शुक्रवार, 3 अक्तूबर 2014

राजेश कुमार श्रीवास्तव पुलिस उपाधीक्षक -------------गवाह ------------8------जारी--9

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गवाह राजेश कुमार श्रीवास्तव ने आज दिनांक
05.04.13 को सशपथ बयान किया
for accured tariq quazmi-shuhaib adv.
A.D.G.  कानून व्यवस्था से मेरी विवेचना के बारे में कोई बातचीत नहीं हुई। इस केस के सम्बंध
में मैंने मुल्जिमानों का कोई बयान नही लिया आई डी
एसएके website से उशीत पत्र Huzia ofter
the death of india chief written by T.
Klushsher singh   दिनांक 13.2.08 तथा SATP
की ucbside  से उर्धित प्रपत्र हूजी मेरे द्वारा इस
विवेचना के अन्तर्गत तथा जनपद फैजाबाद
में मु0अ0सं0 3398/07 थाना कोतवाली
जनपद फैजाबाद एवं मु0अ0सं0 547/07
थाना वजीरगंज जनपद लखनऊ की विवेचना
में दाखिल किया गया। मेरी इस विवेचना
अन्यथा किसी अन्य सन्र्दीा में आफताब
आलम अंसारी से कोई बात नही हुई।
मेरे द्वारा आफताब आलम अंसारी के किसी
अन्य नाम के बारे में विवेचना के अन्तर्गत
जानने का प्रयास नहीं किया गया। विवेचना
के अन्तर्गत आफताब आलम अंसारी को
UPSTF  द्वारा किस अभियोग में गिरफ्तार
किया गया इसकी जानकारी मेरे द्वारा की
गई थी। आफताब आलम अंसारी की
गिरफ्तारी मु0अ0सं0 547/07 थाना वजीरगंज
जनपद लखनऊ के प्रकरण में UPSTF

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द्वारा पश्चिम बंगाल पुलिस के सहयोग से
की गई थी। मु0अ0सं0 547/07 वजीरगंज जनपद
लखनऊ की अग्रिम विवेचना मेरे द्वारा की
गई थी। उक्त विवेचना के अन्तर्गत पूर्व
विवेचक द्वारा आफताब आलम अंसारी का
नाम राजू उर्फ मुख्तार बताया गया था किन्तु
उसकी पुष्टि स्वयं उनके द्वारा विवेचना में
नहीं की गई। मेरे द्वारा मु0अ0सं0 1891/07
थाना कोतवाली जनपद बाराबंकी की एफ0आई0आर0
पढ़ी हैं प्रथम सूचना
रिपोर्ट में अंकित मुख्तार उर्फ राजू वह व्यक्ति
नही है जिसे UPSTF  द्वारा पश्चिम बंगाल
पुलिस के सहयोग से आफताब आलम
अंसारी के नाम से गिरफ्तार किया गया था
मु0अ0स0ं 547/07 की पत्रावली मेरे सामने
नहीं है, इसलिए मैं नही बता सकता कि
आफताब आलम अंसारी को मात्र इसी
आधार पर कि उसका नाम मुख्तार उर्फ
राजू नहीं है, छोड़ दिया हो। मेरी जानकारी में
यह है कि आफताब आलम अंसारी को
मु0अ0सं0 547/07 में पूर्व विवेचक द्वारा
169 सीआरपीसी की रिपोर्ट लेकर रिहा करा
दिया गया था। एसएटीपी की वेबसाइड से
उचित 28.12.07 पर दिये गये timeline
पर अंकित विवरण की अग्रिम जांच मेरे
द्वारा नही की गई। मु0अ0सं0 1891/07 कोतवाली
बाराबंकी की विवेचना के अन्तर्गत
मुख्तार उर्फ राजू की जानकारी
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करने के प्रयास किये गये थे किन्तु विवेचना
के मध्य इस दिशा में कोई प्रगति नही की
जा सकी। विवेचना के अन्तर्गत प्रथम सूचना
रिपोर्ट में अंकित वाक्य ‘‘हेजाजी के निर्देश
पर मुख्तार द्वारा दिया गया विस्फोटक लेकर
यहा आए थे जिसे गुरू लेजाकर तैयार करता
गुरू आने वाला था हो सकता है आप लोगों
को देखकर हम लोगों के पास नही आया’’ का
अवलोकन मेरे द्वारा किया गया था। मेरे
द्वारा गिरफ्तारी करने वाली टीम से यह पूछतांछ
नही की गई कि उनके द्वारा गुरू की तलाश
की गई या नही। मेेरे द्वारा विवेचना के अन्तर्गत
गुरू के बारे में जानकारी करने का प्रयास
किया गया किन्तु तथ्यपरक विवरण न होने के
कारण अग्रिम प्रगति नही की जा सकी।
मेरे द्वारा हैजाजी का पता लगाने का प्रयास
किया गया तथा उसके बारे में तथ्यपरक विवरण
संकलित किये गये। हैजाजी के सम्बंध में
विवरण मु0अ0सं0 547/07 वजीरगंज लखनऊ में
गिरफ्तार किये गये अभियुक्त सज्जादुर्रहमान-1
के कथन में विस्तार से आया जिसके उसके
द्वारा प्रयोग किये जाने वाले मोबाइल फोन
का भी विवरण दिया गया था। मेरे संज्ञान
में उक्त तथ्य विवेचना ग्रहण करने के
उपरांत केस डायरी के अवलोकन से
पहली बार संज्ञान मंे आये।
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मुझे यह याद नही कि सज्जादुर्रहमान द्वारा
यह जानकारी विवेचक को किस तारीख को
दी गई। विवेचक को दिये गये कथन में
सज्जार्दुरहमान ने हैजाजी का फोन नं0
बताया था जो मुझे पूछताछ याद नही है उसके
अंतिम तीन अंक 203 है। फोन नं0 पत्रावली
को देखकर बता सकता हूँ। मेरे द्वारा पूर्व
विवेचक से यह नहीं पूछा गया कि उन्होंने
हैजाजी से उसके फोन पर बात करने
का प्रयास किया अथवा नहीं। मेरे द्वारा
उस नम्बर पर कभी भी हैजाजी से बात
करने अथवा उसका लोकेशन जानने का
प्रयास नही किया गया। मेरे द्वारा हैजाजी
की मृत्यु के उपरांत उसके सम्बंध में
विवरण देने के लिए जम्मू कश्मीर पुलिस
से सम्पर्क किया गया। हैजाजी की मृत्यु
की सूचना मुझे कन्ट्रोल रूम के माध्यम
से जिसका कार्य आतंक से सम्बंधित
आंकड़ों को संग्रहित एवं व्यवस्थित करना है
उसके द्वारा प्राप्त हुई। यह कन्ट्रोल रूम
केन्द्र सरकार के अधीनस्थ समस्त राज्य
सरकारों के सहयोग से चलाया जाता है
जिसके माध्यम से आपरेशनल एवं विवेचना
कार्यो में नियुक्त अधिकारियों को सूचनाएं
उपलब्ध कराई जाती हैं कन्ट्रोल रूम में
हैजाजी के सम्बंध में सूचना देने के लिए
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मेरे द्वारा पूर्व में अनुरोध किया गया था
जिसके परिपेक्ष्य में यह सूचना उनके द्वारा
मुझे दी गई। कन्ट्रोल रूम से कोई
सूचना प्रोटेक्टेड वेबसाइड में  incurruption
documets के द्वारा ही प्राप्त की जाती है।
इसकी कोई लिखित या मौखिक सूचना
नहीं दी जाती है। विवेचना के अन्तर्गत
इस प्रकार से मुख्तार उर्फ राजू तथा गुरू
के बारे में सूचना प्राप्त नही हो सकी।
हैजाजी के सम्बंध में मेरे द्वारा अग्रिम
विवेचना की गई तथा इसके लिए पुलिस अधीक्षक
किश्तवाड़ को मेरे द्वारा अग्रिम विवरण दिये जाने
हेतु फैक्स एवं पत्र के माध्यम से अनुरोध
पत्र भेजा गया। एस0पी0 किश्तवाड़ द्वारा मेरे
द्वारा प्रेषित अनुरोध पत्र के सम्बंध में हैजाजी
के सम्बंध मंे पंजीकृत प्रथम सूचना रिपोर्ट
02/2008 थाना छतरू जनपद किश्तवाड़ से
सम्बंधित प्रथम सूचना रिपोर्ट की प्रति द्वारा
फैक्स प्रेषित की गई। इसके अतिरिक्त उनके द्वारा
31.7.08 को उनके पत्र सं0 सीआरबी/02/08/छतर
84 दिनांकित 31.07.08 द्वारा हैजाजी के पास
बरामद मोबाइल फोन नोकिया 1110 के आईएमईआई नं0
354531/01/478533/0 तथा उसमें लगे
सिम नं0 89415505008120564 की
सूचना प्रदान करते हुए उक्त अभियोग के
वादी तथा घटनाक्रम में शामिल लोगों के नाम
उपलब्ध कराये गये।
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इसके उपरांत उनके द्वारा घटनाक्रम के वादी
एवं अन्य साक्षियों के मोबाइल नं0 तथा मेरे
अनुरोध पर वहां के न्यायालय से उक्त
अभियोग से सम्बंधित न्यायालय प्रमाणित
पत्र भी उपलबध कराये गये। एस0पी0 किश्त-
-वाड़ द्वारा न्यायालय प्रमाणित प्रपत्र किस तिथि को
उपलब्ध कराये गये मुझे याद नही है। इस
अभियोग में अंतिम आरोप पत्र मेरे द्वारा
दिनांक 23.07.08 को माननीय
न्यायालय में दाखिल किया गया। एस0पी0
किश्तवाड़ द्वारा हैजाजी के विरूद्ध पंजीकृत एफ0आई0आर0
की प्रमाणित प्रतिलिपि 23.07.08 के पूर्व मेरे
द्वारा दाखिल की गई। इसके अतिरिक्त अन्य
प्रपत्र 23.07.08 के पश्चात प्राप्त होने
के कारण अग्रिम विवेचना में शामिल
किये गये। 23.07.08 के बाद दाखिल प्रपत्र एस0
पी0 किश्तवाड़ द्वारा हैजाजी के पास से बरामद किये
मोबाइल फोन नोकिया 1110 के आईएमईआई तथा उस पर
लगे सिम नं0 एवं न्यायालय द्वारा प्रमाणित मु0
आ0सं0 2/2008 थाना छतर जिला किश्तवाड़ की
एफ0आई0आर0 पुलिस रिपोर्ट की न्यायालय प्रमाणित प्रति
दाखिल की गई। रिकवरी मेमों मिला था। एफ0आई0आर0
व रिकवरी मेमो देवनागरी लिपि से भिन्न लिपी
मंे थी मैं यह नही बता सकता कि यह फारसी
लिपी में थे या नही। जो मूल एफ0आई0आर0 व रिकवरी
मेमो एस0पी0 किश्तवाड़ द्वारा भेजा गया था।
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वह देवनागरी लिपि से भिन्न होने के कारण
मैं खुद नही पढ़ सकता था। उक्त एफआईआर
व रिकवरी मेमो को समझने के लिए मेरे
द्वारा तत्कालीन पुलिस महानिरीक्षक जोन
लखनऊ में नियुक्त उर्दू अनुवादक श्री मोहम्मद
आदिल को बुलाकर उनसे एफ0आई0आर0 व रिकवरी
मेमो पढ़वाया गया तथा उनके द्वारा हिन्दी
में अनुसाद करके मुझे बताया गया। इसके
अतिरिक्त मेरे द्वारा तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक
किश्तवाड़ श्री बिहारी लाल शर्मा, उपनिरीक्षक
कुलदीप सिंह तथा पुलिस उपाधीक्षक लियाकत
अली जो उसी किश्तवाड़ क्षेत्र के प्रभारी थे।
उनसे दूरीााष पर वार्ता करके एफ0आई0आर0 व
रिकवरी मेमों को समझा गया। रिकवरी
मेमो का देवनागरी अनुवाद मैंने दाखिल नहीं
किया है। छतर थाने का मु0 नं0 02/2008
अन्तर्गत धारा 307 रणवीर पेनल कोड तथा 7/27
आम्र्स एक्ट पंजीकृत था। रिकवरी मेमो के
अन्तर्गत आतंकवादी का राम बशीर अहमद कोड
अंकित है। उक्त रिकवरी मेमो में मोबाइल फोन
का नं0 अंकित नही है केवल माडल नम्बर का
उल्लेख है। माडल 1110 नोकिया है। रिकवरी
मेमो के अन्तर्गत इसके आईईएमआई नं0 का उल्लेख
नही है। मोबाइल फोन के सिम का उल्लेख
रिकवरी मेमो में नही है।
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