रविवार, 13 जून 2010

पत्नी ने सोते हुए अपने पति को चारपाई मे बांधकर जला दिया

बाराबंकी। आमतौर पर मर्दाे के जुल्म का शिकार अबला नारियां हुआ करती है और उनके उत्पीड़न को रोकने के लिए राष्ट्रीय स्तर से लेकर प्रादेशिक स्तर तक महिला आयोगो का गठन किया गया है परन्तु यहां बीती रात थाना टिकैत नगर मे एक ऐसी घटना पेश आई जिसने इस कहानी को उल्टा कर दिया। हुआ यह कि दलित समाज के एक 35 वर्षीय व्यक्ति जंग बहादुर केा उसकी पत्नी ने सोती हुई हालत मे पलंग पर रस्सी से बांध कर उसके ऊपर मिट्टी का तेल -िहजयड़क कर आग लगा दी। 90 प्रतिशत जली अवस्था मे जिन्दगी और मौत के बीच जंग बहादुर जिला अस्पताल मे रात एक बजे भर्ती कराया गया, जहां उसकी स्थिति बिगड़ने पर उसे लखनऊ मेडिकल कालेज के ट्रामा सेन्टर रिफर कर दिया गया।

जनपद फैजाबाद के पटरंगा थाने के ग्राम अशरफपुर गंगरैला के जंग बहादुर रावत अपनी पत्नी इन्द्रमता के साथ उसके मामा रामअवतार के घर तिलक मे भाग लेने पत्नी के द्वारा अति अनुरोध पर 9/10 जून की रात ग्राम कू-सजय़ा सूखीपुर , थाना टिकैतनगर गया था। बीती रात जब वह अपनी पत्नी के साथ सुसराल मे दो मंजिले पर सो रहा था, तो आधी रात के करीब उसकेे चलने की सूचना गांव वालो को मिली जिस समय यह घटना घटी उस के घर मे उसके दो कमसिन बच्चो व पत्नी के अतिरिक्त और कोई उस स्थान पर नही था सास गोला, साला बब्लू व सुसर बच्चू इत्यादि सुसराल के दूसरे लोग नीचे सो रहे थे। संदिग्द्ध अवस्था मे जले जंग बहादुर को जब गांव के लोगो ने जाकर देखा तेा उसकी चारपाई पूरी तरह से जल चुकी थी और जंग बहादुर के पैरो को छोड़कर उसका सारा शरीर जल कर सियाह हो चुका था। गम्भीर अवस्था मे उसे जिला अस्पताल पहुचाया गया , जहां मजिस्ट्रेट को दिये गये अपने मृत्यु पूर्व बयान मे उसने स्पष्ट रुप से घटना के लिए अपनी पत्नी व सुसराल के अन्य लोगो को जिम्मेदार ठहराया है। जंग बहादुर की मां नायका देवी व मामा गुरदीन ने एक जुबान होकर संवाददाता को बताया कि इन्द्रमता की जंग बहादुर के संग लगभग आठ वर्ष पूर्व शादी हुई थी और उसके दो बच्चे है। इन्द्रमता जंग बहादुर की दूसरी पत्नी थी। पहली पत्नी से जंग बहादुर के सम्बन्ध विच्छेद हो चुके थे घायल जंग बहादुर की मां नायका देवी ने रो-रोकर बताया कि उसकी बहु का चाल चलन अच्छा नही थी और इस कारण इधर कुछ दिनो से पति पत्नी के बीच रिश्ते ठीक नही चल रहे थे, उसने अपनी बहु पर आरोप लगाया कि वह बहाने से उसके बु-सजय़ापे के एक मात्र सहारे को अपने घर ले गयी और एक षड़यंत्र के अन्तर्गत उसके बेटे को जला दिया। जंग बहादुर घर का अकेला कमाने वाला था, क्योंकि उसका छोटा भाई विकलांग होने के कारण उसी पर आश्रित था और पिता का भी देहान्त चन्द माह पूर्व हो चुका था।
टिकैत नगर पुलिस के मुताबिक घटना संदिग्द्ध है और प्रथम दृष्टियां ऐसे कोई साक्ष्य उसे नही मिले है कि जिससे यह पता लग सके कि जंग बहादुर को जलाने से पूर्व रस्सी से बांधा गया था। पुलिस अभियोग दर्ज करने के लिए आहत पक्ष की ओर से तहरीर की प्रतीक्षा मे है।
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