पुलिस लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
पुलिस लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

बुधवार, 6 फ़रवरी 2013

औरतें



कुछ औरतों ने
अपनी इच्छा से
कुएं में कूदकर जान दी
थी,
ऐसा पुलिस के रिकार्डों में दर्ज है।
और कुछ औरतें
चिता में जलकर मरी थीं,
ऐसा धर्म की किताबों में लिखा है।


मैं कवि हूं,
कर्ता हूं,
क्या जल्दी है,
मैं एक दिन पुलिस और पुरोहित,
दोनों को एक ही साथ
औरतों की अदालत में तलब करूंगा,
और बीच की सारी अदालतों को
मंसूख कर दूंगा।


मैं उन दावों को भी मंसूख कर दूंगा,
जिन्हें श्रीमानों ने
औरतों और बच्चों के खिलाफ पेश किया है।
मैं उन डिग्रियों को निरस्त कर दूंगा,
जिन्हें लेकर फौजें और तुलबा चलते हैं।
मैं उन वसीयतों को खारिज कर दूंगा,
जिन्हें दुर्बल ने भुजबल के नाम किया हुआ है।

मैं उन औरतों को जो
कुएं में कूदकर या चिता में जलकर मरी हैं,
फिर से जिंदा करूंगा,
और उनके बयानों को
दुबारा कलमबंद करूंगा,
कि कहीं कुछ छूट तो नहीं गया!
कि कहीं कुछ बाकी तो नहीं रह गया!
कि कहीं कोई भूल तो नहीं हुई!


क्योंकि मैं उस औरत के बारे में जानता हूँ
जो अपने एक बित्ते के आंगन में
अपनी सात बित्ते की देह को
ता-जिंदगी समोए रही और
कभी भूलकर बाहर की तरफ झांका भी नहीं।
और जब वह बाहर निकली तो
औरत नहीं, उसकी लाश निकली।
जो खुले में पसर गयी है,
माँ मेदिनी की तरह।


एक औरत की लाश धरती माता
की तरह होती है दोस्तों!
जो खुले में फैल जाती है,
थानों से लेकर अदालतों तक।
मैं देख रहा हूं कि
जुल्म के सारे सबूतों को मिटाया जा रहा है।
चंदन चर्चित मस्तक को उठाए हुए पुरोहित,
और तमगों से लैस सीनों को फुलाए हुए सैनिक,
महाराज की जय बोल रहे हैं।
वे महाराज की जय बोल रहे हैं।
वे महाराज जो मर चुके हैं,
और महारानियां सती होने की तैयारियां कर रही हैं।
और जब महारानियां नहीं रहेंगी,
तो नौकरानियां क्या करेंगी?
इसलिए वे भी तैयारियां कर रही हैं।

मुझे महारानियों से ज्यादा चिंता
नौकरानियों की होती है,
जिनके पति जिंदा हैं और
बेचारे रो रहे हैं।
कितना खराब लगता है एक औरत को
अपने रोते हुए पति को छोड़कर मरना,
जबकि मर्दों को
रोती हुई औरतों को मारना भी
खराब नहीं लगता।
औरतें रोती जाती हैं,
मरद मारते जाते हैं।
औरतें और जोर से रोती हैं,
मरद और जोर से मारते हैं।
औरतें खूब जोर से रोती हैं,
मरद इतने जोर से मारते हैं कि वे मर जाती हैं।


इतिहास में वह पहली औरत कौन थी,
जिसे सबसे पहले जलाया गया,
मैं नहीं जानता,
लेकिन जो भी रही होगी,
मेरी मां रही होगी।
लेकिन मेरी चिंता यह है कि
भविष्य में वह आखिरी औरत कौन होगी,
जिसे सबसे अंत में जलाया जाएगा,
मैं नहीं जानता,
लेकिन जो भी होगी
मेरी बेटी होगी,
और मैं ये नहीं होने दूंगा।

कविता: रमाशंकर यादव 'विद्रोही '

शनिवार, 20 अक्टूबर 2012

एसपी सिटी पुलिस रिमांड पर





शुक्रवार को चंडीगढ़ सेक्टर-17 स्थित जिला अदालत से एसपी देसराज (नीली टी-शर्ट में) को बाहर लेकर आते सीबीआई अधिकारी। - एस. चंदन
चंडीगढ़, 19 अक्तूबर। एक लाख रुपये की रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किए गए एसपी सिटी देशराज सिंह को सीबीआई की विशेष अदालत ने दो दिन के पुलिस रिमांड पर भेज दिया। शुक्रवार को अदालत में एसपी सिटी को जिस समय पेश किया गया, वहां मीडिया का भारी हुजूम था। सीबीआई की एंटी करप्शन ब्रांच ने देशराज सिंह को वीरवार रात उनके सेक्टर 23 स्थित आवास से गिरफ्तार किया था। सीबीआई ने अदालत में पेश किए गए वर्ष 2008 बैच के यूटी कैडर के आईपीएस अधिकारी देशराज की तीन दिन की रिमांड की मांग की, लेकिन अदालत ने बचाव और सरकारी पक्ष की तमाम दलील सुनने के बाद दो दिन की रिमांड की मंजूरी प्रदान की।
अदालत में सीबीआई ने देशराज सिंह और मामले में शिकायतकर्ता सेक्टर 26 थाना के एसएचओ अनोख सिंह के बीच हुई बात की रिकार्डिंग की स्क्रिप्ट को भी पढ़कर सुनाया सीबीआई ने बताया कि आरोपी ने पूछताछ में अन्य के शामिल होने के बारे में कोई खुलासा नहीं किया है। रिश्वत की रकम की पहली किश्त के और कौन-कौन हिस्सेदार थे, इस पर  भी आरोपी खुलासा करने को तैयार नहीं। जांच एजेंसी टीम ने एसपी को प्रभावी व्यक्ति भी बताया। जांच एजेंसी की दलील थी कि मामले की जांच प्रारंभिक चरण पर है। वहीं स्क्रिप्ट के आधार पर सीबीआई अदालत को अपनी दलील में पैसे के लेने देने की सीधी मांग की बात को साफ नहीं कर पाई। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि बातचीत में देशराज शिकायतकर्ता को उसके खिलाफ जांच में मदद करने का आश्वासन दे रहे हैं। बल्कि वह जांच पूरी होने और हर तरह के अरेंजमेंट का जिक्र भी अपनी बातचीत में कर रहे हैं। सीबीआई ने कहा कि ये अरेंजमेंट क्या थे? यह भी साफ नहीं हो सका। आरोपी को यह भी कहते सुना गया कि उन्हें बस बयान बदलना है। आरोपों के अनुसार देशराज पर शिकायतकर्ता के खिलाफ चल रही विभागीय जांच में मदद करने के एवज में पांच लाख रुपये रिश्वत मांगे जाने का आरोप है। अदालत में बचाव और  सरकारी पक्ष के बीच तीखी बहस भी हुई। बचाव पक्ष ने सीबीआई द्वारा मांगे गए रिमांड का विरोध किया। वकील ने कहा कि मौके पर कोई शेडो गवाह नहीं था। बचाव पक्ष की यह भी दलील थी कि अनोख सिंह की एक जांच में आरोपी खुद ही शिकायतकर्ता थे, इसलिए जांच में मदद करना का सवाल ही नहीं उठता है। इस दौरान देशराज ने अदालत को बताया कि जांच अधिकारियों ने जिस समय रुपये बाबत उनके हाथ धुलवाये तब उनके हाथों में रंग नहीं था।-आदित्य शर्मा