सेवानिवृत्त आई0पी0एस0 अधिकारी मंजूर अहमद को बहुजन समाजपार्टी से निष्कासित कर दिया गया हैं इससे पूर्व विगत लोकसभा चुनाव के समय उन्होंने कांग्रेस का साथ छोड़कर यह कहते हुए बहिन जी का साथ पकड़ा था कि बहिन जी सर्वसमाज की बात करती हैं और उनकी नीयत में कोई खोट उन्हें नज़र नहीं आता जबकि कांग्रेस पार्टी बाते तो मुसलमानों के हित में करती है परन्तु काम ढेला भर नहीं।
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शुक्रवार, 19 फ़रवरी 2010
मंगलवार, 16 फ़रवरी 2010
देश में नफरत की बात करने वालों के लिए सबक
एक बार फिर देश में अमनपसन्द नागरिकों ने फसाद फैलाने वालों को करारी शिकस्त दे दी और घृणा की राजनीति करने वालों को मुहब्बत का पैगाम देने के इरादे से बनाई गई शाहरूख खान की फिल्म ‘‘माई नेम इंज खान’’ के हक में अपार समर्थन देकर जनता ने करारा जवाब दे दिया है।
देश में भाषा, क्षेत्रवाद व धर्म के नाम पर अलगाववाद का विष घोलने वाले लोगों के लिए यह अवश्य सबक ही कहा जायेगा। पहले देश के अमन पसन्द नागरिक ऐसी शक्तियों के विरूद्ध
सोमवार, 15 फ़रवरी 2010
लब डूबा हुआ साग़र में है
कुछ दिन पहले एक दैनिक अखबार में अलग-अलग पृष्ठों पर शराब के सम्बन्ध में तीन खबरे छापी गई पहली यह कि शराबी पिता की हरकतों से तंग बेटे ने उसे खुरपी से काट डाला, पिता की लड़के की पत्नी पर गंदी नजर थी वह रोज गांव व घर में झगड़ा करता था तथा जवान पुत्रियों को गाली देता था। दूसरी यह कि एक बैंक के सहायक प्रबन्धंक की बारात समस्तीपुर जिले में गई थी, प्रबन्धक जी नशे में धुत थे अतः दुल्हन ने शादी से इनकार कर दिया और बारात बैरंग वापस हो गई, अब तीसरी खबर
रविवार, 14 फ़रवरी 2010
एक और आतंकी घटना और फिर मुसलमान आतंकी
एक और आतंकी घटना और पिछली घटनाओं की भांति संदेह के घेरे में सर्वप्रथम मुसलमान। नाम मोहसिन चैधरी। मात्र एक घण्टे के अन्दर ए0टी0एस0 मुम्बई ने आतंकी घटना के मोहरे को ढूँढ़ निकाला, जबकि घटना आर0एस0एस0 के गढ़ में हुई, जहाँ मालेगाँव व अन्य विस्फोटों के आरोपी कर्नल पुरोहित ने अभिनव भारत नाम के संगठन का गठन किया था, और जहाँ आचार्य रजनीश का ओशो आश्रम व अन्र्तराष्ट्रीय स्तर पर आतंक के जन्मदाता यहूदी समुदाय का भी प्रार्थना स्थल
शनिवार, 13 फ़रवरी 2010
विधि व्यवस्था में अधिवक्ता की भूमिका खत्म कर दो
भारतीय विधि व्यवस्था में प्रत्येक व्यक्ति को न्याय पाने का अधिकार है और अपने मन पसंद अधिवक्ता से अपने वाद में अपना पक्ष प्रस्तुत करने का भी अधिकार। आए दिन अधिवक्ताओं के ऊपर हमले नियोजित तरीके से हो रहे हैं और उनसे कहा जा रहा है अमुक मुकदमा करो और अमुक मुकदमा न करो। देश भर में आतंकवाद से सम्बंधित मुकदमों का विचारण हो रहा है भारतीय विधि व्यवस्था में उन वादों का विचारण तभी संभव है जब उनकी तरफ से कोई अधिवक्ता उनका पक्ष
बुधवार, 10 फ़रवरी 2010
महंगाई पर केन्द्र व राज्य सरकारों की तू-तू, मैं-मैं,
मंहगाई के मुददे पर केन्द्र व राज्य सरकारों के बीच वाकयुद्व चल रहा है। एक दूसरे पर मंहगाई को नियंत्रित न करने का आरोप लगाया जा रहा है। राज्यों की गेर कांग्रेसी सरकारों केन्द्र में स्थापित मनमोहन सरकार की आर्थिक नीतियों को बढ़ती महंगाई का दोषी बतला रही है तो मनमोहन सरकार की सहयोगी एन0सी0पी0 के मुखिया व भारत सरकार के कृषि मंत्री शरद पवार की बयानबाजी आग में घी का काम कर रही है। महंगाई की चक्की में पिस केवल गरीब रहा है और उसके लिए हालात बद से बदतर होते चले जा रहे हैं।
सोमवार, 8 फ़रवरी 2010
दख़ल की दुनिया: सत्ता , साजिश और सीमा -आवेश तिवारी
यूपी की मानवाधिकार कार्यकर्ता सीमा आज़ाद और उनके पति विश्वविजय को पुलिस ने नक्सली बताकर गिरफ्तार किया है। हमें मालूम है कि इस एक विशेषण की आड़ पुलिस किन मंसूबों के साथ लेती है। और आजकल इस नक्सली शब्द पर केंद्र भी सजग है। उसे मालूम है कि पहाड़ों पर और जंगलों में संघर्ष बन कर उगे हुए इन नक्सलियों को साफ किये बिना वो पहाड़ों और जंगलों पर कब्जा नहीं कर सकती। सोनभद्र से आवेश तिवारी ने एक रिपोर्ट लिखी है। साथ ही इस संदर्भ में हम पीयूसीएल का एक पत्र भी छाप रहे हैं, जो राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को लिखा गया है।चाणक्य के देश में राजधर्म की हालत
समाजवादी पार्टी से अमर सिंह के जुदा हो जाने पर राजनीतिक पण्डित यह कहते नहीं थक रहे कि अब मुलायम सिंह अपने दल के खर्चो की व्यवस्था कहां से करेंगे? और सत्ता के लिए अब आवश्यकता सा बन गया छंद फंद वह किस के बूते करेंगे ?
अजीब बात है एक ओर राजनीत के गिरते स्तर पर प्रतिदित देश के विभिन्न अंचलों में आडिटोरियम व सभागारों में परिचर्चाए आयोजित की जाती है पुराने अवकाश राजनीतिज्ञ, समाजसेवी, साहित्कार, राजीतिक आलोचक लम्बे चौड़े भाषण देकर देश की राजनीतिक दशा एवं उसकी भटकती दिशा पर अपनी चिन्ता व्यक्त करते हैं तो वहीं दूसरी ओर अमर सिंह जैसे व्यक्ति की राजनीतिक निपुणता की वकालत भी करते लोग दिखाई पड़ते है।
अजीब बात है एक ओर राजनीत के गिरते स्तर पर प्रतिदित देश के विभिन्न अंचलों में आडिटोरियम व सभागारों में परिचर्चाए आयोजित की जाती है पुराने अवकाश राजनीतिज्ञ, समाजसेवी, साहित्कार, राजीतिक आलोचक लम्बे चौड़े भाषण देकर देश की राजनीतिक दशा एवं उसकी भटकती दिशा पर अपनी चिन्ता व्यक्त करते हैं तो वहीं दूसरी ओर अमर सिंह जैसे व्यक्ति की राजनीतिक निपुणता की वकालत भी करते लोग दिखाई पड़ते है।
शनिवार, 6 फ़रवरी 2010
देश की सरकारों के दोहरे माप दंड
कानून की चाबुक के आगे किसी की कोई हैसियत नहीं। यह बात साफ तौर से कांग्रेस के महामंत्री व देश के राजनीतिक सेलीब्रेटी राहुल गांधी के मुम्बई दौरे के दरमियान खुलकर सामने आयी। जब शिवसेना की सरकाशी ढेर हो गयी और परिन्दा भी राहुल गांधी के आस पास न मार सका। परन्तु आये नागरिक की सुरक्षा की भी क्या इतनी फ्रिक देश की सरकार या प्रान्तीय सरकारों को है विचारों की स्वतन्त्रता के नाम पर स्वछन्दता से लबरेज भाषण व लेख बराबर देश के कोने कोने से उमरते रहते है।
मंगलवार, 2 फ़रवरी 2010
पूंजीवादी एवं सम्प्रदायिक शक्तियों की साजिश का शिकार मुलायम

वरिष्ठ समाजवादी विचारक व अन्य सपा प्रवक्ता मोहन सिंह ने अमर सिंह के पार्टी से निष्कासन पर टिप्पणी करते हुए कहा है कि वह पार्टी में पूंजीवादियों एवं सम्प्रदायिक शक्तियों के एजेन्ट के रूप में दाखिल हुए थे और पार्टी को अपार क्षति पहुंचाकर गए अब हम लोग पार्टी के अन्दर अन्य कचरे को साफ करने का काम करने और पार्टी का पुर्नगठन समान विचार धारा के लोगों को जोड़कर करेंगे।
सोमवार, 1 फ़रवरी 2010
देश को निगलता जा रहा भ्रष्टाचार का दानव
देश में बढ़ती भ्रष्टाचार की समस्या के कारण जनहित देशहित व मानवता सभी किनारे लगते जा रहे हैं और इसके चलते जहाॅ एक ओर देश की एकता अखण्डता सुरक्षा व सम्प्रभुत्ता पर संकट गहराते चले जा रहे हैं तो वहीं दूसरी और पूंजीवाद का अजगर मध्यमवर्गी एवं गरीब जनमानस को निगलता जा रहा है।
भ्रष्टाचार का गहरा संबन्ध आर्थिक हविस से होता है और इसी के चलते धार्मिक, सामाजिक एवं मानवीय मूल्यों का ह्रास सदैव होता आया है। भ्रष्टाचार के चलते ही आज देश विरोधी शक्तियों ने अपनी पैठ देश की आंतरिक सुरक्षा के भीतबर तक बना ली है यह भ्रष्टाचार ही है जिसने एक मुसलमान को
भ्रष्टाचार का गहरा संबन्ध आर्थिक हविस से होता है और इसी के चलते धार्मिक, सामाजिक एवं मानवीय मूल्यों का ह्रास सदैव होता आया है। भ्रष्टाचार के चलते ही आज देश विरोधी शक्तियों ने अपनी पैठ देश की आंतरिक सुरक्षा के भीतबर तक बना ली है यह भ्रष्टाचार ही है जिसने एक मुसलमान को
गुरुवार, 28 जनवरी 2010
पुलिस व अपराधियों का गठजोड़
उत्तर प्रदेश पुलिस के आरमोरर श्री राजेश कुमार सिंह को उनके साथियों के साथ गिरफ्तार किया गया उनके पास से सौ कारतूस 9 एमएम, ए.के 47 के 49 कारतूस व एस.अल.आर व खाली कारतूसों के 498 खोखे भी बरामद किये गए। पुलिस और अपराधियों का गठजोड़ काफी दिनों से कार्य कर रहा है अपराधियों को शस्त्रों व कारतूसों की सप्लाई पुलिस विभाग से ही होती है प्रतिबंधित बोर के आर्म्स के कारतूस बाजार में नहीं मिल सकते हैं उनकी सप्लाई पूरे देश में नियोजित तरीके से अपराधियों को होती है।
अपराधियों, पुलिस व राजनेताओं का गठजोड़ संगठित अपराधों को बढ़ावा देता है। चाहे दिल्ली हो चाहे मुंबई हो शस्त्रों की सप्लाई व अपराधी समूहों को संरक्षण इस गठजोड़ से मिलता है, जबतक इस गठजोड़ को ईमानदारी से नष्ट नहीं किया जायेगा तब तक संगठित अपराध होते रहेंगे। अपराधियों ने अपने गठजोड़ में कार्यपालिका के भी अधिकारियो को शामिल कर रखा है। राजनीतिक दल तो उनके लिए कार्य करते ही रहते हैं। गणतंत्र दिवस के दिन पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के गोसाबा के छोटामोल्लाखाली थाना में बंद एक कैदी को छुड़ाने के लिए तृणमूल कांग्रेस के लोग थाने पर हमला कर पुलिस वालों की पिटाई कर कैदी को छुड़ा ले गए। आज आवश्यकता इस बात की है की राजनीतिक दलों को अपराधिक पृष्टभूमि वाले लोगों को अपने दल से निष्काषित करना होगा ।
अपराधियों, पुलिस व राजनेताओं का गठजोड़ संगठित अपराधों को बढ़ावा देता है। चाहे दिल्ली हो चाहे मुंबई हो शस्त्रों की सप्लाई व अपराधी समूहों को संरक्षण इस गठजोड़ से मिलता है, जबतक इस गठजोड़ को ईमानदारी से नष्ट नहीं किया जायेगा तब तक संगठित अपराध होते रहेंगे। अपराधियों ने अपने गठजोड़ में कार्यपालिका के भी अधिकारियो को शामिल कर रखा है। राजनीतिक दल तो उनके लिए कार्य करते ही रहते हैं। गणतंत्र दिवस के दिन पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के गोसाबा के छोटामोल्लाखाली थाना में बंद एक कैदी को छुड़ाने के लिए तृणमूल कांग्रेस के लोग थाने पर हमला कर पुलिस वालों की पिटाई कर कैदी को छुड़ा ले गए। आज आवश्यकता इस बात की है की राजनीतिक दलों को अपराधिक पृष्टभूमि वाले लोगों को अपने दल से निष्काषित करना होगा ।
सुमन
बुधवार, 27 जनवरी 2010
अगले वर्ष हिन्दुस्तान के महाभ्रष्ट को भारत रत्न मिल सकता है

केंद्र सरकार ने गणतंत्र दिवस के अवसर पर अनिवासी भारतीय अमेरिकन संत सिंह चटवाल को पद्मभूषण से सम्मानित किया है श्री संत सिंह चटवाल ने नब्बे लाख डालर का घोटाला स्टेट बैंक ऑफ़ इंडिया में किया था। जिसकी जांच सी.बी.आई ने की थी । जांच उपरांत सी.बी.आई ने संत सिंह चटवाल के खिलाफ आरोप पत्र भी दाखिल कर दिया है।
बोया पेड़ बबूल का..........
इस हफ्ते देश का ध्यान दो समाचारों ने अपनी ओर खींचा एक महाराष्ट्र में जबरिया मराठी भाषा को गैर मराठियों पर थोपना और दूसरा गुजरात हाई कोर्ट का एक याचिका के विरुद्ध निर्णय में यह कहना कि हिंदी को भले ही देश के बेशतर लोगो ने राष्ट्र भाषा मान लिया हो परन्तु देश में ऐसा कोई कानून या निजाम हिंदी को राष्ट्रभाषा घोषित करने के पक्ष में नहीं है।
दोनों भले ही समाचारों से उत्तरी भारतीय व अन्य हिंदी बोलने वाले भारतीयों की बहुत दिलआजारी हुई। हिंदी मीडिया पर बहुत चीख पुकार हुई परन्तु क्या यह बात
दोनों भले ही समाचारों से उत्तरी भारतीय व अन्य हिंदी बोलने वाले भारतीयों की बहुत दिलआजारी हुई। हिंदी मीडिया पर बहुत चीख पुकार हुई परन्तु क्या यह बात
सोमवार, 25 जनवरी 2010
माया के नऐ मैनेजर हो सकते है अमर सिंह?
सपा से नाराज ठाकुर नेता अमर सिंह आजकल अंदर ही अंदर बहिन जी के करीब आने का मार्ग प्रशस्त कर रहे है। खबर है कि बहिन जी भी अमर सिंह की मुलायम दुश्मनी का भरपूर लाभ उठा कर अपने सबसे मजबूत प्रतिद्वन्दी को चारों खाने चित करने पर विचार कर रही हैं क्योंकि पिहले लोकसभा चुनाव में ब्राह्मण वोटो ने जिस प्रकार उनको प्रधानमंत्री बनने की अभिलाषाओं पर ग्रहण लगाया उससे खिन्न होकर ठाकुर वोटों पर अब वह अपना ध्यान केन्द्रित करना चाहती है जो भाजपा व सपा दोनो से फिलहाल नाराज चल रहा है।
रविवार, 24 जनवरी 2010
पुराने दोस्तों में पड़ती खटास
संघ परिवार आजकल अमेरिका से नाराज चल रहा है और देश के बिगड़ते हालात चाहे वह आर्थिक हों या आंतरिक सुरक्षा उसके लिए अमेरिका व उसके इशारे पर काम कर रही मनमोहन सरकार को दोषी बतलाया है।
बिलकुल ठीक बात है। इसमें कोई शक नहीं कि जब से भारत ने अमेरिका की दोस्ती का दामन थामा है उसके रास्तों में कांटे ही कांटे बिछ गए हैं। आज स्तिथि यह है कि देश का लघु उद्योग तबाह हो चुका है।
बिलकुल ठीक बात है। इसमें कोई शक नहीं कि जब से भारत ने अमेरिका की दोस्ती का दामन थामा है उसके रास्तों में कांटे ही कांटे बिछ गए हैं। आज स्तिथि यह है कि देश का लघु उद्योग तबाह हो चुका है।
गुरुवार, 21 जनवरी 2010
देश की राजनीति की दिशा व दशा
राहुल गांधी ने देश की सभी राजनीतिक पार्टियों में लोकतंत्र के अभाव की बात कहकर एक अच्छा मुद्दा उठाया है। साथ ही उन्होंने पार्टियों में बढ़ते धन्नासेठों व बाहुबलियों के वर्चस्व तथा वंशवाद की परम्परा पर भी उंगली उठाई है।
राहुल ने जिस मकसद से भी यह मुद्दे उठाए हैं परन्तु उनका यह वकतव्य स्वागत करने योग्य है। आज देश के हर राजनीतिक दल लगभग एक समाज अवगुणों से जूझ रहे हैं।
मंगलवार, 19 जनवरी 2010
गरीबो, किसानो के मसीहा व धर्मनिरपेक्षता के सिपाही को लाल सलाम
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कामरेड ज्योति बसु एक गंभीर प्रवृत्ति सदा जीवन और बयानबाजी या नारों के स्थान पर सदा कार्य को प्रधानता देने वाले राज़नीतज्ञ थे। उन्होंने बंगाल को नक्सल समस्या से निदान देने के लिए पंचायत राज व्यवस्था कानून का क्रियान्वित पारदर्शी ढंग से करा कर गरीब किसानो को मूल भूत सुविधाएं देकर हथियार के स्थान पर उन्हें हल पकड़ने की तरफ आकर्षित कराया और उन्हें पार्टी का कैडर भी बनाया। साथ ही पश्चिम बंगाल में धर्मनिरपेक्षता का एक अभेद किला उन्होंने बना कर तैयार कर दिया जहाँ स्वतंत्रता के पश्चात अनेको सांप्रदायिक दंगे
सोमवार, 18 जनवरी 2010
सपा के गढ़ पर हाथी का कब्ज़ा - अंतिम भाग
परन्तु समाजवादियों के मजबूत किले में दरार पड़ने की शुरुवात होती है बेनी के कुर्मी प्रेम की और अधिक झुकाव और सपा में मौजूद मुस्लिम लीडरों के तिरस्कार से। देखते ही देखते उनके रिश्ते पहले खराब हुए फरीद महफूज़ किदवई से फिर सरवर अली खान भी उनका साथ छोड़ कर चले गए। इसी दरमियान सपा पर अमर सिंह की पकड़ बेनी से अधिक होने लगी और बेनी के गढ़ में अमर सिंह ने एक छात्र नेता अरविन्द सिंह गोप को तैयार करना शुरू कर दिया । दूसरी ओर चार बार के सांसद
शुक्रवार, 15 जनवरी 2010
पूंजीपतियों के मकडजाल में फंस चूका प्रजातंत्र
प्रजातान्त्रिक व्यवस्था को पूंजीपतियों ने किस प्रकार अपने चंगुल में जकड रखा है कि हर राजनितिक विचारधारा इसमें फंसकर चरमराती नजर आती है और हर राजनेता का चरित्र इस हमाम में नंगा नजर आता है।
राजतन्त्र में पूँजीवाद के वर्चस्व के अवगुणों से मुक्ति पाने के लिए ही प्रजातंत्र के सिधांत का जन्म हुआ था। फिर प्रजातंत्र में विभिन्न मार्गो से दाखिल होकर पूंजीपतियों ने प्रजा को ठगना व उसका शोषण प्रारंभ किया और समाजवाद की कई किस्में पैदा हो गयी। काल मार्क्स व लेनिन के साम्यवाद
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