गुरुवार, 13 जनवरी 2011

रामनगर पुलिस का दावा, चोरी के टैक्टर के साथ दो अभियुक्त पकड़े

बाराबंकी। रामनगर पुलिस ने दावा किया है कि उसने विगत 24/25दिसम्बर की रात कस्बा रामनगर से चोरी गए एक टैक्टर के दो मुल्जिमान को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर धोखे से बेच दिए जाने वाले इस टैक्टर को बरामद कर लिया है।
 पुलिस लाईन के मनोरंजन कक्ष में आयोजित एक प्रेस वार्ता में पुलिस अधीक्षक की उपस्थिति में रामनगर पुलिस ने मुल्जिमान को पेश किया और बताया कि 24/25 दिसम्बर 2010 की रात कस्बा रामनगर के संजीव कुमार गुप्ता पुत्र हरिवंश लाल गुप्ता कस्बा व थाना रामनगर का टैक्टर स्कार्ट पावर 434 रजिस्ट्रेशन सं0यू0पी041एच 6261 गुप्ता के फार्म से चोरी कर लिया गया था। इस बाबत मुकदमा अपराध सं0-836/10 अंतर्गत धारा 379 आई0पी0सी0दर्ज किया गया था। पुलिस विवेचना में अभियुक्तगण उमाशंकर शर्मा पुत्र अशोक कुमार शर्मा, शमशुद्दीन पुत्र इंसान अली साकिनान कस्बा व थाना रामनगर व कृष्ण बिहारी साकिन रघुवापुर थाना रामपुर मथुरा जनपद सीतापुर के नाम प्रकाश में आए।
 कल दिनांक 12जनवरी 2011 को थानेदार रामनगर दीना नाथ मिश्र व उपनिरीक्षक परमहंस पासवान द्वारा मुखबिर की सूचना पर वांछित अभियुक्त उमाशंकर शर्मा व शमशुद्दीन अमोलीकला तालाब के पास गिरफ्तार कर लिए गए। पूछताछ में अभियुक्तो ने बताया कि उक्त टैक्टर को चोरी करके तीनो ने जनपद लखनऊ के थाना चिनहट स्थित ग्राम भीलूपुर नवस्ता निवासी सोमेन्द्र वर्मा को एक लाख पचास हजार रुपये में बेच दिया तथा उसे यह नही बताया कि टैक्टर चोरी का है। पुलिस ने जब सोमेन्द्र्र से सम्पर्क किया तो पता चला कि उसका यह टैक्टर उसके रिश्तेदार राधेश्याम पुत्र खुशीराम नि0ग्राम कुतबापुर थाना फतेहपुर के यहाॅ काम के लिए भेजा गया है। पुलिस ने ग्राम कुतबापुर जाकर उक्त टैक्टर को अभियुक्तो की निशानदेही पर राधेश्याम के दरवाजे से बरामद कर लिया।
 पुलिस के अनुसार उन्होने सोमेन्द्र वर्मा को इस लिए मुल्जिम नही बनाया कि वह चोरी की घटना से अंजान था और उसने पुराने टैक्टर की कीमत भर दाम देकर टैक्टर खरीदा था। पुलिस ने मुख्य अभियुक्त उमाशंकर शर्मा के बारे में बताया कि उसके व शमशुद्दीन के विरुद्ध वर्ष 2008 में मोबाइल की एसेसरीज बेचने वाले सेल्समैन दीपू वर्मा के अपहरण एवं हत्या के मामले में भी अभियोग पंजीकृत है और थोड़ा अर्सा पहले दोनो जमानत पर छुटे थे।
 पुलिस द्वारा बतायी गयी इस कहानी में सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि चोरी का टैक्टर खरीदने वाले के विरुद्ध कोई कार्यवायी क्यों नही की गयी। क्या पुलिस के गुडवर्क के भीतर भी कोई गुड वर्क है? यह प्रश्न पत्रकार वार्ता में उपस्थित सभी प्रेस संवादाताआंे के मन में कचोके लगाता रहा। जहाॅ तक टैक्टर की कीमत का मामला है इस मेक के  टैक्टर की कीमत लगभग 5लाख रुपये है चूॅकि यह चंद वर्ष पुराना टैक्टर  था इस कारण चोरी से मात्र एक हफ्ता पहले दो लाख पचासी हजार रुपये में संजीव कुमार गुप्ता द्वारा खरीद कर लाया गया था। अब पुलिस का यह कहना कि डेढ लाख रुपये देकर सोमेन्द्र द्वारा टैक्टर खरीदना टैक्टर की वाजिबी कीमत है किसी गले के नीचे नही उतर सकती फिर डेढ लाख रुपये देने वाला व्यक्ति क्या यह जानने की कोशिश नही करेगा कि जो माल वह खरीद रहा है उसे बेचने वाले के पास इसका स्वामित्व का कोई प्रमाण है कि नही। बहरहाल पुलिस की अपनी थ्योरी और अपनी कहानी है।
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