बुधवार, 25 जनवरी 2012

SC ने गुजरात में फर्जी मुठभेड़ों पर तीन महीने में रिपोर्ट मांगी


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नरेंद्र मोदी
नई दिल्ली।। गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार को एक और झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने साल 2002 से 2006 के बीच प्रदेश में कथित फर्जी मुठभेड़ों में हुई तमाम मौतों की जांच के आदेश दे दिए हैं। कोर्ट ने बुधवार को अपने एक पूर्व जज की अध्यक्षता वाले निगरानी प्राधिकरण से ऐसे तमाम मामलों की पड़ताल करके तीन महीने के अंदर रिपोर्ट दाखिल करने को कहा है।

गुजरात सरकार ने पिछले साल अप्रैल में शीर्ष अदालत के पूर्व जज एम.एस.शाह को अवधि में कथित फर्जी मुठभेड़ों में हत्याओं की जांच पर नजर रखने को कहा था।

जज आफताब आलम और जज सी.के. प्रसाद ने कहा, 'एक निगरानी प्राधिकरण बनाया गया और इस अदालत के एक पूर्व जज उसके अध्यक्ष हैं, इस तथ्य को संज्ञान में लेते हुए हम चाहेंगे कि अध्यक्ष दोनों रिट याचिकाओं में अंकित कथित फर्जी मुठभेड़ के सभी मामलों को देखें।'

पीठ ने वर्ष 2002 से 2006 के बीच गुजरात में हुई कथित फर्जी मुठभेड़ों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा, 'हम चाहते हैं कि जांच पूरी तरह हो ताकि प्रत्येक मामले में सचाई सामने आए।'

इन याचिकाओं में एक तरह से संकेत दिया गया है कि अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों को कथित रूप से आतंकवादियों के तौर पर निशाना बनाया गया।

पीठ ने कहा कि निगरानी प्राधिकरण के अध्यक्ष के पास एक स्वतंत्र टीम गठित करने की आजादी होगी जिसमें गुजरात विशेष कार्य बल या बाहर से अधिकारी हो सकते हैं।

अदालत ने कहा कि निगरानी इकाई के अध्यक्ष मुठभेड़ में मौत के किसी भी मामले में पुलिस के पूर्ववर्ती रेकॉर्ड या मानवाधिकार संस्थाओं के रेकॉर्ड मंगा सकते हैं जिनका जिक्र रिट याचिकाओं में किया गया है। हालांकि पीठ ने स्पष्ट किया कि निगरानी इकाई उन मामलों को नहीं देखेगी जिनकी जांच
अन्य एजेंसियां शीर्ष अदालत के आदेशों पर कर रही हैं।

पीठ ने यह भी कहा कि निगरानी प्राधिकरण के अध्यक्ष चाहें तो मामले में याचिकाकर्ताओं के या मुठभेड़ में मारे गए लोगों के परिजनों का पक्ष सुन सकते हैं। जजों ने कहा कि इस मुद्दे पर याचिकाएं काफी सालों से लंबित हैं लेकिन आज तक कोई अहम फैसला नहीं सुनाया गया है और एसटीएफ की नियुक्ति और निगरानी प्राधिकरण की स्थापना जैसे घटनाक्रम मामले के लंबित रहने के दौरान हुए।

शीर्ष अदालत वरिष्ठ पत्रकार बी जी वगीर्ज और गीतकार जावेद अख्तर की जनहित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। वर्गीज ने गुजरात में पुलिस द्वारा इस अवधि में कथित फर्जी मुठभेड़ों में 21 लोगों की मौत के मामले में जांच की मांग की थी।

जावेद अख्तर ने प्रदेश में कथित फर्जी मुठभेड़ों में विशेष जांच दल द्वारा पड़ताल कराने की मांग की थी। अख्तर ने दावा किया कि निर्दोष लोगों, खासतौर पर मुस्लिम समुदाय के लोगों को आतंकवादियों के तौर पर निशाना बनाया जा रहा है।

उन्होंने अपनी याचिका में अक्टूबर 2002 में कथित अपराधी समीर खान की हत्या के मामले में अखबारों की खबरों तथा एक पत्रिका के स्टिंग ऑपरेशन का हवाला दिया। खान पुलिस हिरासत में था और 21-22 अक्टूबर, 2002 की दरमियानी रात को उसे मार दिया गया। उसने कथित तौर पर एक पुलिसकर्मी की रिवॉल्वर छीन ली थी।
http://navbharattimes.indiatimes.com/articleshow/11628427.cms

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