रविवार, 27 दिसंबर 2009

बेनी बाबू की करिश्माई शख्सियत अब भी जिले में हावी

बाराबंकी। स्थानीय निकाय विधान परिषद् सीट के लिए जिले में चुनाव अब दो प्रत्याशियों बसपा के हरगोबिन्द सिंह व सपा के अरविन्द यादव के मध्य आकर ठहर गया है। दोनों प्रत्याशियों के बीच सीधी टक्कर में मौजूदा ऍम.एल.सी अरविन्द यादव का पल्ला गोंडा से कांग्रेसी सांसद बेनी प्रसाद वर्मा के उनके पक्ष में गुप्त समर्थन के कारण फिलहाल भारी पद रहा है। बसपा प्रत्याशी की जीत अब केवल उनके अथाह धन एवं सत्ता के दबाववश प्रशासन की मदद पर निर्भर है।
प्रसिद्ध समाजसेवी लीडर एवं स्वर्गीय राम सेवक यादव के भतीजे अरविन्द यादव के हक़ में फिजा फिलहाल इस चुनाव में साजगार बन गयी है।
उनकी जीत में प्रमुख भूमिका उनकी पार्टी समाजवादी के अतिरिक्त पुराने समाजवादी बेनी प्रसाद वर्मा निभाते दिख रहे हैं जो चंद वर्ष पूर्व अपने पुराने साथी मुलायम सिंह यादव से बगावत कर कांग्रेस के पास चले गए हैं। बेनी प्रसाद वर्मा के द्वारा सपा प्रत्याशी के हक़ में यह नर्म गोशा किसी की समझ में स्पष्ट रूप से नहीं आ रहा है। क्योंकि यदि अरविन्द यादव चुनाव जीतते हैं तो श्रेय अरविन्द सिंह गोप के पाले में जाएगा। ऐसा खेल बेनी प्रसाद वर्मा क्यों खेल रहे हैं इस पर तरह तरह के कयास लगाये जा रहे हैं ।
पहला कयास यह है कि अरविन्द यादव को जीताने के पीछे उनका उद्देश्य यह है कि हरगोविंद के रूप में वह एक और ठाकुर नेता का उदय क्यों होने दें ? फिर दूसरा कयास यह है कि अरविन्द यादव एक बेजवान व्यक्ति है उनके जीतने से जिले के राजनीतिक समीकरणों में कोई बदलाव नहीं हो सकता जबकि यदि हरगोबिन्द सिंह चुनाव जीते तो इससे बेनी प्रसाद वर्मा के कई नुकसान हैं। पहला तो उनका ठाकुर होना दूसरे अपने पुराने प्रतिद्वंदी फरीद महफूज़ किदवई को श्रेय जायेगा यदि हरगोविंद जीते और बसपा नेत्री आने वाले विधान सभा चुनाव में जो नई सोशल इंजीनियरिंग ठाकुर मुस्लिम के रूप में करने वाली हैं उसको भी बल मिल जाएगा। इसके लिए उन्होंने बसपा के भीतर नाराज बैठे पूर्व सांसद कमला प्रसाद रावत व उनके गुट को हवा दिलवा दी। अब मौजूदा हालात यह है कि बसपा प्रत्याशी के साथ दिल से केवल फरीद महफूज़ किदवई फतेहपुर विधायिका मीता गौतम और अमरेश शुक्ल विधायक रामनगर लगे हुए हैं बाकी हफीज भारती, कमला रावत, सुरेन्द्र वर्मा, अरविन्द मौर्या , विजय गौतम इत्यादि नहीं चाहते कि हरगोविंद चुनाव जीते क्योंकि कमला के लोकसभा चुनाव में उक्त तीनो विधायकों की हमदर्दियाँ कमला के लिए कम और पुनिया की ओर अधिक थी।
अपने प्रत्याशी की संभावित हार के मद्देनजर बसपा के लीडरों ने यह अफवाह उडानी प्रारंभ कर दी है कि बेनी प्रसाद वर्मा पुन: समाजवादी में शामिल हो सकते हैं और राम गोपाल व मुलायम सिंह यादव से वह बराबर संपर्क में हैं अगर अमर सिंह के विरुद्ध सपा के भीतर मोर्चा खोलने में भी उनकी ही भूमिका राही है। कुछ भी हो बेनी बाबू का राजनीतिक कद अब भी जिले में सब पर भारी हैं यह बात एक बार फिर वह सिद्ध करने जा रहे हैं।

तारिक खान

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