सोमवार, 4 अक्तूबर 2010

निर्दोष व्यक्ति को बेजा हिरासत में कैद रखना पुलिस को महंगा पड़ा,

बाराबंकी। वर्ष 2007 में नगर कोतवाली अंतर्गत हुई एल0आई0सी0लूट काण्ड के खुलासा करने के दौरान एक निर्दोष व्यक्ति को पुलिस द्वारा पकड़कर छः दिनांे तक बेजा हिरासत में रखकर उस पर थर्ड डिग्री इस्तेमाल करने का कृत्य अब उसके गले की हड्डी बन गया है। क्योंकि भुक्त भोगी द्वारा उच्च न्यायालय में गोहार लगाने पर, सी0जे0एम0 बाराबंकी को न्यायालय से दिए गए आदेश के अनुपालन में नगर कोतवाली में एक माह के विलम्ब के पश्चात जनपद के पूर्व पुलिस अधीक्षक एस0बी0शिरोडकर, तत्कालीन अपर पुलिस अधीक्षक, तत्कालीन उपाधीक्षक रा0स0घाट, तीन थानाध्यक्ष व पाॅच आरक्षियों के विरुद्ध अभियोग पंजीकृत कर लिया गया है।
  
पहली जनवरी 2007 कोे नगर कोतवाली स्थित एल0आई0सी0 मुख्यालय पर हुई 50 लाख की लूट के सम्बन्ध में पूछ ताछ के बहाने यूॅ तो लगभग एक दर्जन लोगो को पकड़कर उनका शारीरिक उत्पीड़न तथा आर्थिक दोहन किया गया था, परन्तु एक निर्दोष व्यक्ति को छः दिन तक गैरकानूनी हिरासत मंे बंद करके उससे पैसे की मांग तथा अदा न करने पर उसकी जमकर पिटाई अब पुलिस को काफी महंगी पड़ रही है और तत्कालीन पुलिस अधीक्षक समेत 11 पुलिस वालों के जेल की सलाखों के पीछे जाने के दिन नजदीक आ रहे है।
 उल्लेखनीय है कि नव वर्ष की सुबह साढे 10 बजे के करीब नगर कोतवाली स्थित आवास विकास में एल0आई0सी0मुख्यालय पर कुछ अज्ञात लुटेरों द्वारा 50 लाख रुपये से भरा बक्सा उस समय असलहों से ताबड़तोड़ फायरिंग करके दहशत फैलाते हुए लूट लिया था, जब एल0आई0सी0कैशियर विगत दो दिन का कैश लेकर स्टेट बैंक मुख्य शाखा में जमा करने जा रहे थे। लुटेरे मोटर साइकिल पर रुपयांे से भरा बक्सा लेकर फरार हो गए, बाद में पहुॅची पुलिस ने काफी देर तक इधर उधर हाथ मारा परन्तु लुटेरों का कुछ पता सुराग नही चला।
 इतनी बड़ी लूट से परेशान पुलिस ने सतरिख थाने में सम्भावित मुजरिमों को पकड़ पकड़ कर उन पर शारीरिक यातनाएं देने का काम शुरु किया। लगभग डेढ दो दर्जन लोगो को कई कई दिनों तक थाने मंे बंद करके उन पर थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया गया। परन्तु पुलिस को लुटेरों की धूल भी न मिली और नतीजा यह हुआ कि नगरकोतवाली के रिकार्ड में आज भी यह लूट अनखुली हालत में फाइलों में बंद पड़ी हुई है।
 उधर पुलिस के वारे न्यारे रहे लोगो से उत्पीड़न न करने के नाम पर जमकर वसूली की गयी। बाद में किसी की हिम्मत नही पड़ी कि पुलिसिया जुल्म के खिलाफ कोई आवाज उठाता परन्तु नगर कोतवाली के मोहल्ला सत्यप्रेमी नगर निवासी महेन्द्र शुक्ला ने हिम्मत करकेे अपने विरुद्ध किए गए अन्याय के खिलाफ आवाज बुलन्द की। उन्होने न्याय की पहली गुहार सी0जे0एम0बाराबंकी की अदालत में धारा-156(3)द0प्र0संहिता के तहत लगायी परन्तु तत्कालीन सी0जे0एम0 अनुपमा गोपाल निगम द्वारा फरियादी महेन्द्र शुुक्ला के प्रार्थना पत्र को 2 फरवरी 2007 को खारिज कर दिया गया। श्री शुक्ला ने फिर भी हिम्मत न हारी और उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया जहाॅ याची महेन्द्र शुक्ला तथा विपक्षियों का पक्ष जानने के पश्चात अंततः फरवरी 2010 में उच्च न्यायालय ने तत्कालीन सी0जे0एम0 अनुपमा गोपाल निगम द्वारा प्रार्थना पत्र खारिज किए जाने पर रोष व्यक्त करते हुए सी0जे0एम0बाराबंकी को निर्देश देकर आगे की कार्यवायी करने को कहा।
 वर्तमान सी0जे0एम0सूर्य प्रकाश शर्मा द्वारा अगस्त माह 2010 के अंतिम सप्ताह में नगर कोतवाली को उक्त अभियुक्तों के विरुद्ध उचित धाराआंे में अभियोग पंजीकृत करने का आदेश दिया। बावजूद इसके लगभग सवा माह तक नगर कोतवाली पुलिस द्वारा अभियोग पंजीकृत नही किया गया। महेन्द्र शुक्ला के अनुसार पुलिस ने अभियोग न दर्ज करके दरअसल अभियुक्तों को यह अवसर प्रदान किया कि वह सर्वोच्च न्यायालय से अपने विरुद्ध अभियोग पंजीकृत करने के आदेश के विरुद्ध स्थगन आदेश ले आएं। परन्तु अभियुक्तो को सम्भवतः सर्वोच्च न्यायालय से भी कोई राहत नही मिली और उनका महेन्द्र शुक्ला को मनाने का प्रयास भी विफल हो गया। अंततः नगर कोतवाली पुलिस ने आज तत्कालीन पुलिस अधीक्षक एस0बी0शिरोडकर, अपर पुलिस अधीक्षक उत्तरी आर0बी0सिंह,क्षेत्राधिकारी रा0स0घाट राजेश सिंह, थानाध्यक्ष सफदरगंज सी0पी0द्विवेदी, थानाध्यक्ष जैदपुर जी0एस0त्रिपाठी, थानाध्यक्ष कुर्सी देवेन्द्र दूबे,तथा आरक्षीगण राजेश धवल (जिसकी अब मृत्यु हो चुकी है), शीतला सिंह, राम गोपाल दीक्षित, विपिन वर्मा, और राकेश पाण्डेय के विरुद्ध वादी को गैरकानूनी हिरासत मे रखकर उसे शारीरिक यातनाएं देने तथा पैसे की मांग करने के आरोप में अभियोग अपराध सं0-2275/10 दर्ज कर लिया गया।
 उधर सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार अभियुक्तों द्वारा अपने विरुद्ध की जा रही कार्यवायी को निरस्त करने के लिए सर्वोच्च न्यायालय में एस0एल0पी0दायर की गयी थी, जिसे मंजूर करके नीचे की अदोलतों द्वारा की जाने वाली समस्त कार्यवायी पर रोक लगा दी गयी है।


 

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