैट कर रहा है। पहले अंजलि उसको अपने जाल में फंसाया और फिर अपनी मीठी-मीठी बातों में फंसाकर सारी जानकारी लेना शुरू कर दिया। अंजलि जो भी मांगती थी, नवीन दे देता था। इन सबके बदले वह नवीन को पेटीएम से रुपये भी भेजती थी।
पकड़े गए युवक के मोबाइल डाटा से ये जानकारी मिली है कि उसने जी-20 से जुड़े दस्तावेज महिला को भेजे हैं। एक दस्तावेज भेजने पर पांच से दस हजार रुपये मिलते थे। नवीन ने महिला को कई नक्शे भी भेजे हैं। जब उससे पूछताछ की गई तो उसने बताया कि उसको नहीं मालूम था कि दस्तावेज पाकिस्तान जा रहे हैं। पुलिस उसकी बातों पर भरोसा नहीं कर रही है और शक है, ये किसी गिरोह से जुड़ा हो सकता है। वहीं, डीसीपी देहात शुभम पटेल ने बताया कि नवीन के खिलाफ एनएसए की कार्रवाई की जाएगी। बैंक खातों की डिटेल निकलवाई जा रही है।
उच्चतम न्यायालय ने ईडी डायरेक्टर की नियुक्ति अवैध ठहराई - सरकार को बड़ा झटका
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी निदेशक के कार्यकाल विस्तार को अवैध ठहराया, 31 जुलाई तक काम की इजाजत दी
सुप्रीम कोर्ट ने ईडी निदेशक के कार्यकाल विस्तार को अवैध ठहराया, 31 जुलाई तक काम की इजाजत दी
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कॉमन कॉज मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2021 के फैसले के आदेश का उल्लंघन करने के लिए प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुख एसके मिश्रा के कार्यकाल को दिए गए विस्तार को अवैध ठहराया और कहा कि उन्हें और विस्तार नहीं दिया जाना चाहिए। हालांकि, न्यायालय ने अंतरराष्ट्रीय निकाय एफएटीएफ की समीक्षा और कामकाज के सुचारू हस्तांतरण के संबंध में केंद्र सरकार द्वारा व्यक्त की गई चिंताओं को ध्यान में रखते हुए उन्हें 31 जुलाई, 2023 तक अपने पद पर बने रहने की अनुमति दी।
न्यायालय ने केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम और दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम में किए गए संशोधनों को भी बरकरार रखा, जो केंद्र को ईडी और सीबीआई के प्रमुखों का कार्यकाल 5 साल तक बढ़ाने की अनुमति देता है।
यह कहते हुए कि कानून पर न्यायिक समीक्षा का दायरा बहुत सीमित है और इन अधिकारियों की नियुक्तियां एक उच्च-स्तरीय समिति द्वारा की जाती हैं, न्यायालय ने यह देखते हुएइन संशोधनों को बरकरार रखा कि पर्याप्त सुरक्षा उपाय हैं। कोर्ट ने कहा कि जनहित में और लिखित कारण के साथ उच्च स्तरीय अधिकारियों को विस्तार दिया जा सकता है।
जस्टिस बीआर गवई, जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संजय करोल की तीन-न्यायाधीशों की पीठ ने मिश्रा की नियुक्ति के साथ-साथ केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम में हालिया संशोधन को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई की। याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस नेता जया ठाकुर, रणदीप सिंह सुरजेवाला, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और पार्टी प्रवक्ता साकेत गोखले शामिल हैं। पीठ ने मई में अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
पीठ ने मोटे तौर पर दो मुद्दों पर विचार किया - पहला, संशोधनों की वैधता के संबंध में; दूसरा, मिश्रा के कार्यकाल के लिए दिए गए विस्तार की वैधता।
पहले मुद्दे में संघ के पक्ष में फैसला सुनाते हुए, दूसरे मुद्दे के संबंध में, न्यायालय ने माना कि विस्तार स्पष्ट रूप से सामान्य कारण के फैसले के अनुरूप है ।
जस्टिस गवई ने फैसले के ऑपरेटिव भागों की घोषणा करते हुए कहा, "हालांकि किसी फैसले का आधार हटाया जा सकता है, विधायिका उस विशिष्ट परमादेश को रद्द नहीं कर सकती है जो आगे के विस्तार पर रोक लगाता है...यह न्यायिक अधिनियम पर अपील में बैठने के समान होगा।" इसलिए, एसके मिश्रा को एक-एक वर्ष की अवधि के लिए विस्तार देने के 17 नवंबर, 2021 और 17 नवंबर, 2022 के आदेशों को अवैध माना गया।
केंद्र सरकार ईडी प्रमुख संजय कुमार मिश्रा के कार्यकाल को बढ़ाने के अपने फैसले पर लंबे समय तक राजनीतिक विवाद में उलझी रही है, जिन्हें पहली बार नवंबर 2018 में नियुक्त किया गया था। नियुक्ति आदेश के अनुसार, वह दो साल बाद 60 साल की उम्र तक पहुंचने पर सेवानिवृत्त होने वाले थे। हालांकि, नवंबर 2020 में सरकार ने आदेश को पूर्वव्यापी रूप से संशोधित करते हुए उनका कार्यकाल दो साल से बढ़ाकर तीन साल कर दिया। कॉमन कॉज़ बनाम भारत संघ मामले में इस पूर्वव्यापी संशोधन की वैधता और मिश्रा के कार्यकाल को एक अतिरिक्त वर्ष के विस्तार की जांच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया गया था। जस्टिस एल नागेश्वर राव की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि विस्तार केवल 'दुर्लभ और असाधारण मामलों' में थोड़े समय के लिए दिया जा सकता है। मिश्रा के कार्यकाल को बढ़ाने के कदम की पुष्टि करते हुए, शीर्ष अदालत ने आगाह किया कि निदेशालय के प्रमुख को कोई और विस्तार नहीं दिया जाएगा।
नवंबर 2021 में, मिश्रा के सेवानिवृत्त होने से तीन दिन पहले, भारत के राष्ट्रपति द्वारा दिल्ली विशेष पुलिस स्थापना अधिनियम, 1946 और केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम, संसद द्वारा दिसंबर 2003 में संशोधन करते हुए दो अध्यादेश पारित किए गए थे। इन संशोधनों के बल पर, अब सीबीआई और ईडी दोनों निदेशकों का कार्यकाल प्रारंभिक नियुक्ति से पांच साल पूरा होने तक एक बार में एक वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है। पिछले साल नवंबर में मिश्रा को एक साल का विस्तार और दिया गया था, जिसे अब चुनौती दी गई थी
केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम में हालिया संशोधन को भी कम से कम आठ अलग-अलग जनहित याचिकाओं में शीर्ष अदालत के समक्ष चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ताओं में कांग्रेस नेता जया ठाकुर, रणदीप सिंह सुरजेवाला, तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा और पार्टी प्रवक्ता साकेत गोखले शामिल हैं। कॉमन कॉज़ में शीर्ष अदालत द्वारा जारी निषेधाज्ञा का उल्लंघन करने के लिए आलोचना के अलावा, सीबीआई और ईडी के निदेशकों की नियुक्ति और कार्यकाल पर केंद्र को "अनियंत्रित विवेक" प्रदान करने और इसलिए, कथित तौर पर जांच निकायों की स्वतंत्रता से समझौता करने के लिए अध्यादेशों को चुनौती दी गई थी।
एक जवाबी हलफनामे में, केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि याचिकाएं परोक्ष राजनीतिक हितों से प्रेरित हैं क्योंकि वे उन राजनीतिक दलों से संबंधित याचिकाकर्ताओं की ओर से दायर की गई हैं जिनके नेताओं के खिलाफ वर्तमान में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में जांच चल रही है। केंद्र सरकार का आरोप है कि याचिकाएं "यह सुनिश्चित करने के लिए दायर की गई हैं कि प्रवर्तन निदेशालय अपने कर्तव्यों का निडर होकर निर्वहन नहीं कर सकता है।" हलफनामे में कहा गया है, “याचिकाकर्ता को केवल यह विश्वास होगा कि ये एजेंसियां स्वतंत्र हैं यदि ये एजेंसियां उनके राजनीतिक दल के राजनीतिक नेताओं द्वारा किए गए अपराधों के प्रति आंखें मूंद लें।
एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में, फरवरी में, एमिक्स क्यूरी केवी विश्वनाथन (जिन्हें न्यायाधीश के रूप में शीर्ष अदालत में पदोन्नत किया गया) ने जस्टिस गवई और जस्टिस अरविंद कुमार की पीठ को बताया कि न केवल प्रवर्तन निदेशालय के प्रमुख को तीसरा विस्तार बल्कि केंद्रीय सतर्कता आयोग अधिनियम में संशोधन , जिसमें केंद्र सरकार को कार्यकाल को एक बार में एक वर्ष तक, कुल पांच वर्ष तक बढ़ाने की अनुमति दी गई थी, अवैध था। विश्वनाथन ने पीठ को बताया, “विनीत नारायण, प्रकाश सिंह I, प्रकाश सिंह II, कॉमन कॉज़ I और कॉमन कॉज़ II के निर्णयों की लंबी कतार को ध्यान में रखते हुए विस्तार आदेश और वैधानिक संशोधन अवैध हैं ”
कई घंटों के दौरान, याचिकाकर्ताओं के वकील ने जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता के बारे में चिंता जताई और बताया कि सीनियर एडवोकेट गोपाल शंकरनारायणन ने उक्त एजेंसियों के प्रमुखों को एक समय में टुकड़ों में केवल एक साल का विस्तार देने को 'गाजर और छड़ी की नीति' के रूप में वर्णित किया है ।
शंकरनारायणन ने समझाया:
"पदस्थों पर विस्तार की तलवार लटकाने और उनके प्रदर्शन पर आगे के विस्तार के अनुदान को आकस्मिक बनाने की गाजर-और-छड़ी नीति की समस्या, निदेशक की निगरानी वाली जांच स्वतंत्र नहीं हो सकती है।"
विश्वनाथन ने प्रवर्तन निदेशालय जैसे संस्थानों की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के महत्व के बारे में भी बात की, और दृढ़ता से तर्क दिया कि लोकतंत्र के व्यापक हित में ऐसे संस्थानों को कार्यपालिका प्रभाव से अलग रखा जाना चाहिए। विशेष रूप से, उन्होंने पीठ से कहा, "ये एजेंसियां महत्वपूर्ण काम करती हैं और इन्हें न केवल स्वतंत्रता बल्कि स्वतंत्रता की धारणा की आवश्यकता है।"
दूसरी ओर, सॉलिसिटर-जनरल ने ईडी निदेशक के कार्यकाल को बढ़ाने के सरकार के फैसले का इस आधार पर बचाव करने की मांग की कि नेतृत्व में निरंतरता सुनिश्चित करना अनिवार्य था, खासकर आगामी वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) की सहकर्मी समीक्षा के मद्देनजर जो 2023 में होने वाला है। वॉचडॉग के मानदंडों के अनुसार भारत के प्रदर्शन का मूल्यांकन एक दशक के बाद इस वर्ष किया जाएगा। उन्होंने यह भी बताया कि इस मूल्यांकन के आधार पर, देशों को उनके प्रदर्शन के स्तर को इंगित करने वाली सूचियों में वर्गीकृत किया गया है, जो अंततः उन्हें विश्व बैंक और एशियाई विकास जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठनों से न केवल वित्तीय सहायता प्राप्त करने, बल्कि विदेशी बैंकों से उधार लेने और कई अन्य लाभ का भी हकदार (या, वंचित) करेगा।
अन्य बातों के अलावा, यह तर्क देने के अलावा कि विवादित संशोधन राष्ट्रीय हित में आवश्यक था, सॉलिसिटर-जनरल ने याचिकाकर्ताओं के इस तर्क का भी सख्ती से खंडन किया कि एक-एक वर्ष की समय-समय पर विस्तार देने की नीति गाजर छड़ी के समान होगी
कानून अधिकारी ने कहा,
"यह तर्क दोधारी तलवार है।"
उन्होंने बताया,
"एक बार में एक साल का विस्तार देने की नीति वास्तव में यह सुनिश्चित करेगी कि अधिकारी खुद के लिए कानून न बनें, और दूसरा, ताकि वे गैर-निष्पादक न बनें।"
सभी वकीलों की दलीलें सुनने के बाद जस्टिस गवई की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने 8 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।
मामले का विवरण- जया ठाकुर बनाम भारत संघ एवं अन्य। | 2022 की रिट याचिका (सिविल) संख्या 1106 और संबंधित मामले।
सोमवार, 10 जुलाई 2023
टमाटर को मिले Z श्रेणी की सुरक्षा...अखिलेश यादव
टमाटर को मिले Z श्रेणी की सुरक्षा... सब्जी विक्रेता ने सिक्योरिटी : वाराणसी में एक सब्जी विक्रेता ने टमाटर की सुरक्षा में बाउंसर लगाए हैं। विक्रेता ने कहा कि टमाटर काफी महंग बिक रहा है और इसके लिए मारपीट हो जाती है। ऐसे में उसकी सुरक्षा के लिए बाउंसर रखे गए हैं।
टमाटर की सुरक्षा में लगे बाउंसर
टमाटर की सुरक्षा में लगे बाउंसर
वाराणसीः कभी किसी ने सोचा था कि टमाटर ऐसा कीमती हो जाएगा कि उसकी सुरक्षा के लिए बाउंसर लगाने पड़ेंगे। नहीं सोचा होगा लेकिन यह आज का सच है। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में एक सब्जी बेचने वाले ने दो बाउंसर सिर्फ इसलिए हायर किए हैं कि वो उन ग्राहकों को महंगे टमाटर से दूर रखें, जो इसकी कीमत को लेकर दुकानदार से बहस करते हैं। इसका एक वीडियो भी सामने आया है, जिसे सपा मुखिया अखिलेश यादव ने भी शेयर किया है। उन्होंने इसके जरिए बीजेपी सरकार से मांग की है कि वह टमाटर को जेड श्रेणी की सुरक्षा दे।
बता दें कि बीते दिनों से टमाटर की कीमत में भारी बढ़ोतरी देखी गई है। लोगों के रोज के भोजन का अहम हिस्सा टमाटर 160 रुपये प्रति किलो से भी ज्यादा पैसों में बिक रहा है। इसी बीच वाराणसी में सब्जी बेचने वाले अजय फौजी ने अपनी दुकान पर टमाटरों की सुरक्षा के लिए दो बाउंसर हायर किए हैं। एक वीडियो सामने आया है, जिसमें उनकी दुकान के सामने दो बाउंसर देखे जा सकते हैं। ये बाउंसर दुकान की ओर बढ़ रहे एक ग्राहक को रोक देते हैं और उसे हिदायत देते हैं कि वह टमाटर को दूर से देखे। छूने की कोशिश न करे।
अजय फौजी से जब इस बारे में बात की गई तो उन्होंने कहा, 'बाउंसर हमने इसलिए लगाए हैं क्योंकि टमाटर की महंगाई आप लोग देख रहे हैं। आप लोगों को पता चल रहा होगा कि टमाटर के लिए मारपीट, लूट, मारा-पीटा जा रहा है। कई जगह ये घटना हुई है। हमने टमाटर मंगाया हुआ था, इसलिए यहां पर वाद-विवाद न हो, इसलिए हमने बाउंसर लगा रखे हैं।' उन्होंने कहा कि महंगाई से इतने त्रस्त हैं मोदी जी के राज में। अब इस महंगाई के समय में आपको 160 रुपये किलो टमाटर बिक रहा है। कोई 50 ग्राम कोई 100 ग्राम ले रहा है।
अजय फौजी की दुकान पर दो पोस्टर भी लगे दिखाई दे रहे हैं। इन पोस्टरों पर 'पहले पैसा बाद में टमाटर' और 'कृपया टमाटर और मिर्च को नहीं छुएं' लिखा है। इस वीडियो को शेयर करते हुए अखिलेश यादव ने भी बीजेपी सरकार पर चुटकी ली है। उन्होंने वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा कि बीजेपी सरकार टमाटर को जेड श्रेणी की सुरक्षा दे।
शनिवार, 8 जुलाई 2023
राहुल गांधी का नया रुप - धान की रोपाई करते हुए
खेतों में किसानों के बीच पहुंचकर राहुल गांधी एक किसान की तरह ही काम करते दिखे तो ग्रामीण भी चौंक गए।
खेतों में किसानों के बीच पहुंचकर राहुल गांधी एक किसान की तरह ही काम करते दिखे तो ग्रामीण भी चौंक गए।
कांग्रेस नेता राहुल गांधी शनिवार सुबह अचानक हरियाणा के सोनीपत में रुके। यहां उन्होंने किसानों के साथ खेतों में धान की रोपाई की। उन्होंने ट्रैक्टर चलाकर खेत की जुताई भी की। इस दौरान किसानों और खेत मजदूरों के साथ खेती-किसानी पर बातचीत भी की। राहुल ने किसानों के साथ ही बैठकर नाश्ता भी किया।
राहुल गांधी दिल्ली से शिमला जा रहे थे। वे जीटी रोड पर कुंडली बॉर्डर पहुंचे तो किसानों के बीच जाने का प्रोग्राम बना लिया और सोनीपत के ग्रामीण इलाके का रुख कर लिया। राहुल गांधी NH 48 से मुरथल होते हुए कुराड़ रोड से बाइपास के रास्ते गोहाना की तरफ रवाना हुए। इसके बाद वे अपने रूट से हट कर करीब 50 किलोमीटर दूर बरोदा विधानसभा क्षेत्र के गांव मदीना में सुबह करीब 6:40 बजे पहुंचे गए। वे भैंसवान-मदीना रोड पर संजय के खेत में जा पहुंचे।
मदीना गांव में करीब 2 घंटे बाद राहुल गांधी 8.40 बजे पर रवाना हो गए। लौटते समय उन्होंने गोहाना PWD रेस्ट हाउस में ड्रेस चेंज की। फिर सोनीपत से आगे रवाना हो गए।
राहुल सुबह 6:40 बजे मदीना गांव में किसान संजय के खेत पहुंचे।
महिला किसानों के साथ धान की रोपाई करते राहुल गांधी।
खेत में ट्रैक्टर से जुताई करते राहुल गांधी।
महिला किसानों के साथ नाश्ते के दौरान बात करते राहुल गांधी।
किसी को नहीं थी राहुल गांधी के रुकने की सूचना
राहुल के सोनीपत खेत में रुकने का पता चलते ही बरोदा से कांग्रेस विधायक इंदूराज नरवाल और गोहाना के विधायक जगबीर मलिक भी वहां पहुंचे। नरवाल ने कहा कि उनके पास राहुल के आने की सूचना नहीं थी, लेकिन जैसे ही ग्रामीणों से उनको इस बारे में पता चला तो वे मिलने पहुंच गए।।
गोहाना से कांग्रेस विधायक जगबीर मलिक ने कहा कि इलाके का सौभाग्य है कि राहुल गांधी यहां पहुंचे हैं। वह यह देख रहे हैं कि एक गांवों में खेती का क्या तरीका है। किसान किस तरीके से धान लगाता है। इसमें उन्हें क्या परेशानियां आ रही हैं।
राहुल को देखने के लिए काफी संख्या में महिलाएं व बच्चे भी पहुंचे। राहुल ने उनके साथ फोटो भी खिंचवाई।
किसान संजय के खेतों में पहुंचे राहुल गांधी
गांव मदीना में राहुल किसान संजय के खेत में पहुंचे थे। जिस वक्त राहुल आए, किसान और मजदूर मिलकर धान की रोपाई कर रहे थे। जब सिक्योरिटी के साथ राहुल खेत की तरफ आए तो दूर से उन्हें कोई पहचान नहीं पाया। हालांकि, करीब आते ही उन्होंने राहुल को पहचान लिया।
धान की रोपाई के लिए राहुल गांधी के आने पर मजदूर भी खुश दिखे।
सोनीपत का बरोदा कांग्रेस का गढ़
गांव मदीना सोनीपत के ग्रामीण हलके बरोदा का हिस्सा है। बरोदा हलके से वर्तमान में कांग्रेस के इंदूराज नरवाल उर्फ भालू विधायक हैं। उन्होंने उप चुनाव में भाजपा के योगेश्वर दत्त को हराया था। पूरा बरोदा क्षेत्र कांग्रेस का गढ़ है और पूर्व CM भूपेंद्र सिंह हुड्डा के गृह क्षेत्र रोहतक से सटा हुआ है।
भोपाल में भोजपुरी सिंगर पर FIR; सोशल मीडिया पर लिखा-'MP में का बा...?' कमिंग सून
पेशाब कांड के आरोपी को संघ की यूनिफॉर्म में दिखाया:भोपाल में भोजपुरी सिंगर पर FIR; सोशल मीडिया पर लिखा-'MP में का बा...?' कमिंग सून
'यूपी में का बा' और 'बिहार में का बा' गाने वाली भोजपुरी सिंगर नेहा सिंह राठौर के खिलाफ भोपाल के हबीबगंज थाने में FIR दर्ज की गई है। वहीं, इंदौर में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। नेहा राठौर ने सीधी के पेशाब कांड पर 'एमपी में का बा कमिंग सून' टाइटल से सोशल मीडिया पर पोस्ट की थी। इसमें आरोपी प्रवेश शुक्ला को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की यूनिफॉर्म पहने दिखाया।
भाजपा ने इस पर आपत्ति जताई है। बीजेपी के अनुसूचित जाति मोर्चा के मीडिया प्रभारी सूरज खरे ने थाने में शिकायत की है। बता दें कि नेहा ने यह पोस्ट ट्विटर पर गुरुवार (6 जुलाई) को की है। इधर, नेहा ने भी ट्वीट कर लिखा कि गजब है इनका आदिवासी प्रेम।
भाजपा ने कहा- नेहा के पति से करेंगे बात, अन्य पर भी होगी प्रथम सूचना रिपोर्ट
भोजपुरी सिंगर नेहा सिंह राठौर ने सोशल मीडिया पर ये पोस्ट की थी।
सूरज खरे ने कहा- अगर वह संघ का इतिहास नहीं जानतीं, तो हम उन्हें इसके बारे में बताएंगे। उन्होंने कहा कि नेहा 15 महीने में कांग्रेस की सरकार में हुए सागर में अहिरवार समाज के शख्स के साथ हुए हादसे को लेकर ट्वीट क्यों नहीं करती हैं? इसके अलावा, अन्य लोगों ने भी इस ट्वीट को री-ट्वीट या फिर इस पोस्टर को पोस्ट किया है। सूरज खरे ने कहा कि उन लोगों पर भी एफआईआर होगी। क्योंकि मैंने पहले नेहा राठौर का ट्वीट देखा, तो उन पर एफआईआर करवाई।
सूरज ने शिकायत में लिखा है कि सीधी कांड के आरोपी प्रवेश शुक्ला को आरएसएस की यूनिफॉर्म में दिखाया है, जबकि इस मामले से आरएसएस का लेना-देना नहीं है। इसे लेकर नेहा सिंह राठौर पर धारा 153 (क) के तहत केस दर्ज कराया है।
भाजपा की ओर से यह शिकायत की गई है।
नेहा बोलीं- मैंने विरोध किया तो भाजपा ने FIR करवा दी
इस मामले में नेहा ने भी प्रतिक्रिया देते हुए बीजेपी को घेरने की कोशिश की है। उन्होंने लिखा कि "मध्य प्रदेश के सीधी जिले में आदिवासी के सिर पर पेशाब करने का विरोध किया, तो भाजपा के अनुसूचित जाति मोर्चा के मीडिया प्रभारी ने मेरे ऊपर एफआईआर करवा दी। गज़ब है इनका आदिवासी प्रेम।
क्या सिर्फ आरएसएस के लोग ही हाफ पैंट पहनते हैं?
मामले में नेहा सिंह राठौर का कहना है कि यह जो पोस्टर है, यह मुझे सोशल मीडिया पर ही मिला था, जिसे मैंने पोस्ट किया है। यह मैंने खुद डिजाइन नहीं किया था। आपको इसमें आरएसएस का गणवेश कहां दिखाई दे रहा है? क्या आरएसएस के लोग सिगरेट पीते हैं? मुझे नहीं लगता कि RSS के लोग ऐसे हैं। क्या हाफ पैंट सिर्फ आरएसएस के लोग ही पहनते हैं? यहां तो गर्मी में सभी हाफ पैंट पहनते हैं।
वहीं, सिर्फ बीजेपी पर ही गाने लिखने वाले सवाल पर नेहा ने कहा कि यह मेरा लोकतांत्रिक अधिकार है कि मैं किस मुद्दे पर गाना लिखना चाहती हूं। जहां तक सवाल पूछने की बात है, तो केंद्र में जिसकी सरकार है, सवाल उसी से पूछा जाएगा, न कि राहुल गांधी से।
हबीबगंज थाना प्रभारी मनीष राठौर ने बताया कि नेहा सिंह राठौर के नाम से ट्विटर अकाउंट है। उस अकाउंट यूजर के खिलाफ आईपीसी की धारा 153 के तहतस दर्ज किया गया है। इसमें ट्वीट में आरएसएस के गणवेश पहने एक व्यक्ति पर पेशाब करते दिखाया गया है जो कि सीधी की घटना को चिन्हित करता है। शिकायतकर्ता ने बताया कि इसका आरएसएस से लेना देना नहीं है। केस दर्ज कर विवेचना की जा रही है।
बुधवार, 5 जुलाई 2023
उ प्र पुलिस ..थानेदार बेल्ट मारता रहा': चोट पर चोट के निशान...किसी का आधा पैर काला पड़ गया
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सीतापुर उ प्र पुलिस ..थानेदार बेल्ट मारता रहा': चोट पर चोट के निशान...किसी का आधा पैर काला पड़ गया, अब धमकियां मिल रही- केस वापस ले लो।
“दोपहर के एक बजे थे. रुक-रुक कर बारिश हो रही थी. सुबह घर में झगड़ा करने के बाद पति और देवर थाने गए, लेकिन दोपहर तक नहीं लौटे। उनकी चिंता में दिल डूबा जा रहा था. इंतजार करते-करते आधा दिन बीत गया तो मैं अपनी भाभी और पड़ोस की 3 महिलाओं के साथ थाने पहुंची। वहां मैंने देखा कि मुख्य सिपाही उसके और जीजाजी के साथ कुर्सी के पास बैठा था. दोनों डर गये, मानो उन्हें मार डाला गया हो।
“जब हमने SHO से पति को हिरासत में लेने का कारण पूछा तो वह गुस्सा हो गए। कुर्सी छोड़कर खड़े हो गये और हमें गालियां देने लगे. वह यहीं नहीं रुके. उन्होंने सिपाही और मुंशी को बुलाया। महिलाओं को कमरे में बंद कर दो। 10 मिनट बाद SHO फिर हमारे सामने आए... उन्होंने कहा कि आप लोग बहुत ज्यादा गरम हो गए हैं. तुम्हें सब कुछ उतारना होगा. यह कह कर उसने मुंशी से एक मोटी बेल्ट मंगवाई। फिर बारी-बारी से हमें उसी बेल्ट से पीटा।”
“महिला कांस्टेबल ने हमें पकड़ लिया था। पुलिस कांस्टेबल हमें 1 घंटे तक पीटता रहा. उन दोनों ने मेरी पड़ोसन अन्नपूर्णा और राजकुमारी को इतना पीटा कि वह बेहोश हो गयी. जब उसे होश आया तो उसके चेहरे पर पानी फेंका गया। शाम तक शरीर का कोई भी हिस्सा ऐसा नहीं बचा था जिस पर बेल्ट के निशान न हों।”
ये शब्द 28 साल की लक्ष्मी के हैं, जिनकी 16 दिन पहले 4 अन्य महिलाओं के साथ थाने में पिटाई की गई थी. पिटाई के बाद परिजन उसे किसी तरह घर ले गये और इलाज कराया. 16 दिन बाद महिला का दर्द तो कम हुआ है, लेकिन बेल्ट की पिटाई से लगे घाव अभी भी ठीक नहीं हुए हैं. महिलाओं की पिटाई के बाद इसकी शिकायत डीएम और एसपी से की गयी, तब कार्रवाई हुई. SHO समेत तीन पुलिसकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया. लेकिन अब पीड़ित परिवार को शिकायत वापस लेने के लिए धमकियां मिल रही हैं.
सीतापुर में पीड़ित परिवार के पास पहुंचा। हमने उन महिलाओं से बात की जिन्हें पीटा गया. आइए शुरू से जानते हैं सबकुछ...
बेल्ट की पिटाई से लगा ये घाव अन्नपूर्णा के पैर का है. ऐसे ही निशान अन्य महिलाओं के शरीर पर भी हैं।
बेल्ट की पिटाई से लगा ये घाव अन्नपूर्णा के पैर का है. ऐसे ही निशान अन्य महिलाओं के शरीर पर भी हैं।
नल से शुरू हुई लड़ाई में बच गई जान
18 जून 2023... सुबह के 8 बजे थे. सीतापुर के रामपुर मथुरा गांव निवासी निरंकार और ओमकार शर्मा के बीच नल को लेकर विवाद था। झगड़ा नल की जमीन को लेकर था. देखते ही देखते भाइयों के बीच हुई नोकझोंक मारपीट में बदल गई। विवाद बढ़ने पर दोनों भाई पास के पुलिस स्टेशन पहुंचे.
सोमवार, 3 जुलाई 2023
देश की प्रगति के लिए जरूरी है मोहब्बत और भाईचारा: अतुल अनजान
देश की प्रगति के लिए जरूरी है मोहब्बत और भाईचारा: अनजान
- भाकपा ने की राजनाथ के बयान की निंदा
देश की प्रगति के लिए जरूरी है मोहब्बत और भाईचारा: अनजान
नई दिल्ली। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के देश में मोहब्बत व भाईचारे की दुकान खोलने की जरूरत नहीं होने सम्बन्धी बयान की निंदा करते हुए कहा कि देश की के लिए आज मोहब्बत, प्रेम और भाईचारे की सख्त जरूरत है।
भाकपा के राष्ट्रीय सचिव अतुल कुमार अनजान ने शनिवार को एक बयान में कहा कि रक्षा मंत्री का बयान घोर सांप्रदायिक और विभाजनकारी है। रक्षा मंत्री की हैसियत से इस तरह का बयान देना देश के मनोबल को तोड़ना है। उन्होंने आरोप लगाया कि पांच राज्यों के विधानसभा और 2024 के लोकसभा के चुनाव नजदीक आते ही पीएम मोदी, भाजपा और आरएसएस समाज को धर्म और जातियों के नाम पर बांटने में जुट गए हैं।नतीजन मणिपुर की डबल इंजन की सरकार गत 3 मई से जारी जातीय हिंसा रोकने में विफल हो रही है।
वामपंथी नेता ने कहा कि मोदी सरकार के मंत्री सांप्रदायिक वक्तव्य देकर महंगाई, बेकारी, रुपए की दयनीय स्थिति, नौ साल के भाजपा राज की विफलताओं को छिपाने की नीयत से देश को गुमराह करने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि भाजपा के खिलाफ विपक्षी दलों का प्रमुख कर्तव्य सांप्रदायिकता के खिलाफ अभियान और पूंजी की लूट रोकना होना चाहिए।
गुरुवार, 29 जून 2023
मणिपुर में राहुल गांधी को पुलिस ने रोका, जबरदस्त हंगामा, आंसू गैस के गोले दागे
मणिपुर में राहुल गांधी को पुलिस ने रोका, जबरदस्त हंगामा, आंसू गैस के गोले दागे
मणिपुर की राजधानी इम्फाल में कांग्रेस नेता राहुल गांधी का काफिला रोक दिया गया है. जानकारी के मुताबिक राहुल के काफिले को स्थानीय पुलिस ने विष्णुपुर चेकपोस्ट पर रोक दिया है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक पुलिस ने बताया कि उसने सुरक्षा कारणों से राहुल गांधी और उनके समर्थकों को रोका है. राहुल को चुराचांदपुर जाना था.
राहुल गांंधी का दो दिन का मणिपुर दौरा पहले से तय था. कार्यक्रम के तहत राहुल इम्फाल और चुराचांदपुर में बनाए गए राहत शिविरों का दौरा करने वाले हैं. यहां वे मणिपुर हिंसा के पीड़ितों से मिलेंगे. राहुल मणिपुर स्थित सिविल सोसायटी के प्रतिनिधियों से भी मिलेंगे. लेकिन पुलिस की कार्रवाई के बाद अब देखना होगा कि राहुल गांधी ये सब कर पाएंगे या नहीं.
इम्फाल में लैंड करने के थोड़ी ही देर बाद उनकी गाड़ी के काफिले को रोक दिया गया. रिपोर्ट्सके मुताबिक पुलिस ने राहुल को हेलिकॉप्टर से जाने को कहा, लेकिन वो तैयार नहीं हुए. कांग्रेस समर्थकों ने इस पर खूब हंगामा किया. जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने आंसू गैस के गोले दाग दिए. बताया जा रहा है कि इसके बाद राहुल का काफिला इम्फाल की तरफ लौट रहा है. अब वो हेलिकॉप्टर से चुराचांदपुर जाएंगे.
मणिपुर सरकार और पुलिस की ओर से कहा गया है कि उनका मकसद राहुल को रोकना नहीं था. उनका कारवां सिर्फ सुरक्षा कारणों से रोका गया है. इंडिया टुडे के मुताबिक विष्णुपुर के एसपी हेसनाम बलराम सिंह ने बताया,
"जमीनी हालात के मद्देनजर हमने उन्हें (राहुल) आगे जाने से रोका है और हेलिकॉप्टर से चुरचांदपुर जाने की सलाह दी है. राहुल गांधी जिस रास्ते जाने वाले हैं वहां हाईवे पर ग्रेनेड अटैक होने का खतरा है. उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ही हमने उन्हें (आगे जाने की) अनुमति नहीं दी."
कांग्रेस का बयान
वहीं कांग्रेस नेता केसी वेणुगोपाल ने न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए कहा,
"राहुल के कारवां को पुलिस ने विष्णुपुर के पास रोक दिया है. पुलिस का कहना है कि वो हमें इसकी इज़ाज़त नहीं दे सकते. लोग राहुल का अभिवादन करने के लिए सड़क के दोनों ओर खड़े थे. हमें नहीं समझ आ रहा है पुलिस ने उन्हें क्यों रोका है."
कांग्रेस मुखिया मल्लिकार्जुन खरगे ने भी इस पर ट्वीट करते हुए प्रधानमंत्री मोदी पर निशाना साधा. खरगे ने इसे भारत के संवैधानिक मूल्यों का हनन बताया.
मणिपुर में क्या हो रहा है?
मैतेई समुदाय अनुसूचित जनजाति में शामिल किए जाने की मांग करता रहा है. 3 मई को इस मांग का विरोध हुआ था. इस विरोध में ऑल ट्राइबल स्टूडेंट्स यूनियन (ATSU) ने एक रैली आयोजित की, जिसमें झड़प होने की ख़बर आई थी. इसमें फॉरेस्ट डिपार्टमेंट की जमीन हथियाने पर भी बवाल हुआ. यहीं से झड़प बढ़ती रही और मणिपुर जातीय हिंसा की आग में जल उठा. इस हिंसा में 100 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है.
बुधवार, 28 जून 2023
पूर्व डिप्टी डायरेक्टर के घर ईडी गिरफ्तार
पूर्व डिप्टी डायरेक्टर के घर ईडी का छापा: गिरफ्तार कर मुंबई ले जाए गए, 500 करोड़ के हेरफेर में थे शामिल
500 करोड़ रुपये की हेराफेरी में शामिल प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व डिप्टी उायरेक्टर सचिन सावंत के लखनऊ स्थित आवास पर ईडी ने छापेमारी कर उन्हें गिरफ्तार कर लिया है।
प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर सचिन सावंत के लखनऊ स्थित घर पर ईडी की टीम ने छापा मार दिया है। ईडी की टीम उन्हें गिरफ्तार कर मुंबई ले गई है। जहां उन्हें मुंबई हाईकोर्ट के सामने पेश किया जाएगा।
सचिन सावंत जब जब मुंबई में ईडी में थे तब डायमंड कंपनी की 500 करोड़ रुपये की हेराफेरी में शामिल थे। इसे लेकर ईडी की टीम ने उनके लखनऊ और मुंबई स्थित आवास पर छापेमारी की है।
सचिन सावंत मुंबई में ईडी के डिप्टी डायरेक्टर थे। इस समय एडिशनल कमिश्नर कस्टम लखनऊ हैं।
रविवार, 25 जून 2023
मोदी के अफसर - पत्नी की चप्पल उतरवाने वाले हॉस्पिटल असिस्टेंट के डीआर एम साहब ने उतरवा लिए कपड़े
पत्नी की चप्पल उतरवाने वाले हॉस्पिटल असिस्टेंट के डीआर एम साहब ने उतरवा लिए कपड़े
भारतीय रेलवे के अफसर को पत्नी की चप्पल उतरवाने की बात इतनी नागवार गुजरी कि उन्होंने रेल अस्पताल के उम्रदराज असिस्टेंट बसंत उपाध्याय के कपड़े उतारने की आदेश दे दिए. DRM दफ्तर में दर्जनों अधिकारियों और कर्मचारियों की मौजूदगी में असिस्टेंट की यह फजीहत की गई. अपमान से आहत पीड़ित की तबीयत बुरी तरह बिगड़ गई है.
डॉक्टर के चेंबर में घुसने से पहले मंडल रेल प्रबंधक की पत्नी की चप्पल उतरवाना अस्पताल के असिस्टेंट को काफी भारी पड़ गया. इसका बदला डीआरएम ने असिस्टेंट के कपड़े उतरवाकर लिया. दफ्तर में बुलाकर कर्मचारी की बरी तरह फजीहत की गई. इस अपमान से आहत कर्मचारी की तबीयत बुरी तरह बिगड़ गई और इलाज के लिए उसे अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ा. उधर इस मामले का पता लगते ही असिस्टेंट के सहकर्मियों ने अस्पताल में काम ठप कर हड़ताल की घोषणा कर दी.
धनबाद रेल मंडल के मंडल रेल अस्पताल में कर्मचारियों ने ओपीडी सेवा भी बाधित कर दी. कर्मचारियों ने डीआरएम के ऊपर गंभीर आरोप लगाए हैं. दरअसल, डीआरएम के अभद्र व्यवहार और बदसलूकी के कारण कर्मचारियों में आक्रोश है. हालांकि, एडीआरएम आशीष झा मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों को काफी समझाया बुझाया.
चप्पल पहनकर चेंबर में जाने रोका था
इस दौरान प्रदर्शन करने वाले कर्मचारियों ने बताया, डीआरएम कमल किशोर सिन्हा की पत्नी इलाज कराने के लिए रेल अस्पताल आई थीं. डॉक्टर के चेंबर के बाहर असिस्टेंट बसंत उपाध्याय अपनी ड्यूटी पर तैनात थे. उस दौरान बसंत ने डीआरएम की पत्नी और उनके साथ आए शख्स से चेंबर के बाहर चप्पलें उतारने का अनुरोध किया. तब रेल अफसर की पत्नी ने कुछ नहीं कहा और डॉक्टर से मिलने के बाद वापस लौट गईं.
उ प्र है - जीभ के ऑपरेशन की जगह डाक्टर ने कर दिया खतना - बच कर रहे आपके साथ भी हो सकता है
उ प्र है - जीभ के ऑपरेशन की जगह डाक्टर ने कर दिया खतना - बच कर रहे आपके साथ भी हो सकता है
बरेली में तुतलाकर बोलने वाले बच्चे के परिजनों ने आरोप लगाया है कि डॉक्टर ने जीभ का ऑपरेशन करने की बात कही थी, लेकिन खतना कर दिया। परिजनों ने इस बात को लेकर अस्पताल में हंगामा भी किया व डॉक्टर पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
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