रविवार, 28 सितंबर 2014

गवाह -----------------3

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ST No. 310/08
    सरकार             मो0 खालिद मुजाहिद
व एक अन्य
PW - 3
28-07-09
    श्री राजेश कुमार भ्ब् बम डिस्पोजल
स्कावार्ड 32 बटालियन च्।ब्  लखनऊ
ने सशपथ पूर्वक बयान किया कि
मैं दिनांक 13़.3.08 को बम डिस्पोजल
टीम के साथ जिसमें मेरे अलावा हे का0
दिनेश कुमार का0 अशोक कुमार का0 रघुबीर सिंह
का0 अजय मलिक का0 अरविंद सिंह व आरक्षी
चालक विनोद कुमार पाण्डेय मय वाहन
सं0 UP 32 / A / 0568 समय  14.40 बजे
कोतवाली बाराबंकी आया। उस समय मैं
लखनऊ में बस डिस्पोजल टीम में 32 PAC
लखनऊ में तैनात था।
    उपरोक्त चालक के अतिरिक्त उपरोक्त
सभी साथी मेरे मातहत थे जो मेरे साथ
काम करते थे मैंने नेशनल सेक्योरिटी
गार्ड मानेसर हरियाणा से B.D.D. (बम
डिस्पोजल एण्ड डिडम्सन) का प्रशिक्षण प्राप्त
किया है। मेरी टीम के उपरोक्त सभी लोगों
ने उपरोक्त प्रशिक्षण प्राप्त किया है मैंने
टीम के उपरोक्त सदस्यों को साथ मे
PW - 3

कार्य करने के कारण लिखने पढ़ते देखा
है। मैं उन लोगों के लेख व हस्ताक्षर करते
देखा है।
    मैं इसी मुकदमें से सम्बंधित माल
मुकदमा को विस्फोटक पदार्थ के डिस्पोजल
हेतु आया था। इसके बाद हम लोगों के
कोतवाली आने के बाद उपरोक्त मुकदमें
के विवेचक श्री राजेश कुमार श्रीवास्तव थाना
कोतवाली आये दीवान जी ने उपरोक्त मुकदमें
से सम्बंधित माल विस्फोटक डिप्टी साहब
IO  श्री राजेश कुमार श्रीवास्तव को मेरे
समक्ष दिया। जो सील था नमूना मोहर
लगा था। फिर IO साहब ने वही थाना
कोतवाली बाराबंकी में खोला हम लोगों
के समक्ष। मैंने विवेचनाधिकारी से कहा
था कि थाने में डिस्पोजल करना ठीक नहीं
है किसी खुले स्थान पर किया जाए। जो
माल डिस्पोजल हेतु था उसके अतिरिक्त
शेष माल वहीं थाने पर सील कर रख
दिया गया था। और विस्फोटक सामग्री को
थाने से करीब 1 किलोमीटर हैदरगढ़ बाई
पास ले जाया गया था। जब हम विस्फोटक
सामग्री को साथ ले गये थे तम हमारी टीम (4)

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तो0 मेरे समक्ष IO उपरोक्त ने उक्त मुकदमें
से सम्बंधित माल मालखाने से प्राप्त करने
के सम्बंध में फर्द वास्ते रिफ्यूज एक्सप्लेस्टि
मुकदमा अ0सं0 189/2007 थाना कोत0 बाराबंकी
कागज सं0 अ-22 मेरी मौजूदगी में IO 
साहब ने तैयार किया था पढ़कर मैंने उस
पर अपने हस्ताक्षर बनाये थे। गवाह
ने पत्रावली में शामिल कागज सं0 अ-22
पढ़कर तैयार करने की बात कही फर्द
पर अपने हस्ताक्षर की शिनाख्त की जो
कागज सं0 अ-22 पर बने हैं। निष्क्रिय
करने के उपरोक्त हम लोग वापस कोतवाली
आये प्रदर्श को IO  के सुपुर्द किया। फिर
वहां से वापस चले गये।
    विवेचक उपरोक्त ने मुझे पूछतांछ की थी।
X        X         X           X
by defence Sri  रणधीर सिंह
                सुमन एडवोकेट
                वित अभियुक्त तारिक काजमी 
मुझे विभागीय आदेश पत्र मिल था मुझे
कमान्डेंट द्वारा आदेश मिला था। कमान्डेंट ने
मुझे मुख्यालय के आदेश की प्रति व अपने आदेश
की प्रति दी थी। इसके अतिरिक्त मुझे कोई आदेश
या पत्र नहीं मिला था। आदेश मिलने के छः
दिन बाद दिनांक 13.3.08 मैं आया था
थाना कोतवाली बाराबंकी नगर।
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PW - 3

इस केस के सम्बंध में आदेश मिलने के
पश्चात व थाना कोतवाली आने से पहले
मुझसे कोई अधिकारी इसके सम्बंध में
नहीं मिला था मैं अपनी वाहिनी से लगभग
12 बजे निकला था रास्ते में मैंने ही थाना
को कोतवाली को मोबाइल से फोन किया
था मैंने सरकारी नम्बर पर सम्पर्क किया
होगा क्योंकि वही सरकारी नम्बर हम लोगों
के पास होता हैं इस समय नम्बर की
जानकारी नहीं बता सकता पता करके
बता सकता हूँ। उस दिन मैंने नम्बर किसी
से पता नहीं किया था बल्कि हमारे पास की
लिस्ट में लिखा था। मैंने नहीं बता
सकता कि मैंने कितने बजे फोन किया था
मैं 2 बजकर 40 मिनट पर थाना कोतवाली
पहुंचा था। थाना कोतवाली पहुंचने पर
वहा दीवान जी और एक दरोगा जी व स्टाफ
के कई लोग बैठे थे। मैंने कोतवाली में
Dy SP  श्री राजेश कुमार श्रीवास्तव को पत्र दिखाया
था। उन्होने मुझे लिखित आदेश दिया था
फिर CO साहब ने मेरे सामने डिस्पोजल से
सम्बंधित सारे पैकेट खोले थे। मैंने स्वयं
कोई पैकेट नहीं खोला था यह सम्पूर्ण
बम डिस्पोजल कार्य वही शाम 4 बजे समाप्त
कर दी थी।
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मेरा बयान CO ने उसी दिन बयान लिया था
जिस दिन डिस्पोजल किया था उसके बाद
मेरा बयान नहीं लिया गया। CO  साहब ने
इतना लम्बा बयान नहीं लिया था जितना
इस समय अदालत में बयान दे रहा हूँ 
CO साहब ने मेरा बयान कोतवाली में
लिया था। मेरा बयान लिखकर CO साहब
ने लिया था। उस पर दस्तखत भी कराये थे
स्वयं कहा कि दस्तखत फर्द पर कराये था
या किसी अन्य कागज पर मुझे नहीं मालूम।
मैंने न्यायालय में उस कागज को पढ़ा है
मैंने डिस्पोजल किये गये माल को मौके पर
पैकेट में रखा था किन्तु उसे सील कोतवाली
में किया था। मैं विस्फोटक पदार्थ कि तीव्रता
नहीं बता सकता इसलिए वह विधि विज्ञान
प्रयोग शाला भेजा जाता है।
    यह कहना गलत है कि मैंने डिस्पोजल
की कोई कार्यवाही न की हो। यह भी कहना
गलत है कि मैंने CO  के दबाव में सारी
कार्यवाही थाने में बैठकर की है। यह कहना
गलत है कि कुछ अधिकारियों out of turn
प्रमोशन पाने के लिए मुझसे फर्जी कार्यवाही
कराई हो।
X X X X X X X X
  by sri Mohd. Suab Adv. for
            occusd Mohd. Khalid
---------------NIL------------------------मौका दिया गया।
                सुनकर तस्दीक किया।
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