रविवार, 19 दिसंबर 2010

कांगे्रस का देर से उठाया गया सही कदम

बाराबंकी। देर से सही परन्तु दुरुस्त तौर पर कांगे्रस ने हिन्दु कटट्रपंथियांे के विरुद्ध मोर्चा खोलने का मन बना लिया है, परन्तु कांगे्रसी कितने दिन अपने इस रुख पर टिकेंगे यह अपने आप मे एक महत्वपूर्ण प्रश्न है क्योंकि कांग्रेस के भीतर ही ऐसे कटट्रपंथियों का  आशियाना बहुत पुराना है।
 अंतर्राष्ट्रीय जगत में अपने खुलासो से तहलका मचा देने वाली वेवसाइट विकी लीक्स ने पिछले दिनो कांग्रेस के महासचिव राहुल गांधी की अमरीकी राजदूत टिमोथी रोमेर के साथ  गुप्तगु के अंश लीक करते हुए अपनी वेवसाइट मे खुलासा किया है कि 03 अगस्त 2009 को अमरीकी विदेश सचिव हिलेरी क्लिण्टन के भारत भ्रमण के दौरान प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की डिनर पार्टी में जब अमरीकी राजदूत ने राहुल गांधी से पूछा कि लश्कर ए तोयबा से देश को होने वाले संकट पर वह क्या सोचते है तो राहुल ने कहा कि लश्कर ए तोयबा बेशक एक आतंकी संगठन है और उसने देश में अपनी पैठ बना भी ली है परन्तु उससे कहीं अधिक बडा संकट देश के अन्दर हिन्दू आतंकवाद से है।
 राहुल के इस बयान पर आगबबूूला होकर अपने को हिन्दुओ का ठेकेदार समझने वाले राजनीतिक संगठन भाजपा व शिव सेना तथा उनकी पैतृक जमात राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने राहुल गांधी व कांगे्रस की कटु शब्दो मे आलोचना करते हुए उन्हे पाकिस्तान नवाज तक कह डाला।
 चैतरफा हमलो से घिरी कांग्रेस ने पहले तो चुप्पी साध ली फिर सम्भल कर एक कदम पीछे हटते हुए कांगे्रस दो कदम बढकर हिन्दु कटट्रपंथी जमातो के विरुद्ध मोर्चा खोल दिया है। कांगे्रसी प्रवक्ताओ द्वारा अब सीधे आर0एस0एस0को अपने निशाने पर लेेते हुए कहा है कि माले गांव मक्का मस्जिद तथा अजमेर बमब्लास्ट में निरुद्ध आर0एस0एस0कार्यकर्ता सुनील जोशी की हत्या में आर0एस0एस0की भूमिका की सघन जाॅच होनी चाहिए क्योंकि ऐसे समय पर सुनील जोशी की हत्या हुई है जब वह आतंकी घटनाओ में अपना जुर्म स्वीकारने के बाद आर0एस0एस0में उॅचे पदो पर बैठे संचालको का नाम लेने वाला था।
 जहाॅ तक हिन्दू कटट्रपंथियों का सम्बन्ध है तो हिंसा व आतंक से उनका रिश्ता बहुत पुराना है उनका पहला निशाना वह व्यक्ति बना जिसे पूरा विश्व अहिंसा के पुजारी के नाम से जानता है। राष्ट्रपिता गांधी की हत्या इसी कारण से ऐसे तत्वो द्वारा कर दी गयी क्योंकि वह सामाजिक समरसता व अनेकता में एकता की बात करते थे। राष्ट्रपिता की हत्या के बाद थोड़े समय के लिए आर0एस0एस0 व अन्य हिन्दु कटट्रपंथी संगठनो पर अंकुश उन्हे प्रतिबन्धित कर कांग्रेसी सरकार ने लगाया परन्तु कांगे्रस के अन्दर मौजूद आर0एस0एस0के मित्रो ने पुनः क्षमादान आर0एस0एस0को दिलवा दिया। उसके बाद बराबर हिन्दुवादी संगठन देश की अखण्डता व सौहार्दता के विरुद्ध षडयन्त्र रखते रहे हजारो की संख्या में सांप्रदायिक दंगे कराकर भारत माता की अस्मिता को यह बहशी तार तार करते रहे। देश की अर्थव्यवस्था की प्रगति दर पर विराम लगाते रहे परन्तु सत्ता में जमी बैठी कांगे्रस हुकुमते हर दंगे के बाद एक कमीशन जाॅच के लिए बिठाकर उपद्रवियों के काले कारनामो को ठण्डे बस्ते में डालती रहीं। नतीजा यह हुआ कि उनके हौसले और बढे और 90 के दशक के प्रारम्भ में हिन्दु लहर का ज्वाला मुखी दहका कर हिन्दू कटट्रपंथी तथाकथित धर्मनिरपेक्ष दलो के साथ साझा कर सत्ता पर विराजमान हो गए।
 उसके बाद बाबरी मस्जिद गिरी और घड़ियाली आॅसू बहाने वाले अटल बिहारी बाजपेई के प्रधानमंत्री कार्यकाल में दिल को दहला देने वाला नरसंहार गुजरात में नरेन्द्र मोदी के मुख्यमंत्री रहते हुए किया गया।
 हिन्दुवादी शक्तियो के कुकर्माे से नाराज आमतौर पर धर्म निरपेक्ष मिजाज़ रखने वाली भारतीय आमजनता ने उन्हे सजा देते हुए सत्ता से उतार फेंका और कांगे्रस के नेतृत्व वाली यूपीए सरकार को देश की कमान सौप दी। कांगे्रस के दौर में हिन्दुवादी संगठनो द्वारा अपने आतंक का सिलसिला नए अंदाज से विदेशो मे बैठे अपने आकाओ के साथ मिलकर प्रारम्भ किया गया। देश मे आतंकी घटनाए होती रही घटना के चंद घण्टो के अन्दर एक ई मेल आता उसमें किसी मुस्लिम संगठन का नाम लेकर घटना की जिम्मेदारी ली जाती और उसके बाद ए0टी0एस0द्वारा किसी रहमान, फरमान या निजाम को पकड़ कर बगैर किसी सबूत के बंद कर दिया जाता। परन्तु हजारो की संख्या में कथित आतंकवादियों को जेल की सलाखो के पीछे पहुॅचाने के बावजूद देश मे आतंकी घटनाओ का सिलसिला बंद नही हुआ।
 परन्तु पहली बार महाराष्ट्र ए0टी0एस0 के इंचार्ज हेमन्त करकरे द्वारा मालेगांव बमधमाको के लिए अभिनव भारत व आर0एस0एस0 के लोगो पर हाथ डालकर जब धमाका किया गया तो 26/11 का हमला मुम्बई के ताज होटल पर किया जाता है और हमले के एक ही घण्टे के भीतर हेमन्त करकरे समेत मुम्बई पुलिस के तीन जाॅबांज आफिसर आतंकियों की गोलियो का शिकार बना दिए जाते है।
 उसके बाद लम्बे समय तक फिर जल्द ही कोई आतंकी घटना का देश में न होना अपने आप में इस बात की पुष्टि करता है कि जब हिन्दुवादी संगठनो पर कानून का शिकंजा कसा तो आतंक का सिलसिला जो कई वर्षो से देश मे जारी था उसमेें कमी आयी।
 राहुल गांधी के बयान को शब्दो मे कैद करते हुए हिन्दु कटट्रपंथी जमातो द्वारा देश के उन इंसाफ पसन्द हिन्दुओ को बर्गलाने का काम यह कहकर किया जा रहा है कि राहुल ने हिन्दु आतंकवाद कहकर हिन्दुओ के धर्म का अपमान किया है। परन्तु यह आरोप वह लोग लगा रहे है जो वर्षो से जेहादी आतंकवाद व इस्लामी दहशतगर्दी के नारे हर आतंकी घटना पर लगाते नही थकते थे। हिन्दी व अंगे्रजी समाचार पत्रो मे बडे बडे लेख इन संगठनो के प्रवक्ताओ द्वारा मुसलमानो के धार्मिक ग्रन्थ कुरान व शरीयत के कानूनो की भ्रमित व्याख्या करके लिखे जाते रहे। देश की धार्मिक सौहार्दता के ताने बाने को छिन्न भिन्न कर अपनी दूषित विचार धारा का विष घोला जाता रहा। परन्तु कांगे्रस के रुप में कमजोर सरकार ने ऐसे लोगो के विरुद्ध कोई कार्यवायी नही की। यह इसी का नतीजा है कि यह लोग देश मे पनपते रहे। आज यदि कांग्रेस ने यह फैसला लिया है कि वह हिन्दु कटट्रपंथियों के उपर कानूनी शिंकंजा कसेगी तो उसे मजबूती के साथ यह काम करना चाहिए पहले की तरह बीच अधर में ऐसे लोगो को अधमरा करके छोड़ नही देना चाहिए क्योंकि यह बात सही है कि आतंकवाद का कोई धर्म नही होता परन्तु कांगे्रस को खतरा स्वयं अपने अन्दर से भी है। जिसमें ऐसे तत्वो के समर्थको की कोई कमी नही है। राहुल गांधी को अपने घर में झाॅककर पहले सफायी करने की भी जरुरत है तभी सफलता उनके हाथ लगेगी।
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