गुरुवार, 2 अक्तूबर 2014

श्री मनोज कुमार झा, अपर पुलिस अधीक्षक, एस0टी0एफ0 लखनऊ का बयान किया -----------गवाह 5 बयान जारी --4

(21)
        एस0टी0 3/0/2000
पी0डब्लू05 28.05.2010
गवाह श्री मनोज कुमार झा, अपर पुलिस अधीक्षक
एस0टी0एफ0 लखनऊ ने अपनी साक्ष्य
दि0 22.05.10 के क्रम में सशपथ बयान
किया कि:-
    विवेचना अधिकारी ने
मुल्जिमान की गिरफ्तारी के करीब तीन महीने
बाद मेरा बयान लिया था तारीख स्पष्ट
याद नही है। बयान कार्यालय समय में
विवेचक ने लिया था कितने बजे बयान
लिया था स्पष्ट समय याद नहीं है।
मेरा कार्यालय महानगर लखनऊ में स्थित है।
मेरे कार्यालय का समय सुबह दस बजे
से लेकर शाम को आठ नौ बजे तक
जब तक काम समाप्त नही हो जाये तब
तक रहता है। खुद कहा कि कभी
कभी रात भर भी कार्य के अनुसार
काम करना पड़ता है। सामान्यतः
कार्यालय का समय सरकार के अनुसार
9 बजे से 7 बजे तक है लेकिन पुलिस
की विशेष कार्य प्रणाली को दृष्टिगत
रखते हुए अनेकों बार देर रात तक
भी काम करना पड़ता है। कार्यालय
खुला रहता है। जिस दिन मेरा बयान
विवेचक ने लिया था तब दिन का समय
था। समय दोपहर के आसपास का
रहा होगा। 12 से 4 बजे तक के
समय को मैं दोपहर में मानता हूँ
दोपहर और शाम के बीच में मेरा बयान
लिया होगा स्पष्ट समय याद नही है।
विवेचना अधिकारी ने मेरा बयान आधा
घण्टा तक लिया था। (22)
विवेचना अधिकारी ने मेरा बयान लिखा था।
जो बयान लिखा गया था वह पढ़कर सुनाया
गया था। मैंने बयान पर हस्ताक्षर नहीं
किए थे। विवेचक ने जितनी बाते मुझसे
पूछी थी वहीं मैंने अपने बयान में बताया
था।
    मेरे मुख्य परीक्षा के पृष्ठ सं0 9 में
अंकित बयान ‘‘खालिद मुजाहिद ने अपने
दाहिने हाथ में ...........दो
छोटी चाभी लगी थी जिसमें तीन सौ रूपये
नकद बरामद हुआ था’’ (पेज 11 पर बयान
में) यदि विवेचना अधिकारी ने मेरे बयान
में ये न लिखा हो तो मैं इसकी कोई
वजह नहीं बता सकता। मेरी मुख्य परीक्षा
के पृष्ठ सं0 11 पर अंकित बयान ‘‘खालिद
मुजाहिद ने मौके पर दौरान पूछताछ बताया
कि वर्ष 2001................................ क्योंकि
भविष्य में बम्बई में विस्फोट किया जाना
था’’ (बयान पृष्ठ 11 से 13 तक में) यदि
ये बाते मेरे बयान में विवेचक ने नही लिखी
है तो यह विवेचक बता सकते हैं क्योंकि
विवेचक ने मुझसे जो जो पूछा था वही
मैंने बताया था। मेरे मुख्य परीक्षा के पृष्ठ
सं0 13 के अंतिम पैरा ‘‘बम्बई से फिर हम
लोग वापस आये मडि़याहूं से..........
............... खालिद माफी मांगने लगा।’’
(यह बयान पृष्ट 16 तक है) यह बात विवेचना
अधिकारी ने नही लिखी है तो मैं आपकी
कोई वजह नहीं बता सकता, विवेचना
(23)
अधिकारी ने मुझसे जो जो बाते पूछी थी मैंने
उसी को अपने बयान में बताया था।
मेरी मुख्य परीक्षा के बयान के (पृष्ट 17 से
लेकर पृष्ठ 20 तक) कि दौरान पूछताछ
तारिक काजमी हाजिर अदालत..............
.................... मुल्जिमान के हस्ताक्षर बनवाये
गये थे’’ यह बाते यदि विवेचना अधिकारी
ने नहीं लिखी है तो मैं इसकी कोई वजह
नही बता सकता क्योंकि विवेचना अधि
कारी ने मुझसे जो जो पूछा था मैंने वही
उन्हें बताया था।
    मैं भी विवेचना अधिकारी रहा हूॅ
प्रश्न-उपरोक्त मुख्य परीक्षा में आप
द्वारा कही गयी उपरोक्त बाते 161
CRPC के बयान में नही है?
उत्तर-मुख्य परीक्षा में मेरे द्वारा दी गई
कुछ बाते, महत्वपूर्ण बाते 161
CRPC के बयान में अंकित है।
प्रश्न-विवेचना अधिकारी ने जब बयान
पढ़कर सुनाया था तो उनसे
ये बाते लिखने को कहा था या
नही कहा था?
उत्तर-जो बाते विवेचना अधिकारी
ने मुझसे पूछा था उसका मैंने
जवाब दिया था।
लखनऊ से बाराबंकी (मेरे मुख्यालय
महानगर से बाराबंकी रेलवे स्टेशन
तक) की दूरी करीब 30 किमी0 से
35 किमी के बीच होगी।   
(24)
मैं करीब साढ़े चार बजे सुबह अपने मुख्यालय
से इस आपरेशन के लिए सीधे रेलवे स्टेशन
के लिए निकला था। यह दूरी (लखनऊ से
चलकर बाराबंकी बस स्टेशन तक) आने में
हमें करीब एक घण्टा लगा था। बाराबंकी
बस स्टेशन पर हम करीब 15-20 मिनट
तक रूके थे। हम लोगों ने बस स्टेशन
पर चाय पानी नहीं की थी। वहां रूककर
हमने अपने टायर वगैरा नहीं चेक किए थे।
वहां हम लोगों में से किसी ने भी पान
वगैरा नहीं खाया था। हम लोग बस
स्टेशन से Morning Walk  करके
रेलवे स्टेशन नही गये थे। हम
लोगों ने बस स्टेशन पर गवाहों की
तलाश किया गया था व मुखबिर से
बातचीत की थी और हम सभी
ने आपस में टीम की एक दूसरे
की तलाशी ली थी उसी में यह 15-20
मिनट का समय लगा था।
बस स्टेशन पर हमें दो चार लोग मिले थे
जिनसे गवाह बनने हेतु अनुरोध किया
गया था। उन लोगों ने गवाह बनने हेतु
मेरी बात नहीं मानी थी। गवाहों से जब
यह बताया गया कि हम लोग यहां पर
आतंकवादियों की गिरफ्तारी हेतु आये है
उन्हें इस गिरफ्तारी का गवाह बनना है
तो उन्होंने भय से नाम पता बताने से
इनकार कर दिया। नाम पता बताने से इनकार
करने पर मैंने कोई विधिक कार्यवाही नही
की।
(25)
लखनऊ से हम लोग जब चले थे तो
चारो टीमें कुल मिलाकर ड्राइवरों सहित 38 
आदमी थे। चारो टीमों का नेतृत्व अलग
अलग अधिकारियों को दिया गया
था जो सभी टीमे मेरे पर्यवेक्षण में
थी। पहली टीम प्लेटफार्म पर नही थी।
पहली टीम का नेतृत्व मैं कर रहा था।
हमारी चारो टीमें बस स्टेशन से रेलवे
स्टेशन पौने छः-छः बजे पहुंची थी।
जिस टीम का मैं नेतृत्व स्वयं कर रहा
था। उसे रेलवे स्टेशन के बाहर
सायकिल स्टैण्ड के पास खड़ा किया
गया था। मेरी टीम ने तत्कालीन CO
चौक  श्री चिरंजीव नाथ सिन्हा, पुलिस
उपाधीक्षकSTF  श्री एस0 आनन्दSTF
उपनिरीक्षक धनंजय मिश्रा, उपनिरीक्षक
STF श्री विनय कुमार सिंह, तथा
कुछ हेड कांस्टेबिल व कास्टेबिल
तथा ड्राइवर मिलाकर 10 लोग थे।
    दूसरी टीम का नेतृत्व SI सत्य
प्रकाश कर रहे थे जिन्हें माल गोदाम
रोड पर लगाया गया था। तीसरी
टीम को मैंने बंकी रोड पर खड़ा
किया था। चैथी टीम को मैंने
पुलिस लाइन रोड पर खड़ा किया
था। प्लेटफार्म की तरफ हमारी कोई
टीम नही थी।


(26)
मैंने पहली बार अभियुक्तों को 6.15 बजे के
आस पास देखा था। पहली बार जब हमने
मुल्जिमों को देखा तो तत्काल पकड़ने
का प्रयास नहीं किया क्योंकि यह संभा-
वना थी कि इनके अन्य साथी भी अगल
बगल हो सकते हैं। पुलिस स्ट्रेटजीर्क
अनुसार तत्काल नही पकड़ा गया।
मुल्जिमान को मैंने नही पकड़ा था।
श्री चिरंजीव नाथ सिन्हा व उपनिरीक्षक
विनय सिंह तथा अन्य हमराही कर्म-
चारी गण ने दोनों अभियुक्तों को
पकड़ा था। जहां हम लोग थे वहां
से करीब 30-35 कदम की दूरी पर
मुल्जिमानो का पकड़ा गया था।
जहां मैं खड़ा था वहां से 30-35 कदम
दूर, वह रोड जो माल गोदाम रोड एक तरफ
जाती है तथा वहां से दूसरी तरफ बंकी
रोड जाती है उस स्थान पर पकड़ा गया
था यह रोड सीधे पुलिस लाइन तिराहे
की तरफ पूरब को जाती है। जिस स्थान
पर मुल्जिम पकड़ा गया था। वह रेलवे
स्टेशन के मुख्य द्वार से कितनी दूरी पर
है सही दूरी मैं नही बता सकता हूँ
100-200 कदम की दूरी पूछने पर बताया
कि मैं सही दूरी नही बता सकता।
(27)
गिरफ्तारी के बाद हमने फर्द बरामदगी
बनवाई थी। फर्द बरामदगी लिखने
में करीब डेढ़ पौने दो घण्टा लगा होगा।
फर्द बरामदगी मैंने नही लिखवाई थी।
फर्द बरामदगी CO चिरंजीव नाथ सिन्हा
CO  साहब ने फर्द बरामदगी
में लिखाई होगी।
    फर्द बरामदगी प्रदर्श क 4 की पंक्ति
‘‘भारत की सीमावर्ती विदेशी राष्ट्रों
......................विध्वंसक कार्यवाही कर
रहा है।’’ यह तथ्य मुल्जिमानों ने
पूछताछ में नही बताया था। यह
बात श्री चिरंजीव नाथ सिन्हा ने लिखी
थी लेकिन इस तथ्य से हम सभी
लोग सहमत थे।
    भोजनावकाश के कारण स्थगित।
पुनः शपथ दिलायी गई।
    वादी ने मुल्जिमों से जो
चीजे बरामद हुई थी मुल्जिमों के
जो बयान सबके सामने हुए थे वह
फर्द में लिखा गया था, सत्य होने
के कारण सभी टीमें सहमत थी।
फर्द बरामदगी में लिखा गया RDX
सवा किलो वजन अनुमान सा लिखा
गया था। सवा किलो के आस पास का
अंदाजा था वह कम ज्यादा भी हो सकता है।
(28)
तथा कथित आर0डी0एक्स0 का वजन का अंदाजा
श्री चिरंजीवनाथ सिन्हा ने लगाया था। फर्द
लिखने के पहले माल सर्व मुहर किया गया
था। जिसके जिसके पास जो बरामद हुआ
था वह सम्बंधित के बैग में रखकर सर्व
मुहर किया गया था। श्री चिंरजीव नाथ
सिन्हा ने उपरोक्त माल सर्व मुहर किया
था। सील मुहर करने वाली सामग्री श्री
चिरंजीव नाथ सिन्हा के पास थी, वह
पुलिस विभाग की थी वह कहां से
प्राप्त किये थे यह वही बता सकते हैं।
जो चीजे अभियुक्तों ने जैसी बताई थी
पूछताछ के दौरान, श्री सिन्हा ने वैसे
ही फर्द में लिखा था। वह पूछताछ
में बताई गयी बाते सत्य थी यह असत्य
थी वह विवेचना अधिकारी ही बता
सकते हैं। जिस समय मुल्जिमानों को पकड़ा
गया था वह पैदल थे। किसी
वाहन से नही थे। यह लोग रेलवे स्टेशन
रिक्शे से आये थे। हम लोगों ने उस रिक्शे
वाले का नाम पता पूछने की कोशिश नहीं की
थी क्योंकि रिक्शे वाला वहां से जा चुका था।
मैं यह नही बता सकता कि रिक्शावाला
इन लोगों को कहा से लागया था। हम लोगों
ने रिक्शे वाले को रोकने की कोशिश नही
की क्योंकि वह उतार कर चला गया था।
सम्पूर्ण कार्य वहीं हो जाने के बाद मैं
कोतवाली गया था।
 (29)
फर्द बरामदगी को कार्यवाही के बाद हम
लोग कोतवाली गये थे। रेलवे स्टेशन
से कोतवाली 10 मिनट के अन्दर ही
पहुंच गये थे।
    जब हम लोग लखनऊ से चले थे उसके
पूर्ण हम लोगों ने बाराबंकी के पुलिस
अधीक्षक या किसी अन्य अधिकारी
को इसकी सूचना नही दी थी। कोत-
वाली पहुंचने के दो ढाई घण्टा के
अन्दर आस पास प्रथम सूचना रिपोर्ट
दर्ज हो गयी थी। फर्द बरामदगी
रिपोर्ट दर्ज कराने से पहले श्री
चिरंजीव नाथ सिन्हा के पास थी
रिपोर्ट दर्ज हो जाने के बाद
कापी उन्ही को ही मिली थी।
वादी ने मुकदमा दर्ज करने के लिए
फर्द किसको दिया था मैं नही बता
सकता यह चिरंजीव नाथ सिन्हा ही
बता सकते हैं। माल मुकदमा थाने
में किसी व्यक्ति (पद) को दिया था,
डियूटी पर मौजूद किस व्यक्ति को दिया
था यह नहीं बता सकता, लेकिन
कार्यालय में डियूटी पर मौजूद
हेड मोहर्रिर व कांस्टेबिल मोहर्रिर
को दिया था। मैं कोतवाली में
प्रभारी निरीक्षक के कार्यालय में
गया था। इस बीच में मैं कार्यालय
से बाहर भी आता जाता रहा था।
  (30)
मैंने रिपोर्ट लिखी जाति देखी थी। मैं यह स्पष्ट
नहीं बता सकता कि कां0 मोहर्रिर यह हेड मोहर्रिर
रिपोर्ट लिख रहे थे। मैं स्पष्ट नहीं बता सकता
कि उस समय पंखा चल रहा था, लाइन जल
रही थी या नहीं। कोतवाली से सारी
कार्यवाही होने के बाद मैं लखनऊ वापस
आ गया था। कोतवाली से कितने
बजे प्रस्थान किया यह स्पष्ट
नहीं बता सकता।
        To be contiane
                सुनकर तस्दीक किया।  
                स्पेशल जज ई0सी0
                एक्ट, बाराबंकी
                08.09.2010
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एक्ट, बाराबंकी
08.09.2010
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