गुरुवार, 9 जून 2011

भारत के "पिकासो" एमएफ हुसैन नहीं रहे :Khaskhabar.com




























लंदन/नई दिल्ली। भारत के विख्यात पेंटर मकबूल फिदा हुसैन का गुरूवार त़डके लंदन के एक अस्पताल में निधन हो गया। वे 96 वर्ष के थे। वे अपनी कई पेंटिंग्स की वजह से काफी विवादों में रहे, मगर अपनी कूची की उन्होंने पूरी धाक भी जमाई। विश्व में पिकासो के बाद उन्हीं का नाम लिया जाता है।
मकबूल फिदा हुसैन का जन्म महाराष्ट्र के पंढरपुर में 127 सितंबर, 1915 को हुआ था। उन्होंने हिंदू देवी-देवताओं को लेकर बनाई अपनी विवादास्पद पेंटिंग्स की वजह से मिल रही धमकियों के चलते वर्ष 2006 में भारत छो़ड दिया था और लंदन चले गए थे। तभी से हुसैन लंदन में ही रह रहे थे।
भारत के पिकासो
मशहूर पत्रिका फोब्र्स ने उन्हें "भारत का पिकासो" की पदवी दी थी। 1996 में उनकी बनाई गई हिंदू देवी-देवताओं की निर्वस्त्र पेंटिंग्स को लेकर काफी हंगामा हुआ था। कई कट्टरपंथी संगठनों ने तो़ड-फो़ड की और एमएफ हुसैन को धमकी भी दी गई। पिछले साल जनवरी में उन्हें कतर ने नागरिकता देने की पेशकश की, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया था।
बॉलीवुड की प्रसिद्ध अभिनेत्री माधुरी दीक्षित के ब़डे प्रशंसक एमएफ हुसैन ने उन्हें लेकर गज गामिनी फिल्म भी बनाई ती। इसके अलावा उन्होंने तब्बू के साथ एक फिल्म मीनाक्षी, अ टेल ऑफ थ्री सिटीज बनाई थी। इस फिल्म के एक गाने को लेकर काफी विवाद हुआ था। कुछ मुस्लिम संगठनों ने इस फिल्म पर आपत्ति जताई थी।
कैरियर का सफर
एमएफ हुसैन को पहली बार राष्ट्रीय स्तर पर पहचान 1940 के दशक के आखिर में मिली। वर्ष 1947 में वे प्रोग्रेसिव आर्टिस्ट ग्रुप में शामिल हुए। युवा पेंटर के रूप में हुसैन बंगाल स्कूल ऑफ आट्र्स की राष्ट्रवादी परंपरा को तो़डकर कुछ नया करना चाहते थे। वर्ष 1952 में उनकी पेंटिंग्स की प्रदर्शनी ज्यूरिख में लगी। उसके बाद यूरोप और अमरीका में उनकी पेंटिग्स की जोर-शोर से चर्चा शुरू हो गई। वर्ष 12955 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया। वर्ष 1967 में उन्होंने अपनी पहली फिल्म थ्रू द आइज ऑफ अ पेंटर बनाई। यह फिल्म बर्लिन फिल्म समारोह में दिखाई गई और फिल्म ने गोल्डन बेयर पुरस्कार जीता।
वर्ष 1971 में साओ पावलो समारोह में उन्हें पाबलो पिकासो के साथ विशेष निमंत्रण देकर बुलाया गया था। 1973 में उन्हें पद्मभूषण से सम्मानित किया गया तो वर्ष 1986 में उन्हें राज्यसभा में मनोनीत किया गया। वर्ष 1991 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मविभूषण से सम्मानित किया। 92 वर्ष की उम्र में उन्हें केरल सरकार ने राजा रवि वर्मा पुरस्कार दिया। क्रिस्टीज ऑक्शन में उनकी एक पेंटिंग 20 लाख अमेरिकी डॉलर में बिकी। इसके साथ ही वे भारत के सबसे महंगे पेंटर बन गए थे। उनकी आत्मकथा पर एक फिल्म भी बन रही है।






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