गुरुवार, 2 अक्तूबर 2014

चिरंजीव नाथ सिन्हा पुलिस उपाधीक्षक लखनऊ का सशपथ बयान--------गवाह -----------4----------जारी---------4

(38)
  PW4
    25-12-10
चिरंजीव नाथ सिन्हा पुलिस उपाधीक्षक
एस0टी0एफ0 लखनऊ ने सशपथ
बयान किया कि-
    अभियुक्त मो0 तारिक कासमी
की ओर से मो0 शुऐब अधिवक्ता द्वारा
    उपाधीक्षक धनंजय मिश्रा
द्वारा सील लगायी थी आज सील
मेंS.I. UPP लिखा है। बन्डल
की सिलाई घटनास्थल पर धनंजय
द्वारा एवं मेरी टीम के सहयोगी का0
नीरज पाण्डेय द्वारा किया गया। इस
स्तर पर विद्वान अधिवक्ता अभियोजन
पक्ष एवं बचाव पक्ष की ओर
धनंजय मिश्रा एवं धनंजय सिंह
का है इस स्तर पर उनके सर
नेम में विवाद हुआ नाम अभिलेख
बाद तथ्य है जो अभिलेखीय साक्ष्य
से निर्णीत किया जा सकेगा। यह कपड़ा
किनारे नुचा हुआ है।
    To court कपड़ा एक स्थान पर नुचा
हुआ है।
    इस कपड़े का एक किनारा सिला हुआ
है और दूसरा किनारा फाड़ा गया गलता है।
यह सूती कपड़ा सफेद है चादर का हिस्सा है
या नही मैं नही बता सकता हूँ। सूती कपड़ा
सफेद पुराना है। यह कहना गलत है कि यह
बैग इस्तेमाली न हो। यह कहना गलत है
कि टोपी इस्तेमाली न हो लेकिन यह धुली
नही है।
 (39)

दो रंगीन कुर्ते सफेद कुर्ते से लम्बाई
में करीब 5-6 इंच बड़े (लम्बे) है।
यह बनियाइन रूपा कम्पनी की है जो 90 सेमी
की है। यह बनियान सैण्डो है।
    दूसरी बनियान सफेद है जो हाफ
आस्तीन की है।
    दोनों बनियाइन साइज में बराबर है।
    जांघिया एक ग्रे (स्लेटी) रंग की है एक स्काई
ब्लू (आसमानी) है, स्काई ब्लू जांघिया थी कमर
दूसरे वाले जांघिया से थोड़ी सी हल्की सी
छोटी है करीब 3 अंगुल की छोटी बड़ी
इलास्टिक से नापने पर है। होलो
जांघिया पुरानी इस्तेमाली फटी हुई है।
ग्रे रंग का मतलब आसमानी रंग से है।
दोनांे दातूनों पर उनके एक सिरे पर
कूंची बनी है।
    मैं डायरी के कवर पर अंग्रेजी में लिखा
हुआ मदनी डायरी 2007 पढ़ सकता हूँ।
    इस डायरी में ज्यादातर हस्तलेख
व छपाई में उर्दू में लिखा हुआ
है। डायरी में ज्यादातर तथ्य उूर्द में
लिखे हैं मुझे उर्दू नही आती है
अतः नही बता सकता हूं कि
उर्दू भाषा में कोई आपत्तिजनक
बात लिखी है या नही। खुद कहा
कि पेज नं0 82 व 83 पर अंग्रेजी
में एक जगह जेहाद लिखा
है जेहाद को मैं आतंकवादी
संगठन के तहत आपत्तिजनक शब्द
लगता है। बाद में उस शब्द को
पढ़ा गया तो A Clear View of
Jehad  लिखा मिला। उस समय
 (40)

इतना वक्त नही था कि डायरी में
उक्त लेख किसके हस्तलेख में है
जानने की कोशिश करता।
    जेहाद का अभिप्राय इस्लामी
आतंकवादी संगठनों द्वारा भारत राष्ट्र
के विरूद्ध इस राष्ट्र के नौजवानों
को गुमराह कर भारत में आतंकवादी
उपायों द्वारा इस्लामिक राष्ट्र की स्थापना
करना है। हूबहू नहीं बल्कि इससे
मिलता जुलता तथ्य मैंने FIR  में भी
लिखा है। बाबू भाई व नौशाद आदि
से सम्बंधित आतंकवादी केस की
विवेचना मैंने की इसकी घटना थाना
वजीरगंज लखनऊ की है उस केस
की FIR  मैंने पढी थी। मैं नही बता सकता
कि बाबू भाई नौशाद के FIR में जो
तथ्य लिखे हैं वही इस मुकदमें के FIR
में हूबहू लिखा गया है।
    यह कहना गलत है कि हम
पुलिस वालों को एक कोई माडल
FIR  उपलब्ध करा दी गयी है और
उसी का इस्तेमाल हर जगह करते
हो।
    टिकट में (रोडवेज) संख्या 4799009 में
गवाह से पूछने पर गवाह ने बताया
कि वाराणसी से जो पढ़ने में आ रहा
है उसके बाद कुछ लिखा है लेकिन
पढ़ा नहीं जा रहा है। इस टिकट पर कोई
तारीख नहीं पड़ी है, इस टिकट पर बस संख्या
नहीं लिखी है लेकिन 35 किराया कालम
में कारबन में लिखा है।
       (41)

उ0रे0 साइकिल स्टैण्ड कैन्ट वाराणसी
का टिकट सं0 030719 पर गाड़ी मेक के
रूप में स्प्लेण्डर लिखा है तथा गाड़ी के
नम्बर के रूप में ।A/F  लिखा है। इस
टिकट पर गाड़ी के नम्बर व मेक का
कोई कालम अंकित नही है। इस टिकट
पर अंग्रेजी में 16 Dec 2007 की मुहर
लगी है।
    मैंने फर्द बरामदगी में लिखे गये
100-100 के तीन नोट नोटों पर लिखी
क्रम संख्या नही लिखी है। उपरोक्त
नोट तारिक कासिमी के पास से उसके
कुर्ते के जेब से बरामद हुये थे। इस
वक्त यह याद नही कि कुर्ते की
किस जेब से बरामद हुये थे।
डायरी भी तारिक कासिमी के कुर्ते
के जेब से बरामद हुयी यह याद
नही कि कुर्ते के किस जेब से
डायरी बरामद हुयी। नमूना मोहर
मौके पर तैयार किया था। कागज
संख्या अ-31 मेरा नमूना मोहर नही
है बल्कि इस केस के विवेचक
श्री राजेश कुमार श्रीवास्तव का है।
    इस समय पत्रावली पर मेरी
बनाई हुई नमूना मोहरे नही है।
रेलवे स्टेशन बाराबंकी के बाहर रोड
पर स्टेशन की ओर मुंह कर
खड़े होंगे तो माल गोदाम दाहिने
हाथ पड़ेगा। उस जगह से करीब
20-25 कदम दूरी पर माल गोदाम
रोड पर टीम खड़ी थी।
  (42)

माल गोदाम की ओर खड़ी टीम
किस गाड़ी से थी उनका वाहन संख्या
क्या था मुझे याद नहीं है।
    सभी गाडि़यों को टीमें उतरने के 
बाद दूर खड़ा कर दिया गया था मैं नही
बता सकता कि टीम उतारने के बाद
गाडि़या कहां खड़ी थी क्योंकि ड्राइवरो
को टीम उतारने के बाद गाडि़या दूर
खड़ा करने का निर्देश दिया गया
था। चारो टीमे बस स्टैण्ड से रेलवे स्टेशन
अपनी अपनी गाडि़योंसे एक साथ
आयी थी। चारो टीमे स्टेशन पर
अपनी-2 गाडि़यों से उतरी थी। स्टेशन
के बाहर जो चैराहा है गाडि़यों ने चारों
टीमों को उतारा था। रेलवे स्टेशन की
बिल्डिंग ओर मुंह कर खड़े होने पर
चैराहे पर टीमे उतारी गयी थी। से
30-35 कदम की दूरी पर टीम खड़ी
थी। पुलिस लाइन की ओर खड़ी टीम
चैराहे से 20-25 कदम पर खड़ी
थी। रेलवे स्टेशन से बाहर आने का
मुझे मुख्य रास्ता ही याद है।
    जहंा अभियुक्त को गिरफ्तार
किया गया वह स्थान रेलवे का है
या नही, मैं नही बता सकता।
    स्टेशन से बाहर निकलते ही जो
चैराहा है माल गोदाम रोड की ओर
मुड़ते ही ठीक Left Engle पर बरामदगी (43)

हुयी थी। मैं नही बता सकता कि जिस
स्थान पर मैंने बरामदगी/गिरफ्तारी की
थी के बगल में आज चाय की दुकान
है या नही। स्टेशन से निकलते दाहिनी
ओर बंकी रोड है। जिसके कोने पर अखबार
बेचने वाला बैठा था या नही मैं नही बता
सकता।
                सुनकर तस्दीक
                किया।
               ASJ Court No 7
                    BBK
                25/2/2010
आज बयान मेरे
द्वारा खुले न्यायालय
में बोलने पर मेरे
आशुलिपिक द्वारा
अंकित किया गया
ASJ Court No 7
                    BBK
                25/2/2010
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