शुक्रवार, 16 जुलाई 2010

फल पकाने को लेकर असमंजस में है प्रदेश सरकार,फल पकाने को लेकर असमंजस में है प्रदेश सरकार,

देश के अन्य प्रान्तों में गैस द्वारा फल पकाए जा रहे हैं
बाराबंकी।केमिकल द्वारा केले की लाट पका रहे एक केला व्यवसायी के गोदाम पर विगत देर शाम खाद्य विभाग की ओर से छापामार कार्यवायी की गयी। केमिकल तो मौके पर नही मिला और न ही गोदाम मालिक सामने आया।खाद्य निरीक्षकेा की टीम केले के सैम्पुल भरकर लौट आयी तथा आने से पूर्व दस कुन्टल से अधिक केमिकल लगे केलो को नहर में फेंक दिया।
 शासन के निर्देशानुसार खाद्य पदार्थो में मिलावट तथा कृत्रिम संसाधनों से फलों को पकाने वालो के विरुद्ध पूरे प्रदेश में युद्ध स्तर पर एक अभियान चलाया जा रहा है। इसी के अंतर्गत जिले में केमिकल का प्रयोग करके आम,केेला तथा पपीता पकाने वालो के विरुद्ध भी कार्यवायी की जा रही है। विगत माह पुरानी सब्जी मण्डी में खाद्य विभाग द्वारा केला गोदामों पर कार्यवायी की गयी परन्तु वहाॅ मिले केमिकल के घोल केा केला व्यवसाईयों ने सत्ता दल के व्यापारी नेताओं के संरक्षण में सैम्पुल भरने से पहले ही फेेंककर नष्ट कर दिया और छापामार टीम  कार्यवायी की औपचारिकता निभाते हुए केवल एक केले का सैम्पुल लेकर लौट आयी।
 विगत दिवस जिलाधिकारी विकास गोठलवाल के निर्देश पर एक और छापामार कार्यवायी नवीन मण्डी स्थल निकट पी0ए0सी0 हेडक्वार्टर पर की गयी। अफजाल नाम के एक केला व्यवसायी का केला वहाॅ दुकान नं0 1 के पीछे टीन शेड में चटटा लगाकर केमिकल द्वारा पकाये जाने की सूचना जिलाधिकारी  को कहीं से प्राप्त हुई। जिलाधिकारी द्वारा खाद्य निरीक्षको पर आधारित एक छापामार दस्ता अतिरिक्त मजिस्ट्रेट के नेतृत्व में वहाॅ भेजा, टीम ने मौके पर जाकर केला गोदाम मालिक के बारे में दरियाफ्त किया,जिसके बारे में उन्हे बताया गया कि वह जनपद में मौजूद नही है।टीम ने स्थान की तलाशी लेकर केमिकल तलाश करने का प्रयास किया,परन्तु उसका कोई साक्ष्य नही मिला।अंत में केले के नमूने भर कर टीम ने चलने से पूर्व एक वाहन में बर्फ के नीचे पकाये जा रहे केलो का संग्रह लादकर चन्द फर्लांग दूर माइनर में फेंक दिया।फेके गये माल की कीमत लगभग बीस हजार रुपये बतायी जाती है।
 जिला प्रशासन की इस कार्यवायी से पहले से ही आतंकित केला व्यवसाईयों में दहशत व्याप्त हो गयी है।उनके सामने अपने कारोबार के भविष्य का संकट खड़ा है।बात करने पर केला व्यवसाईयों ने बताया कि केमिकल द्वारा केला पकाने से पहले वह भट्टी से केला पकाया करते थे।जिसमें श्रम निवेश भी अधिक था और केले में थोड़ी क्षति भी पहुॅचती थी तथा माल में वह सफायी भी नही आती थी,जो केमिकल से आती है।
 देश के अन्य भागों में फल एथीलीन गैस द्वारा पकाये जाते हैं।जिसके लिए विशेषतौर पर गैस चैम्बरों का निर्माण किया जाता है।जिसमें एयर कंडीशन लगाकर एथीलीन गैस का प्रयोग करके फल पकाये जाते है।परन्तु प्रदेश सरकार ने अभी तक गैस चैम्बरों में फल पकाने की अनुमति नही दी, कारण पी0एफ0ए0अधिनियम 1954 पी0एफ0ए0नियमावली 1955 के प्राविधान हैं।जो कि कैल्शीयम कार्बाइड ईथेफान,एसिटलीन व एथीलीन द्वारा फल पकाने केा प्रतिबन्धित करते हैं।परन्तु भारतीय मानक व्यूरो व अंतर्राष्ट्रीय संगठन आई0एस0ओ0 देश की कृषि एवं औद्यानिक कौंसिल की संस्तुति पर गैस चम्बरों द्वारा फल पकाने केा मान्यता प्रदान करती है। इस प्रकार असमंजस के माहौल में फॅसी प्रदेश सरकार यह निर्णय नही ले पा रही है कि गैस द्वारा फलों केा पकाने की अनुमति वह दे या न दे।
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