शुक्रवार, 2 जुलाई 2010

विषैले रसायनो से पकाये जा रहे केले से मनुष्य का स्वास्थ्य खतरे में परन्तु खाद्य एवं स्वास्थ्य विभाग की नज़र इसे रोकने में कम कमायी में ज्यादा


बाराबंकी(मो0 तारिक खान)। केला मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए एक लाभदायक फल माना जाता है और अपने मूल्य के एतबार से यह एक ऐसा फल है कि इसका सेवन गरीब अमीर सभी कर लेते है, परन्तु व्यवसायिकता के इस दौर में जहाॅं इंसान पैसे के लिए बेतहाशा भाग रहा है, वह कम समय में अधिक धनोपार्जन करने के दृष्टिकोण से कृत्रिम तरीको से विशैले घोल से केले को पका कर न केवल उसकी पौष्टिकता एवं स्वाद को नष्ट कर रहे हैं बल्कि खाने वाले के शरीर में केले के द्वारा विष घोल कर उसके स्वास्थ्य के साथ भी खिलवाड़ कर रहे हैं और आश्चर्य की बात यह है कि जनता के स्वास्थ्य की निगेहबानी के लिए विशेषतौर पर गठित खाद्य विभाग तथा स्वास्थ्य विभाग सब कुछ जान कर भी अंजान बना हुआ है।
प्रोटीन,कार्बोहाइड्रेट,आयरन तथा विटामिनों से भरपूर सस्ते दामो का फल यदि बाजार में कोई उपलब्ध है तो वह निसंदेह केला ही है जो साल भर बीस रुपये दर्जन से लेकर छत्तीस रुपये दर्जन के बीच आसानी से उपलब्ध रहता है। बताते है कि एक औसत केले में सौ कैलोरी होती और लगभग 12 ग्राम प्रोटीन इसमें पायी जाती है। कम लोग यह जानते होंगे कि एक अण्डे की पौष्टिकता के बराबर एक केले की शक्ति होती है।
इतने पौष्टिक फल के साथ यदि अपनी कारोबारी बदनीयती के चलते कोई इसमें जहर मिलाकर इंसानी सेहत के साथ खिलवाड़ करे तो उसे वही कठोर दण्ड दिया जाना चाहिए जो खाद्य सामग्री में मिलावट करने वालो के खिलाफ दिया जाता है। पहले जमाने में केला केवल साल में कुछ महीनो में बाजार में उपलब्ध हुआ करता था और इतनी तादाद में नही उपलब्ध रहता था जैसा कि आज कल देखने को मिलता है। साल के बारहो महीनो केले से बाजार पटा रहता है। यह बात और है कि केले में अब न तो पहले जैसा स्वाद बचा है और न उसका रंग रुप। इसका कारण यह है कि यह केला समय से पूर्व ही कृत्रिम तरीको से बड़े बड़े गोदामों मंे पकाया जाता है।बड़े शहरो में तो केला विशेषतौर पर बनाये गये गैस चैम्बरों में इथेन गैस द्वारा पकाया जाता है जिसमें काफी लागत आती है।परन्तु छोटे शहरो में केले के छोटे कारोबारी केले को एक ऐसे रसायन से पकाने का दुष्कर्म कर रहे है जो मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए अतिघातक है चिकित्सको के अनुसार इथेफान नाम के इस रसायन के शरीर प्रवेश करने पर इसके दुष्परिणाम उसे भुगतने होंगे और उसका अमाशय,यकृत,आॅते तथा गुर्दो में खराबी आ सकती है तथा घातक रोग कैंसर भी उक्त वर्णित किसी भी अंग में हो सकता है।
वास्तव में इथेफान नाम का रसायन एक पौध विकास नियंत्रक है जो फलदार वृक्षो पर उस समय छिड़का जाता है जब वृक्ष में फल लगे होते है और किसी कारण वश यदि फल का विकास कमजोर चल रहा हो तो उसे गति प्रदान करने के लिए इस पौध विकास नियंत्रक का छिड़काव उद्यान विभाग के वैज्ञानिको की सलाह से किया जाता है।परन्तु केले के व्यवसायी बड़े पैमाने पर विगत एक दशक से अधिक समय से इस रसायन का प्रयोग कच्चे केले को समय से पहले पकाने के लिए कर रहे हैं। प्राप्त जानकारी के अनुसार एक दौ सौ लीटर के ड्रम में इथेफान नामक रसायन की सौ मि0ली0 की मात्रा डालकर उसमें केले की गौद्ध डालकर चट्टा बनाकर गोदामों मंे तले ऊपर रख दी जाती है और ऊपर से टाट की पल्ली से ढ़ककर उसके ऊपर बर्फ की एक पर्त चढ़ा दी जाती है। केले के व्यवसायी जनता को यह बताते फिरते है कि केला वह बर्फ से पकाते है।परन्तु वास्तविकता इसके विपरीत होती है और मनुष्य के स्वास्थ्य के साथ खुलेआम खिलवाड़ करके पैसे के पुजारी लखपति बनते जाते हैं और इधर जनता बेचारी विभिन्न रोगो से ग्रसित होकर यह नही जान पाती कि वह इस रोग से ग्रसित किस कारण से हुई।
उधर आम जनमानस के स्वास्थ्य के लिए विशेषतौर पर गठित खाद्य एवं स्वास्थ्य विभाग इस मामले में चुप्पी साधे बैठा रहता है या यूॅ कहा जाय कि जानकर भी अंजान बना रहता है।कभी कभार यदि यह विभाग किसी शिकायत या सरकारी निर्देश पर ऐसे स्थानो पर जाने की जहमत उठाते है तो वह जनता के स्वास्थय के उद्देश से कम अपने आर्थिक स्वास्थय लाभ के लिए अधिक जैसा कि अभी इसी सपताह के प्रारम्भ में जनपद के मुख्य खाद्य निरीक्षक वी0के0 पाण्डेय के नेतृत्व में पुरानी सब्जीमण्डी स्थित केले के गोदामो में खाद्य विभाग द्वारा छापामार कार्यवायी की गयी। गोदामो पर टीम को रसायन युक्त घोल भी मिला खाली शीशी भी मिली अर्थात कार्यवायी के लिए पर्याप्त सामग्री छापामार टीम को मिली, परन्तु व्यापारी नेताओं ने हस्तक्षेप करके जनपद के एक उच्च अधिकारी से सम्पर्क साधकर गोदाम मालिको केा साफ साफ बचाने का प्रबन्ध कर लिया।परिणाम स्वरुप टीम को मौके पर न रसायन मिला और न शीशी। टीम केवल एक केले का सैम्पल भर कर लौट आयी जिसे मुख्य खाद्य निरीक्षक के अनुसार विश्लेषण के लिए लखनऊ स्थित जाॅच प्रयोगशाला में भेज दिया गया है। अर्थात साॅप भी मर गया और लाठी भी न टूटी।

(2)
आम से लदी डीसीएम पल्टी क्लीनर की मौत

बाराबंकी। सण्डीला से आम लाद कर गोरखपुर जा रही डी0सी0एम0 सं0-यू0पी0 30 टी 0941 फैजाबाद रोड पर आज भोर में साढ़े तीन बजे के करीब ग्राम उधौली के मजरे तुलसीपुर के समीप अपना संतुलन खोकर पलट गयी जिसके चलते उस पर सवार क्लीनर शादाब (23)पुत्र अब्दुल हमीद उर्फ फक्कड़ी नि0 मो0 बरौनी थाना सण्डीला जनपद हरदोई की उसके नीचे दबकर मौके पर मृत्यु हो गयी। डी0सी0एम0 चालक फरार बताया जाता है।

(3)

संदिग्ध परिस्थितियों में चार बच्चो की माॅ की जलकर सुसराल में मौत
बाराबंकी।थाना सफदरगंज अंतर्गत ग्राम पण्डरा के मजरे कटेसर के निवासी रामजस यादव की पत्नी कम्मो देवी (30) की संदिग्ध परिस्थतियो में उसकी सुसराल में जलकर मृत्यु हो गयी। सुसराल पक्ष के अनुसार उसने स्वयं मिट्टी का तेल छिड़क कर आत्म हत्या कर ली। जब कि मायके पक्ष का कहना था कि साॅवली होने के कारण कम्मो का पति किसी दूसरी औरत के माया मोह मेें पड़कर बराबर उसे शारीरिक यातनाये देता था और उसी ने मिट्टी का तेल छिड़क कर उसे मार डाला।
प्राप्त विवरण अनुसार थाना सतरिख के ग्राम बिराहिमापुर के निवासी मंगल प्रसाद यादव की पुत्री कम्मो देवी का विवाह लगभग 12 वर्ष पूर्व रामजस यादव के साथ हुआ था। दोनो का विवाहित जीवन सुखमय चल रहा था और उनके चार बच्चे भी हुए,जिसमें तीन लडके व एक लड़की मौजूद है।विगत तीन वर्षो से अचानक रामजस यादव का व्यवहार अपनी पत्नी के प्रति बदलने लगा और बात बात पर वह उसकी पिटाई करने लगा। यह खबर जब कम्मो के घरवालो केा हुई तो उन्होने उसे घर बिठाने का निर्णय लिया परन्तु कम्मो इस पर राजी न हुई और उसने अपने आत्म विश्वास के सहारे अपने पति का दिल पुनः जीतने का निर्णय लेकर सुसराल मे ही रहने का फैसला किया।
कम्मो के पिता मंगल प्रसाद के अनुसार बीते दिवस उसे समाचार मिला कि उसकी पुत्री को जला कर मार डाला गया है। इस समाचार पर जब वह अपने समधियाने पहुॅचा तो पाया कि उसका दामाद व घर के अन्य सदस्य फरार है और निवस्त्र जली हालत मंे उसकी पुत्री एक कोठरी में पड़ी हुई है।उसने अपने दामाद को अपनी पुत्री का हत्यारा बताते हुए कहा है कि उसकी पुत्री का दोष केवल इतना था कि वह साॅवली थी और दामाद का रंग साफ।यही कारण था कि शादी के आठ नौ वर्ष बाद उसके दामाद ने उसकी पुत्री के साथ नजरे फेर ली और उसे बराबर मानसिक व शारीरिक यातनायें देने का क्रम उसने प्रारम्भ कर दिया और अन्त में अपनी अय्याशी के चलते उसकी पुत्री को मार डाला। पुलिस ने मृतका के पिता की तहरीर पर अंतर्गत धारा 498ए भा0द0वि0 अभियोग दर्ज कर रामजस की तलाश प्रारम्भ कर दी है।

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