बुधवार, 20 अक्तूबर 2010

डेंगू की दहशत से जनता पस्त तो वहीं डाक्टर व पैथालाजिस्ट मस्त

बाराबंकी(तारिक खान)। आजकल पूरे प्रदेश में विभिन्न रोगो से उत्पन्न बुखार ने अपनी दहशत का सिक्का लोगो के दिमाग पर जमा रखा है। जनपद बाराबंकी भी इस स्थिति का शिकार है। सरकारी स्वास्थ्य विभाग तो यह कहकर अपने हाथ खड़े किए हुए है कि डेंगू का टेस्ट उनके अस्पतालों में उपलब्ध नही है, परन्तु उसके डाक्टर मरीजों के दिल में बैठी दहशत का लाभ उठाकर प्राइवेट पैथालाजी में डेंगू टेस्ट बुखार के हर चार मरीजों  में से एक को भेजकर प्रतिदिन हजारों रुपये कमीशन के तौर पर बना रहे है। यानि बहती गंगा में हाथ धो रहे है।
 वर्षा ऋतु की समाप्ति पर यूॅ तो हर वर्ष शरद ऋतु के आगमन से पूर्व वायरल फिलू, मलेरिया, टायफाइड, की बीमारियों से लोग पीड़ित होते थे परन्तु विगत कई वर्षो से बिहार, व पश्चिम बंगाल में अधिकता से पाया जाने वाला रोग डेंगू जो एडीज एजिप्टाई मादा मच्छर के काटने से उत्पन्न होता है और इसके लक्षण प्रारम्भ मंे वायरल बुखार की भांति होते है। परन्तु बाद में रक्त में पाये जाने वाली कणिका प्लेटलेट्स के काफी कम होने जाने के उपरान्त जब कान या मुॅह से रक्त स्राव शुरु होता है अथवा शरीर पर लाल रंग के चकत्ते पड़ने लगते है तो इस रोग के स्पष्ट लक्षण सामने आते है। डेंगू का ज्वर सामान्यतः प्रारम्भ के तीन दिनों में काफी तेजी से चढता है और 105 डिग्री फारेनहाइट से लेकर 106 डिग्री फारेनहाइट तक चला जाता है। बदन मेें काफी टूटन होती है, तथा शरीर में कमजोरी के कारण शिथिलता आ जाती है और मरीज काफी बेहाल सा हो जाता है।
 परन्तु डेंगू ज्वर से पीड़ित रोगी यदि किसी झोला छाप या बदनीयत चिकित्सक के चक्कर में पड़ जाता है, तथा उसकी सलाह पर कार्टीसोन स्टाराइड तथा दर्दनिवारक गोलियां सामान्यतः ब्रूफेन सूमो या निमोसिलाइड एस्प्रीन तथा डाइक्लो फिनिक सोडियम ग्रुप की दवाओं का सेवन कर लेता है तो प्लेटलेट्स की संख्या 20 हजार प्रति क्यूबिक मि0मी0 से नीचे गिर जाने पर उसकी स्थिति घातक हो जाती है।
 डेंगू रोग की पुष्टि एलाईजा टेस्ट के माध्यम से या एनएस-1 एण्टीजेन के माध्यम से पैथालाजिस्ट द्वारा की जाती है। जनपद स्तर के किसी भी सरकारी स्वास्थ्य केन्द्र पर यह टेस्ट उपलब्ध नही है और न ही सरकार को इसकी फिक्र है कि इसकी किट सरकारी पैथालाजी में उपलब्ध कराकर कम से कम जनता को डाक्टर के रुप में खून चूसने वाले भेड़ियो से बचाया जा सके। जबकि प्रति वर्ष स्वास्थ्य के नाम पर करोड़ो रुपया पानी की तरह बहाया जाता है।
 इसका सीधा लाभ प्राइवेट पैथालोजिस्ट उठा रहे है या डेंगू रोग की सम्भावना का डर दिखाकर प्राइवेट डाक्टर से लेकर सरकारी डाक्टर। आप को सुनकर हैरत हो जाएगी कि एक टेस्ट पर डाक्टर को 300 से लेकर 500 रुपये तक का कमीशन पैथालाजिस्ट द्वारा दिया जाता है अर्थात एक ओर डेंगू फैलाने वाला मच्छर रोगी का खून चूसकर रोग को पैदा करता है तो समाज में ईश्वर के बाद भगवान का दर्जा रखने वाला तबका भी इन रोगियां का खून चूसने से बाज नही आता है।
 अवधनामा के नुमायन्दे ने जब इस सम्बन्ध में जनपद के बड़े पैथालाजी सेन्टरों का भ्रमण किया तो पाया कि हर पैथालाजिस्ट का अपना अलग रेट है। कोई पैथालाजिस्ट एलाईजा डेंगू के टेस्ट का 850 रुपये ले रहा है तो वहीं दूसरा 1200 रुपये। इसी प्रकार रैपिड टेस्ट के नाम से उपलब्ध एनएस-1 एण्टीजेन टेस्ट का कोई हजार रुपये ले रहा है तो कोई 950 रुपये। और कोई पैथालाजिस्ट दोनो टेस्टो को मिलाकर 2150 रुपये ले रहा है तो केाई 1800 रुपये तो कोई 1000 रुपये में ही काम बनाए दे रहा है। यानि मछली मण्डी के बाजार सा आलम है। इसी प्रकार कमीशन मामले में कोई पैथालाजी डाक्टर को 25 प्र्रतिशत कमीशन दे रहा है तो कोई 30 प्रतिशत तो कोई 50 प्रतिशत तक दे रहा है।
 और यह सब खेल इलेक्ट्रानिक मीडिया व प्रिन्ट मीडिया में डेंगू ज्वर को लेकर प्रतिस्पर्धा के रुप मंे तेजी से परोसे जा रहे  समाचारो के कारण चल रहा है। मामूली वायरल बुखार मंे भी लोग भयभीत होकर हाथ में बाकायदा अखबार की कटिंग लेकर अस्पतालो, प्राइवेट क्लीनिकों व नर्सिंग होम में पहुॅच रहे है और इनकी अज्ञानता पर इनसे हमदर्दी करने वाला कोई नही है। सभी का एक ही मंशा है कि यह शिकार फॅसा इसे उल्टी छूरी से हलाल कर दो। बेचारा रोगी तो अपने स्वास्थ्य चुकाकर भुगतता है परन्तु उसका तीमारदार आर्थिक रुप से भुगतता है।
 जब  अवधनामा नुमायन्दे ने जनपद मुख्यालय स्थित बड़े पैथालाजी सेन्टरों से यह पूछा कि उनके यहाॅ विगत 15 दिनों में कितने टेस्ट डेंगू के नाम पर किए गए  और उसमें से कितने पाजिटिव पाए गए तथा किस डाक्टर सबसे अधिक टेस्ट कराए तो हर पैथालाजी ने टाल मटूल का सहारा लेकर इन सवालो का उत्तर देने से परहेज किया।
 यह बात दुरुस्त है कि जनपद में स्थानीय निकायो व स्वास्थ्य विभाग की सफाई के प्रति तथा मच्छरांे को नष्ट करने के प्रति बरती जा रही उदासीनता के कारण हुई मच्छर जनित रोग डेंगू मलेरिया तथा दिमागी बुखार (जापानीज एनसेफलाइटिस) जैसे रोग फैलते है और इस वर्ष वर्षा के अधिक होने के कारण जगह जगह जलभराव की स्थिति से मच्छरों की पैदावार ज्यादा है, इसका कारण डेंगू की दहशत का सिक्का सिर चढकर बोल रहा हैै।
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