गुरुवार, 2 अक्तूबर 2014

चिरंजीव नाथ सिन्हा पुलिस उपाधीक्षक लखनऊ का सशपथ बयान--------गवाह -----------4----------जारी---------3

(29)
न्यायालय अपर सत्र न्यायाधीश कक्ष सं0 7
बाराबंकी
ST 310/08
सर0 वि0 खालिद
मुजाहिद व 1 अन्य
थाना कोतवाली , बाराबंकी
                  PW - 4
                        15-2-10
    चिरंजीव नाथ सिन्हा पुलिस उपाधीक्षक
ए0टी0एस0 ने सशपथ बयान कि-
    मैं सी0ओ0 चैक लखनऊ
जून 2007 को जुलाई/अगस्त 2007
तक तैनात रहा हूँ मैंने इस दौरान अस0
281/07 सरकार vs  जलालुदीन Ps वजीर
गंज जिला लखनऊ के मुकदमें में विवेचक
रहा हूँ। मैं यह नही बता सकता कि उस
अ0सं0 281/07 थाना वजीरगंज जिला लखनऊ
में प्रथम सूचना रिपोर्ट मु0अं0सं0 1891/07
कोतवाली बाराबंकी की प्रथम सूचना रिपोट तहरीर
की चैथी चिक लाइन का दूसरा पेज भारत के
सीमावर्ती विदेशी राष्ट्रो -----------
----- आतंकवादी एवं
विध्वंसक कार्यवाही कर रहा है में अंकित
है या नही मुझे याद नही है। उपरोक्त उध्वत
शब्दा भारत की सीमावर्ती विदेशी राष्ट्रो---
---- आतंकवादी एंव विन्धशक
कार्यवाही कर रहा है, तथ्य अभिसूचना संज्ञान
का हिस्सा है के आधार पर लिखवायी हैअभियुक्तगण द्वारा जो बाते कही
उसको फर्द में अंकित किया गया। अभियुक्त
द्वारा जो बयान दिया गया किन्तु उस फर्द
में अंकित कर दिया गया है जिसकी
सत्यता की जांच विवेचनाधिकारी को
करना है मैं केवल तथ्यों के आधार
पर फर्द मंे अंकित कर दिया था।
अभियुक्तगण के सम्बंध यह सूचना प्राप्त
हुई कि प्रतिबंधित संगठन हूजी के
सदस्य हैं एवं गिरफ्तारी के उपरांत
दौरान पूछताछ अभियुक्त गण ने स्वीकार
भी किया। मैं लगभग 4 बजे सुबह लखनऊ
से बाराबंकी चला था। हम लोग एस0
टी0एफ कार्यालय से चले थे। संख्या ठीक
से याद नही है लगभग 35-40 लोग
चले थे। जिस समय लखनऊ से चले थे
उस समय संख्या याद थी अब याद नही
है। चार टीमों का गठन किया गया था
मैं प्रथम टीम में था मेरी टीम में श्री
मनोज कुमार झा ए0एस0पी0/सी0ओ0
की श्रेणी में वे मुझसे वरिष्ठ थे प्रथम
सूचना रिपोर्ट उनके द्वारा न अंकित करवाने
का कारण मैं कचेहरी ब्लास्ट लखनऊ
मामले का विवेचनाधिकारी था इसलिए
इस मुकदमें का वादी बना। मनोज कुमार
के सुपरवीजन में गिरफ्तारी आदि
की मौके पर की गयी थी। (31)

श्री मनोज कुमार झा के द्वारा प्राप्त
दिशा निर्देशों के अनुसार मौके
पर कार्यवाही की गयी थी। मैं इस
घटना के पूर्व अपनी जानकारी में बाराबंकी
नही आया था। बाराबंकी में हम लोग
सबसे पहले बस स्टैण्ड लगभग 5 1/2
अथवा 5.45 सुबह पहुंचे। एस0टी0
एफ कार्यालय महानगर से बाराबंकी
बस स्टैण्ड की दूरी मैं ठीक ठीक नही
बता सकता। मैं नही बता सकता कि
वाहन की स्पीड क्या थी। हमारी
टीम महानगर कार्यालय से चलने
के बाद सफेदाबाद गेस्ट हाउस पर
हमारी टीमों ने विश्राम नही किया।
सीधे बाराबंकी बस स्टेशन पर
आ गये थे। रास्ते में कही नही रूके
थे। बाराबंकी बस स्टेशन पर
हम लोग 15-20 मिनट रूके
होगे। मुखबिर बाराबंकी बस स्टेशन
पर मिला था। मुखबिर से हमारे
अधिकारी और मैंने बात किया था
मैंने बस स्टेशन पर मुखबिर एवं अपनी
आपस में जामा तलाशी ली दी और
गवाहान फर्द हम करने का प्रयास
किया था। उस समय दो चार लोग
बस अड्डे पर मिले थे जिससे गवाही के लिए (32)

कहा था। कोई तैयार नही हुआ।
आतंकवादियों के डर व दहशत के
कारण कोई व्यक्ति अपना नाम पता
बताने को तैयार नही हुआ। नाम
पता न बताने पर उनके साथ कोई
कार्यवाही नही की। मैं 15-20 मिनट
बाद हम सभी लोग रेलवे स्टेशन
पहुंचते। रेलवे स्टेशन के बाहर जहां
स्टेशन की इमारत का बाहिरी प्रांगण है।
वहां पर चारो गठित टीमों को निर्देशानुसार
लगाया गया। पहली टीम में मैं स्वयं
था जो रेलवे स्टेशन के बाहर नियुक्त
की गयी। एक टीम बंकी रोड पर
एक पुलिस लाइन तिराहे की ओर, एक देवां रोड
पर लगायी गयी। हमारी चारो टीमों
की स्थिति नजरी (sight) दूरी थी
रेलवे स्टेशन की पोटिको की इमारत
से लगभग 25 कदम की दूरी पर
शहर की ओर था हमारी टीम से
पुलिस लाइन तिराहे वाली टीम लगभग
25 कदम की दूरी पर थी। मैंने
फर्द मौके पर बनायी थी। फर्द लिखने
से पूर्व आर0डी0एक्स0 इत्यादि सील
कर दिया था और उसके बाद फर्द लिखी
खुद कहा कि अभियुक्तों की जामातलाशी
के दौरान बरामद आर0डी0एक्स0 आदि
वस्तुओं का फर्द में उल्लेख इसी दौरान किया था। (33)

जो सवाल हमसे पूछा गया था उसी
के अनुक्रम में बताया है। फर्द वाला
कागज मेरा विभागीय कागज है। जो
विभागीय कार्य हेतु मिलता है।
बरामद आर0डी0एक्स0 को मैंने तौलाया
नही था। अंदाज से वजन लिख
गया था जो लगभग सवा किलो था
यह अंदाज मेरा था। मनोज कुमार
झा का नही।
    बचाव पक्ष की ओर से
प्रदर्श क-4 के पेज नं0 5 के 9
व दसवी लाइन की ओर गवाह का ध्यान
आकृष्ट कराया। कि एक पालीथीन
में लिपटा हुआ हाई एवसप्लोसिन
विस्फोटक पदार्थ जिसका वजन
सुविधानुसार कराया गया तो
लगभग सवा किलो बरामद हुआ
के उत्तर में गवाह द्वारा बताया
गया सुविधानुसार तौल कराया
गया का मतलब स्वयं का अंदाजा
है। मेरी विवेचना किट में तौल
की मशीन थी या नही मुझे
याद नही है। मैंने तौल करने के लिए
तौल मशीन के खराब एमझा
जो मिल नही पायी थी। (34)

उस समय मेरे तफतीशी बैग में
तौल मशीन नही थी। उस समय
सारी दुकाने बन्द थी जहां तौल
कराया जा सकता था। रेलवे स्टेशन
पर गवाह फराहम करने की कोशिश
की थी। फर्द बरामदगी लिखने में
मौके पर लगभग 2 1/2 घण्टे लगे होंगे।
उपरोक्त कार्य वही मौके पर पूरी
करने के उपरांत हम लोग सभी
के साथ बाराबंकी कोतवाली आ गये।
फर्द की नकले अभियुक्तों को दी थी।
इसका उल्लेख फर्द बरामदगी में है।
इस मुकदमें में बयान देने से पहले
फर्द पर मेरे बयान फैजाबाद और
जिला जज एवं इस मुकदमें के
विवेचक के समक्ष हुआ था
उस समय तत्कालीन विवेचक
श्री दयाराम सरोज सी0ओ0 सिटी
बाराबंकी थे। मुझे ठीक से याद
नहीं लेकिन मेरा बयान इस
घटना से एक दो दिन बाद
हुआ था। यह बयान सी0ओ0 सिटी
कार्यालय बाराबंकी में हुआ था।
मुझे ठीक से याद नही है कि उनके
कार्यालय में कितने समय गया था।
मैं ठीक ठीक नही बता सकता हूँ(35)

कि बयान में कितना समय लगा होगा।
मुझे बयान देने के उपरांत उनके कार्यालय
से निकलने का समय याद नही है। मैं
विवेचक सी0ओ0 सिटी के बुलाने पर
बयान देने गया था। श्री दयाराम सरोज
ने मुझे दूरभाष से बुलाया था। इस वाद
से सम्बंधित दूसरे विवेचक श्री राजेश
कुमार श्रीवास्तव द्वारा बयान लिया था
मुझे ठीक से याद नही है कि दूसरे विवेचक
ने मेरा बयान कहा लिया था मैं यह
भी नहीं बता सकता हूँ कि बयान फर्द
करने में कितना समय लगा होगा।
बरामदगी के समय प्रतिबंधित संगठन
से जुडे़ होने का कार्ड व साहित्य
नहीं मिला था। इससे पहले बरामदगी
से पहले मैं मडियाहू गया था। मैं
अभियुक्त खालिद मुजाहिद के घर
ग्राम मडियाहू जिला जौनपुर इस
बरामदगी से पहले गया था और
इस दौरान खालिद मुजाहिद के घर
तलाशी ली थी। मैंने 18.12.07 को
तलाशी ली थी।
    यह कहना गलत है कि
18.12.07 को तलाशी लेने के उपरांत ही
 (36)

अभियुक्त खालिद मुजाहिद को
अपने साथ पकड़ लाया था। उपरोक्त
घर पर तलाशी के दौरान तीन अदद
जेहादी किताबे, एक नोकिया हैण्डसेट
व सिम लाये थे। मडि़याहू पहुंचने
पर वहां के थाना प्रभारी को वहां पहुंचने
की सूचना दी थी। प्रभारी निरीक्षक स्वयं
मेरे साथ तलाशी हेतु गये थे। तलाशी
के समय खालिद मुजाहिद के घर पर
दो व्यक्ति मिले थे जिनके हस्ताक्षर
मैंने फर्द बरामदगी पर लिये थे। बरामद
शुदा तीन किताबों का प्रभारी निरीक्षक
मडि़याहूं श्री अल्ताफ हुसैन से पढ़वाना
था। उन किताबों में से एक का नाम
इस्लाम की रूह दूसरे जेहादी अफगानी
खान तीसरी किताब का नाम मुझे याद
नही है। मुझे यह यह जानकारी नही
है कि उत्तर प्रदेश सरकार/ अथवा
केन्द्र सरकार ने प्रतिबंधित कर रक्खा
है। मैंने प्रतिबंधित वाली बात का
कोई सन्दर्भ नही बताया है मैंने जेहादी
बात बताया है।
    यह कहना गलत है कि
नियोजित साजिश के आधार पर
यह एफ0आई0आर0 लिखायी गयी।(37)

    यह कहना गलत है कि
अभियुक्त खालिद मुजाहिद को दिनांक
16.12.07 को मडि़याहू बाजार से
एस0टी0एफ0 द्वारा पकड़ लाया गया।
    यह भी कहना गलत है कि
अभियुक्त खालिद मुजाहिद को एस0टी0
एफ0 टीम द्वारा एस0टी0एफ0 कार्यालय
लखनऊ से घटना के दिन लखनऊ से
साथ लेकर आयी थी।
X X X X X X X  X X X X X
   जिरह
अभियुक्त मो0 तारिक कासमी के
अधिवक्ता द्वारा-
    रेलवे स्टेशन के बाहर कोई
साइकिल स्टैण्ड था नही मुझे याद
नहीं है। यह भी याद नही है कि उस
कोई अखबार बेचने वाले बैठे थे या नहीं।
मैं ठीक-ठीक नहीं बता सकता कि स्टेशन
जाते समय दाहिनी ओर कोई चाय की
दुकान थी या नही। स्टेशन से बाहर
आने वाले व जाने वाले अन्दर बाहर आ
जा रहे थे।
      ASJ CN07
        15-02-10          सुनकर तस्दीक
                    किया
प्रमाणित किया जाता है कि   
मेरे बोलने पर पेशकार द्वारा
लिखा गया।
ASJ CN07
        15-02-10
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