मंगलवार, 27 जुलाई 2010

ओलम्पियन के0डी0सिंह बाबू के खेल के मैदान की दुर्दशा से खेल प्रेमी आहत

बाराबंकी।देश में करोड़ों रुपये खर्च करके राजधानी दिल्ली में कामनवेल्थ गेम्स भले ही सम्पन्न कराने की तैयारियां चल रही हो,परन्तु खेल के लिए हमारी सरकारों की नीयत व नीति किस प्रकार की है, इसका एक उदाहरण यहाॅ प्रदेश की राजधानी लखनऊ से 30 कि0मी0दूर जनपद बाराबंकी, जो इत्तेफाक से पदमश्री कुॅवर दिग्विजय सिंह बाबू की सरजमीं भी है, के राजकीय इण्टर कालेज के क्रीड़ांगन है, जहाॅ खेल की जगह पर बड़ी बड़ी घासें कीचड़ व गड्ढो से युक्त ग्राउण्ड पर प्राइवेट  टैक्सी चालकों का अतिक्रमण रहता है या पास पड़ोस के निवासियों के टट्टी पेशाब के काम यह आता है।
 नगर के मध्य फैजाबाद रोड पर स्थित राजकीय इण्टर कालेज के खेल के मैदान को यह गौरव प्राप्त है कि इस पर ओलम्पियन हाकी खिलाड़ी,हेल्म्स एवार्ड विजेता,पदमश्री के0डी0सिंह बाबू के कदम पड़े थे और उनकी कलात्मक हाकी का यह मैदान साक्षी रहा है।इसके अतिरिक्त उनके अन्य भाईयों जिनको राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय शोहरत हासिल न हो सकी के कलात्मक ख्ेाल की भी यह ग्राउण्ड प्रत्यक्षदर्शी रही है,जिसमें कुॅवर रमेश सिंह, कुॅवर मोहन सिंह व कुॅवर राजा ंिसंह के नाम उल्लेखनीय है।इसी मैदान पर के0डी0सिंह बाबू के बाद भारतीय हाकी टीम में जनपद से अपना नाम दर्ज कराने वाले मो0मुस्लिम खाॅ,राष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ी रवीन्द्र नाथ चटर्जी उर्फ रोबू के खेल को भी लोगों ने देखा था।इन नामवर खिलाड़ियों के अतिरिक्त प्रदेश व मण्डल स्तर के तमाम ऐसे खिलाड़ी है जिन्होने अपना पसीना इसी ऐतिहासिक खेल मैदान पर बहाया था।
 परन्तु आज यह खेल का मैदान अपनी बदनसीबी की दास्तान स्वयं अपनी स्थिति के माध्यम से दर्शा रहा है।खिलाड़ियों के स्थान पर यहाॅ मवेशी बड़ी बड़ी घास चरने के लिए विचरण करते रहते है।आस पास के रिहायशी मकानात में रहने वाले प्रातः व शाम समय उत्सर्जन प्रक्रिया कर हल्के हो लिया करते है तथा प्राइवेट टैक्सी संचालक अपने दर्जनों वाहन इसी ग्राउण्ड पर सुबह से लेकर शाम तक खड़े रखते है।
 इतना ही नही सर्कस व शादी समारोह दीपावली के पटाखों की बाजार व सरकारी रैलियां तथा राजनीतिक कार्यक्रमों की अनुमति कालेज प्रशासन व जिला प्रशासन द्वारा दिए जाने से खेल मैदान की अस्मिता सरेआम तार तार हो रही है।यह देखकर पुराने खिलाड़ियों के मन व्याकुल है कि उनके खेल के मन्दिर की क्या दुर्दशा बना डाली गयी है। इस मामले में जब भी कालेज प्रशासन अथवा जिला प्रशासन की तवज्जो इस ओर दिलायी गयी तो न केवल उदासीनता भरा उत्तर इनकी ओर से मिला बल्कि बेहयायी की सारी हदें पार करते हुए ये लोग यह कहते नही थकते कि खेल मैदान से यदि कालेज को कुछ आर्थिक लाभ इसको किराये पर उठाने से हो सकता है तो इसमें क्या हर्ज है,जबकि खेल के मैदानों पर राजनीतिक रैलियां व अन्य कार्यक्रम के आयोजनों के विरुद्ध उच्च न्यायालय भी अपना निर्णय एक नही कई कई बार दे चुका है।
 अभी हाल में जनपद के खेल प्रेमियों द्वारा राजकीय इण्टर कालेज क्रीड़ांगन केा केवल खेल के लिए सुरक्षित करने और के0डी0सिंह बाबू के चहेते खेल हाकी के लिए ऐस्ट्रोटर्फ बिछाने की मांग जिलाधिकारी विकास गोठलवाल से की गयी तो उन्होने उस पर अपने हाथ खड़े करते हुए कहा कि यह सम्भव नही है। हाकी स्टेडियम के लिए वह अलग किसी स्थान पर भूमि की तलाश में है। उन्होने खेल मैदान केा अन्य अवसरों के लिए प्रयोग में लाने को गलत नही ठहराया।आमतौर पर जन मुद्दों के लिए संवेदनशील इस अधिकारी के इस उत्तर से खेल प्रमियों की भावनाओं केा गहरा आघात पहुॅचा।
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