गुरुवार, 2 अक्तूबर 2014

चिरंजीव नाथ सिन्हा पुलिस उपाधीक्षक लखनऊ का सशपथ बयान--------गवाह -----------4----------जारी--------5

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चिरंजीव नाथ सिन्हा, पुलिस उपाधीक्षक
एस0टी0एफ0 लखनऊ ने सशपथ
बयान किया कि-
    दिनांक 25.02.2010 से
आगे- गवाह को पुनः शपथ
दिलायी गयी सशपथ बयान किया
कि-जहां तक मुझे याद है
कि दिनांक 25.02.10 को एक
काले रंग का बैग, दो दातून
जरूरी इस्तेमाली कपड़े, एक
मदनी पाकेट डायरी उसमें रखा
रोडवेज बस का टिकट, साइकिल
साइकिल या मोटर साइकिल स्टैण्ड
की पर्ची, 100-100 रूपये के
तीन नोट, एक चाभी का गुच्छा
जिसमें एक बड़ी चाभी व एक
छोटी चाभी थी आदि थे मुझे
इतना याद है और के बारे में मैं
नहीं बता सकता फिर याद करके
बताया कि एक मोबाइल फोन
सिम के साथ था।
    यह कहना गलत है कि
दिनांक 25.02.2010 को खोले
गये बण्डल में मोबाइल का सेट
व चाभी का गुच्छा न रहा हो।
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    घटना वाले दिन रेलवे
स्टेशन के बाहर सड़क पर निकलने
के बाद माल गोदाम रोड के मोड़
पर कोई चाय की दुकान थी या
नहीं मुझे याद नही है मुझे इस समय
याद नही है कि बाहर निकलने पर
सड़क के किनारे होटल थे या नही
इन्हें जिस समय मुझे मुल्जिमानों को
दिखाया मुखबिर ने उस समय मेरी
पीठ स्टेशन की तरफ और मुंह
रोड की तरफ था रेलवे स्टेशन पर
आकर रिक्शे से मुल्जिम उतर रहे
थे उसी समय मुखबिर ने बताया
स्टेशन से बाहर प्रांगण में रोड
से अन्दर प्रांगण में आते हैं।
जहंा उतरे वही पर नहीं पकड़ा
फैजाबाद जिला कचहरी एक
दूसरे मुकदमें में ये दोनों
मुल्जिम अन्य मुल्जिमान के साथ
मुल्जिमान है के विरूद्ध मैंने
गवाही दी है। उस न्यायालय में
मैंने दोनों मुल्जिमान के गिरफ्तारी
के सम्बंध में बयान दिया है
जब ये रिक्शे से उतरे तो मुझे
लगा कि ये लोग किसी का इन्तजार
कर रहे हैं उसके बाद मैं आगे
बढ़कर पहले अपना परिचय दिया
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फिर इनको रूकने के लिए कहा
जिस समय हमने इनको रूकने
के लिए कहा इनके और हमारे
बीच 2-3 कदम का फासला था
जिस समय मैंने उनको रोका व
परिचय दिया मेरे हमराहियान
मेरे साथ ही थे। रिक्शे से उतरकर
ऐसा मुझे लगा कि ये लोग किसी
इंतजार कर रहे है और अचानक
अपना बैग उठाकर मुख्य सड़क
पर तेज कदमों से बढ़े हमारे परिचय
देने से पहले ये तेज तेज कदम
से चले थे जिसको मैं भागना
नहीं कहूंगा। हमारे परिचय देने
व इनको रोकने के बाद भी तेज
कदमों से चले थे को मैं माशूना
कहूंगा क्योंकि उनकी स्पीड
तेज थी। मेरे साथ मेरी टीम के
अन्य सदस्य थे उनकी मदद
से इन दोनों मुल्जिमान को पकड़ा
गया था क्योंकि ये लपटा
झपटी करने लगे इसलिए
सभी ने मिलकर इनको पकड़ा
है। ऐसी स्थिति में मैं नही बता
सकता हूँ कि किस मुल्जिम को
मेरी टीम के किस सदस्य द्वारा
मेरे द्वारा पकड़ा गया है।
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अस्तू खुद कहा कि क्योंकि
ये लोग जान माल से मारने
की धमकी देने लगे। मेरे साथ
लपटा झपटी कर रहे थे फिर
कहा कि सभी के साथ कर रहे थे
घटना के दिन बाराबंकी रेलवे स्टेशन
पर जी0आर0पी0 थाना था या
नहीं इसकी मुझे उस समय जानकारी
नही थी। घटना के दिन समय
बाराबंकी रेलवे स्टेशन पर जी0आर0
पी0 थाना था या नही इसकी मैंने
जानकारी करने की कोशिश नही की।
खुद कहा कि इतना समय ही नहीं था।
अगर जी0आर0पी0 थाना परिसर
के क्षेत्राधिकार में हुई घटना की
सूचना जी0आर0पी0 थाने में दर्ज
करायी जायेगी। घटना के दिन
घटना घटित होने के उपरांत मैं
सुनिश्चित हो गया था कि ये
घटना रेलवे के जी0आर0पी0
थाने के क्षेत्राधिकार में नही हुई है।
जिस समय गिरफ्तारी की गयी
थी हल्का उजाला हो गया था
मुझे इस समय याद नही है कि
उस वक्त स्ट्रीट लाइट जल रही थी
या नही। जिस समय घटना
घटित हुई उस समय 15-20
कदम आराम से देख सकता था।
   (48)

बाकी तीनों टीमें अभियुक्तों को
पकड़ने के बाद तुरन्त ही आ गयी
थी। पकड़ने पर लपटा झपटी व
शोर शराबा पर अन्य टीमे मौके
पर आ गयी थी बाकी तीनांे टीमें
लगभग एक साथ आ गयी थी।
गिरफ्तारी व कार्यवाही होने के
बाद गाडि़या कितने देर बाद
आ गयी थी कितने मिनट के बाद
आयी थी यह मैं नही बता सकता।
इस समय याद नही है कि
सभी गाडि़यों को मगवाने
के लिए ड्राइवर को फोन किया
गया था या नही।
    दिनांक 29.3.10 के लिए
स्थगित जिरह दोनों पक्षों
की सहमति से जिरह लगातार
                सुनकर तस्दीक
                किया।
         ASJ Court No 7
                09/3/10
प्रमाणित किया जाता
है कि बयान मेरे
बोलने पर पेशकार
द्वारा लिखा गया।
            ASJ Court No 7
                09/3/10
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