बुधवार, 12 जनवरी 2011

मुसलमान अपने वोटो को विभाजित कराने वाली शक्तियों को पहचाने-वसीम राईन

बाराबंकी। देश के मौजूदा हालात में मुसलमानो के उपर बड़ी जिम्मेदारी यह है कि वह आने वाले प्रदेश विधानसभा चुनाव में अपने वोटो का प्रयोग इस प्रकार से करें कि किसी भी हालत में सम्प्रदायिक एव साम्राज्यवादी शक्तियों का उदय न होने पाएं, क्योंकि इन दोनो शक्तियांे के देश मे मजबूत होने पर सबसे अधिक नुकसान उन्हीं को उठाना पड़ता है।
 उक्त विचार उ0प्र0 जमीयत उर राईन के प्रदेश अध्यक्ष व सपा नेता मो0वसीम राईन राम नगर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम सैदनपुर में पार्टी कार्यकर्ताओं तथा आम जनमानस के बीच व्यक्त कर रहे थे।
 श्री राईन आगे कहा कि आने वाले विधानसभा चुनाव का बिगुल बजने की कगार पर आन पहॅुचा है, लगभग सभी राजनीतिक दलों ने अपनी सफंे दुरुस्त करनी प्रारम्भ कर दी है। आने वाले चुनाव में वोटो की जंग अधिकांशतः मुसलमानों के बीच रहेगी। इसीलिए लगभग हर दल ने अभी से मुसलमानों को सुनहरे ख्वाब दिखाने शुरु कर दिए है। उन्हे मुसलमानांे की पीड़ा भी अब शिददत के साथ बिताने लगी है। कोई दल आरक्षण की बात कर रहा है तो कोई उनकी तालीम के पिछड़ेपन पर आॅसू बहा रहा है। कोई दल आरक्षण की बात कर रहा है तो केाई उनकी तालीम के पिछड़ेपन पर आॅसू बहा रहा है। कोई इस्लाम की दुहाई देकर अपनी पार्टी का बैनर सजा कर और साम्प्रदायिक शक्तियों से पैसा लेकर अपनी राजनीतिक दुकान लगा रहा है। परन्तु इन सबका उददेश्य केवल मुस्लिम मतों का विभाजन करना ही है।
 मुसलमानो को इन बहरुपियांे से हर हाल में होशियार रहना है। उन्हे चुनाव के समय भावना में नही बहना है और दिमाग को पूरी तरह से खोलकर खूब समझबूझकर अपने हक में अच्छा बुरा सोचकर अपने लोकतान्त्रिक हक का प्रयोग करना होगा। मुसलमानों को यह याद रखना चाहिए कि जिस समय 90 दशक में सम्प्रादायिक हिंसा का दानव अपना फन उठाकर देश की सद्भावना को डस रहा था तथाकथित मुस्लिम दोस्त समझी जाने वाली पार्टियों मुसलमानांे से नजरें चुरा रही थी ऐसे समय पर कौन पार्टी और कौन नेता उनकी मदद मे सामने आया था?और अभी हाल में उच्च न्यायालय इलाहाबाद द्वारा बाबरी मस्जिद के मुकदमें में जब न्याय के नाम पर उसका मजाक उड़ाया गया था तो फिर किस नेता ने खुलकर इस पर टिप्पणी की थी। यह सब बातें मुसलमानों को अपने जेहन मे रखना चाहिए।
 कब तक मुसलमान अपने को राजनीतिक मण्डी का माल बनायंे रखेंगे और कब तक वह मुस्लिम शक्लों सूरत रखने वाले बहरुपियों स्वार्थी नेताओं की दिग्भृमित तकरीरों के चक्कर में फॅस कर अपनी वोट की ताकत को विखण्डित करते रहेंगे? यही करके उन्होनंे अपने खैर ख्वाहीं को सदैव कमजोर किया है, उन्हे राजनीतिक अभिलाषाओं के जाल में फॅसने के लिए मजबूर किया है। यदि मुसलमान अपने असल इस्लामिक किरदार पर वापस आ जाएं और अपने बीच पनपने वाले पाखण्डियों को पहचान लें तो फिर कोई वजह नहीं कि वह इस देश में फिर से उस मुकाम पर न आ जाएं जहाॅ कभी उनके पुरखों की हुक्मरानी थी। ऐसा करके जहाॅ एक ओर उनकी सामाजिक तथा आर्थिक स्थिति में सुधार होगा वहीं देश के विकास व उसकी समृद्धि में भी उनका बहुमूल्य योगदान होगा। योगदान तो आज भी उनके श्रम का है परन्तु विकास में उनकी गिनती नही की जाती।
 इस अवसर पर जान मो0 राईन, जाबिर राईन, शब्बीर अन्सारी, अफरोज अंसारी, निसार राईन, ख्वाजा अंसारी आदि सैकड़ों लोग मौजूद थे। 
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