रविवार, 28 सितंबर 2014

गवाह -------------------------------2

(1)
ST 310/08
सरकार वि0 मो0 खालिद मुजाहिद
व एक अन्य
PW - 2
03-06-09    काॅ0 मुहर्रिर अर्जुन प्रसाद चैधरी थाना मवई जनपद
फैजाबाद ने सशपथ बयान किया कि
    दिनांक 22.12.07 को मैं बहैसियत आरक्षी
लिपिक के पद पर थाना कोतवाली नगर जिला बाराबंकी में
कार्यरत था। उस समय मेरे साथ प्रधान आरक्षी लिपिक
कन्हैयालाल भी कार्यरत थे और कम्प्यूटर राइटर कुवैत
उल्ला भी कार्यरत थे।
    उस दिन समय 9.15 बजे सुबह मैंने अपने
लेख व हस्ताक्षर में मुकदमा अप0सं0 1891/07 बनाम
मो0 खालिद मुजाहिद व 1 अन्य के मुकदमें की कायमी जी0डी0
का इन्द्राज रोजनामचा में की थी। मूल कायमी जी0डी0
एस0पी0 आफिस के अभिलेखागार से लेकर आया हूँ जिसकी
कार्बन कापी व 13 व ब 14 पत्रावली में संलग्न है पठनीय है
जिसे मैंने मूल के क्रम में ही तैयार किया है जिसे मैं प्रमाणित
करता हूँ जिस पर प्रदर्शक-2 डाला गया। मूल कायमी जी0डी0
की छाया प्रति भी मूल से कराकर प्रमाणित कर दाखिल कर रहा हूँ।
आज पत्रावली पर दाखिल कर रहा हूँ।
To Court सुविधानुसार छायाप्रति को कार्बन प्रति के साथ
नत्थी किया जाये। मूल जी0डी0 को नीचे अन्त में वादी के
हस्ताक्षर व तारीख 22.12.07 अंकित है। मुल्जिमान को
दाखिल हवालात मर्दाना व बरामदा माल मुकदयाती सर्वमुहर
मय नमूना मुहर खाना माल खाना रखवाया गया। मेरी
मौजूदगी में फर्द बरामदगी दाखिला के आधार पर मुकदमें की
चिक प्रधान आरक्षी लिपिक कन्हैयालाल द्वारा बोलकर
कम्प्यूटर में फीड कराया गया। मूल चिक प्रदर्शक-1
व फर्द बरामदगी मूल चिक के साथ संलग्न है जो शामिल
पत्रावली है।
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अभियुक्त तारिक कासमी की ओर से रणधीर सिंह
सुमन एडवोकेट

    मैं पिछली पेशी को आया था........कृ0प0उ0  (2)
ST 310/08
सरकार वि0 मो0 खालिद
मुजाहिद व अन्य
PW - 2
03-06-09
उससे पहले मैं मुकदमें में नही आया। पिछली पेशी पर
जो मैं आया था उसका सम्मन मुझे मिला था। जो
पत्रावली पर उपलब्ध है। पत्रावली पर उपलब्ध अ-5
के पुश्त पर सूची गवाहान में मेरा नाम नही है। क्यों
नाम नही है इसकी वजह मैं नही बता सकता इस
सम्बंध मंे विवेचक ही बता सकता है। कार्यालय में
एक हेड मुंशी और मैं था। तहरीर मुझको वादी मुकदमा ने
दी। तहरीर फर्द में जिनका-जिनका नाम अंकित है
सभी लोग उपस्थित हुए थे। मैंने जो लोग आये थे
उनका परिचय लिया था उसमें से कितने
लोग ऊपर के अधिकारी थे जी0डी0 देखकर बता
सकता हूँ। इस प्रक्रिया में मुझे दस मिनट का समय
लगा था। मालखाने का प्रभार हेड मोहर्रिर मालखाने
के पास होता है। मैंने जी0डी0 कायमी करके हेड
मुंशी को दिया था। हेड मुंशी और हेड मोहर्रिर माल
खाना दोनों एक ही व्यक्ति था। हेड मुंशी का नाम
कन्हैयालाल था। बरामद माल हेड मुंशी ने मालखाने
में जाकर रख दिया। माल मुकदमाती का विवरण
जी0ड0ी में भी होता है और मालखाने के रजिस्टर मंे भी
होता है। मैंने बरामद माल को जी0डी0 में दर्ज कर
लिया फिर उसके पश्चात हेड मुंशी कन्हैयालाल
ने माल खाना रजिस्टर में दर्ज कर लिया होगा।
कायमी मुकदमा में ही बरामद माल का इन्द्राज
जी0डी0 में ही कर दिया जाता है। कायमी जी0डी0 में ही
मुल्जिमानों का भी इन्द्राज कर दिया जाता है। मैं यह
नही बता सकता कि हेड मुंशी ने माल खाना
रजिस्टर में माल मुकदमाती का इन्द्राज मेरे
सामने किया था या नहीं। यह कहना गलत है कि
समस्त कार्यवाई पुलिस लाइन मंे बैठकर की गई।
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जिरह वास्ते खालिद मुजाहिद, द्वारा श्री मो0 शुऐब
एडवोकेट
    मैंने माल मुकदमा सर्वमुहर, नमूना मुहर, हेड मुंशी
को देते हुए मुल्जिमानों को लाकअप में भेजा
                    कृ0प0उ0   (3)
ST 310/08
सरकार वि0 मो0 खालिद
मुजाहिद व अन्य
PW - 2
03-06-09
चिक मंे फर्द बरामदगी नत्थी किया। फर्द बरामदगी मैंने
हेड मुंशी को नहीं दिया।
                सुनकर तस्दीक किया।
प्रमाणित किया जाता है कि
गवाह द्वारा जिला कारागार स्थित
खुले न्यायालय में जो बोला गया
उसे न्यायालय द्वारा बोलने पर
पेशकार द्वारा अंकित किया गया।         ASJ/Court No.5

ASJ/Court No.5
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